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पशुओं को नहीं मिल पा रहा है हरा चारा
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चकिया पशु आश्रय केंद्र में जमीन पर भूसा खाते पशु।
- फोटो : CHANDAULI
चंदौली। कोरोना वायरस के संक्रमण से बढ़े लाकडाउन से आश्रयलयों में रखे गए पशुओं के सामने हरे चारे का संकट है। उन्हें चारा नहीं मिल पा रहा है। पशुओं की अपेक्षा देखभाल के लिए कर्मचारियों की संख्या काफ कम है। जिससे भी दिक्कत हो रही जिलेभर में तकरीबन 17 पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं।
मुख्यालय पर नगर पंचायत की ओर से दो पशु आश्रय केंद्र खोले गए है। नगर के कान्हा आश्रय केंद्र में लगभग 150 पशु है। जहां इनकी देख भाल के लिए छह कर्मचारी सुबह और रात में तीन कर्मचारी तैनात है। वही दूसरे केंद्र में 30 पशु हैं और वहां तीन कर्मचारी हैं। कान्हा आश्रय केंद्र में पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण कर्मचारियों को परेशान होना पड़ रहा है। पशुओं हरा चारा नहीं मिल पा रहा है।
नियामताबाद संवाददाता के अनुसार पशु आश्रय स्थल कठौड़ी मे कुल 105 पशु हैं। इनको चारे में भुसा,चोकर व कन्ना दिया जा रहा है। समय-समय पर पशु चिकित्सक जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इसका संचालन ग्राम पंचायत करती है। वहां लगे कर्मचारी देखभाल कर रहे हैं। सकलडीहा संवाददाता के अनुसार जमालपुर में 150 व लेहरा में 75 पशु है। इसके खाने का इंतजाम ग्राम सभा करती है। पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी पहुंच रहे हैं। चहनिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के सर्व आनंदपुर स्थित पशु आश्रय केंद्र पर 95 पशु हैं। वहां प्रतिदिन आठ मन भूसा व पचास किलो कन्ना दिया जाता है। पशुओं की देेखभाल के लिए दस कर्मचारी लगाए हैं। इसी तरह नौगढ़ में भी पशुओं को चारे के रूप में भूसा और कन्ना दिया जा रहा है मगर हरे चारे का पशुओं के सामने संकट हैं।
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धानापुर। धानापुर ब्लाक में बने पशु आश्रय स्थल की हालत बहुत ठीक नहीं है। वहां पशुपालन विभाग को ध्यान देने की जरूरत है। वहां पशुओं को सूखा भूसा चारे के रूप में दिया जा रहा है। साथ ही पशु बीमार भी हैं और आश्रय स्थल पर पड़े हुए हैं। लेकिन उनकी ठीक से देखभाल नहीं हो पा रही है। ऐसे में वहां पशुओं की हालत बहुत ठीक नहीं है। बीमार पशुओं की देखभाल भी नहीं हो पा रही है।
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मुख्यालय पर नगर पंचायत की ओर से दो पशु आश्रय केंद्र खोले गए है। नगर के कान्हा आश्रय केंद्र में लगभग 150 पशु है। जहां इनकी देख भाल के लिए छह कर्मचारी सुबह और रात में तीन कर्मचारी तैनात है। वही दूसरे केंद्र में 30 पशु हैं और वहां तीन कर्मचारी हैं। कान्हा आश्रय केंद्र में पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण कर्मचारियों को परेशान होना पड़ रहा है। पशुओं हरा चारा नहीं मिल पा रहा है।
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नियामताबाद संवाददाता के अनुसार पशु आश्रय स्थल कठौड़ी मे कुल 105 पशु हैं। इनको चारे में भुसा,चोकर व कन्ना दिया जा रहा है। समय-समय पर पशु चिकित्सक जांच के लिए पहुंच रहे हैं। इसका संचालन ग्राम पंचायत करती है। वहां लगे कर्मचारी देखभाल कर रहे हैं। सकलडीहा संवाददाता के अनुसार जमालपुर में 150 व लेहरा में 75 पशु है। इसके खाने का इंतजाम ग्राम सभा करती है। पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी पहुंच रहे हैं। चहनिया संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के सर्व आनंदपुर स्थित पशु आश्रय केंद्र पर 95 पशु हैं। वहां प्रतिदिन आठ मन भूसा व पचास किलो कन्ना दिया जाता है। पशुओं की देेखभाल के लिए दस कर्मचारी लगाए हैं। इसी तरह नौगढ़ में भी पशुओं को चारे के रूप में भूसा और कन्ना दिया जा रहा है मगर हरे चारे का पशुओं के सामने संकट हैं।
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धानापुर। धानापुर ब्लाक में बने पशु आश्रय स्थल की हालत बहुत ठीक नहीं है। वहां पशुपालन विभाग को ध्यान देने की जरूरत है। वहां पशुओं को सूखा भूसा चारे के रूप में दिया जा रहा है। साथ ही पशु बीमार भी हैं और आश्रय स्थल पर पड़े हुए हैं। लेकिन उनकी ठीक से देखभाल नहीं हो पा रही है। ऐसे में वहां पशुओं की हालत बहुत ठीक नहीं है। बीमार पशुओं की देखभाल भी नहीं हो पा रही है।

चहनिया पशु आश्रय स्थल पर खाली चरनी में चारा तलाशते पशु।- फोटो : CHANDAULI