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Chandauli News: कुपित महर्षि वेदव्यास ने बसाई थी अलग काशी
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पीडीडीयू नगर। महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास ने कुपति होकर काशी को श्राप दिया था और गंगा उस पार नई काशी बसाने लगे। उसे व्यास काशी कहा जाता है। साहूपुरी स्थित व्यास मंदिर में स्थापित शिवलिंग का दर्शन किए बिना काशी यात्रा का लाभ नहीं मिलता।
मंदिर के महंत अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद महर्षि व्यास बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने काशी गए। स्कंद पुराण के काशी खंड में लिखा है कि यहां कोई भूखा नहीं सोता लेकिन महर्षि वेद-व्यास को दो-तीन दिनों तक भूखे रहना पड़ा। इससे नाराज होकर उन्होंने काशी श्राप दिया और पांच मील दूर दूसरी काशी बसाने की शुरुआत कर दी।
उन्होंने बताया कि भोलेनाथ ने मां अन्नपूर्णा को वेश बदलकर व्यास जी के पास भेजा। देवी अन्नपूर्ण 56 प्रकार के प्रसाद का भोग लेकर ऋषि के पास पहुंची लेकिन उन्होंने उन्हें पहचान लिया और लौटा दिया। भगवान गणेश ने महर्षि व्यास के क्रोध को शांत कराया। गणेश जी से प्रसन्न होकर महर्षि व्यास ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने काशी की शाप मुक्ति का वर मांग लिया। उन्होंने काशी को श्राप मुक्त कर दिया और गणेश जी को महाभारत लिखने के लिए तैयार कर लिया। मान्यता है कि व्यास मंदिर में दर्शन किए बिना काशी दर्शन का पुण्य नहीं मिलता।
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मंदिर के महंत अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद महर्षि व्यास बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने काशी गए। स्कंद पुराण के काशी खंड में लिखा है कि यहां कोई भूखा नहीं सोता लेकिन महर्षि वेद-व्यास को दो-तीन दिनों तक भूखे रहना पड़ा। इससे नाराज होकर उन्होंने काशी श्राप दिया और पांच मील दूर दूसरी काशी बसाने की शुरुआत कर दी।
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उन्होंने बताया कि भोलेनाथ ने मां अन्नपूर्णा को वेश बदलकर व्यास जी के पास भेजा। देवी अन्नपूर्ण 56 प्रकार के प्रसाद का भोग लेकर ऋषि के पास पहुंची लेकिन उन्होंने उन्हें पहचान लिया और लौटा दिया। भगवान गणेश ने महर्षि व्यास के क्रोध को शांत कराया। गणेश जी से प्रसन्न होकर महर्षि व्यास ने उनसे वरदान मांगने को कहा तो उन्होंने काशी की शाप मुक्ति का वर मांग लिया। उन्होंने काशी को श्राप मुक्त कर दिया और गणेश जी को महाभारत लिखने के लिए तैयार कर लिया। मान्यता है कि व्यास मंदिर में दर्शन किए बिना काशी दर्शन का पुण्य नहीं मिलता।
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