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महा अष्टमी पर मां गौरी की हुई पूजा
Chandauli
Updated Tue, 08 Apr 2014 05:30 AM IST
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मुगलसराय। वासंतिक नवरात्र की अष्टमी तिथि पर मंदिरों में मां महागौरी की पूजा के लिए दिन भर श्रद्धालुओं की भीड़ नगर व ग्रामीण अंचलों में रही। नगर स्थित प्राचीन काली मंदिर में महाआरती का आयोजन व महाभोग का वितरण किया गया।
नवरात्र के अष्टमी पर महागौरी के दर्शन के लिए सोमवार को दिन भर नगर व गांव कस्बों के देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं की हुजूम न सिर्फ मां के दरबार में हाजिरी लगाई बल्कि अपनी अरज-गरज भी जगत जननी के दरबार में कही। सौभाग्य, धन संपदा, सौन्दर्य और नारी सुलभ गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं। नवरात्र व्रत के इसी रूप की पूजा करते हैं। अठारह गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री भी हैं। वह धन्य-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति प्रदात्री हैं। महागौरी इसी का प्रतीक है। भगवान शिव ने काली जी पर गंगा जल छिड़ककर तो वह महागौरी हो गई। महागौरी सृष्टि का आधार है। महागौरी ही अक्षत सुहाग की प्रतीक हैं। देवी के इस रूप की पूजा-अर्चना विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का फल प्रदान करती हैं। प्राचीन काली मंदिर में आज महाआरती का भी आयोजन किया गया है।
नवरात्र के मद्देनजर नगर के प्राचीन काली माता मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, गौड़िया मठ, महावीर मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में लोगों का आना-जाना लगा रहा। ग्रामीण अंचलों सैयदराजा, धीना, कंदवा, धानापुर, सकलडीहा, दुलहीपुर, नियामताबाद सहित अन्य गांवों में भी भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक मां महागौरी की आराधना की।
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फोटो संख्या 52
मंदिरों में लगी रही भक्तों की भीड़
चंदौली। देवी मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता देर शाम तक लगा रहा। वहीं रात को देवी जागरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने देवी गीतों के माध्यम से लोगों में भक्ति की अलख जगाई।
नवरात्र में आठवें दिन महागौरी की लोगों ने पूरे विधि विधान से कलश की स्थापना कर पूजन-अर्चन किया। नगर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, कैली रोड स्थित दुर्गा माता मंदिर और महाबीर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में लोगों ने देवी माता के अलग-अलग रूपों के दर्शन पूजन किए इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में मौजूद देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं का अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। खासकर नगर के रेलवे स्टेशन के सामने मां काली के मंदिर में काफी भीड़ उमड़ी रही। इसके अतिरित नवमी पूजन को लेकर भी बाजारों में खरीदारी होती रही। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी कहीं-कहीं मंदिरों के आस-पास मेले का आयोजन किया गया था, जहां लोगों देवी मां के दर्शन किए और बच्चाें संग मेले का भी आंनद उठाया।
नवरात्र के कारण माला-फूलों संग पूजन सामग्रियों के दामों में भी बढ़ोत्तरी रही। मंहगाई होने के बाद भी फूलों की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। पिछले वर्ष के तुलना में मालाआें के दामों में बढ़ोत्तरी रही। नवमी पूजन के लिए लोगों ने आवश्यकता के अनुसार माला-फूलों और पूजन सामग्रियों की खरीदारी किया। इससे वहां भारी भीड़ देखने को मिली।
फोटो संख्या 054
चंदौली। नगर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर प्रांगण के समीप चल रहे शतचंडी महायज्ञ के आठवें दिन भक्तों ने विधि पूर्वक पूजन-अर्चन किया। इस दौरान रामदास नागा महाराज ने शाम मां गौरी की मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि-विधान से आरती की। महायज्ञ के अंतिम दिन मंगलवार व बुधवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा भी की।
इस अवसर पर नागा महाराज ने कहा कि यज्ञ समाप्ति मंगलवार को एक बजे होगी। इसके उपरांत यज्ञ स्थल पर उमड़े भक्त आहुति देकर ईश्वर से मंगल कामना करेंगे। शाम को यज्ञ स्थल पर आयोजित प्रवचन में आसपास क्षेत्र से भारी संख्या में भक्त उमड़ पड़े। मथुरा से आए कथावाचक महेंद्रनाथ व्यास ने भक्तों को कथा सुनाकर भाव विभोर कर दिया। कहा कि राम नाम से मुक्ति मिलती है और माता-पिता की सेवा करने से मनुष्य का जीवन सुखमय हो जाता है। सच्ची श्रद्धा व अटूट विश्वास के साथ भक्ति व भजन करने से मनुष्य को असीम सुख की प्राप्ति होती है। इस दौरान बीच-बीच में भक्तों के गगनभेदी जयकारे से पूरा मंदिर प्रांगण गूंज उठा। इसके पूर्व सुबह व शाम के वक्त भक्तों ने यज्ञ मंडप की पूरे आस्था के साथ परिक्रमा की।
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नवरात्र के अष्टमी पर महागौरी के दर्शन के लिए सोमवार को दिन भर नगर व गांव कस्बों के देवी मंदिरों पर श्रद्धालुओं की हुजूम न सिर्फ मां के दरबार में हाजिरी लगाई बल्कि अपनी अरज-गरज भी जगत जननी के दरबार में कही। सौभाग्य, धन संपदा, सौन्दर्य और नारी सुलभ गुणों की अधिष्ठात्री देवी महागौरी हैं। नवरात्र व्रत के इसी रूप की पूजा करते हैं। अठारह गुणों की प्रतीक महागौरी अष्टांग योग की अधिष्ठात्री भी हैं। वह धन्य-धान्य, गृहस्थी, सुख और शांति प्रदात्री हैं। महागौरी इसी का प्रतीक है। भगवान शिव ने काली जी पर गंगा जल छिड़ककर तो वह महागौरी हो गई। महागौरी सृष्टि का आधार है। महागौरी ही अक्षत सुहाग की प्रतीक हैं। देवी के इस रूप की पूजा-अर्चना विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का फल प्रदान करती हैं। प्राचीन काली मंदिर में आज महाआरती का भी आयोजन किया गया है।
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नवरात्र के मद्देनजर नगर के प्राचीन काली माता मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, गौड़िया मठ, महावीर मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में लोगों का आना-जाना लगा रहा। ग्रामीण अंचलों सैयदराजा, धीना, कंदवा, धानापुर, सकलडीहा, दुलहीपुर, नियामताबाद सहित अन्य गांवों में भी भक्तों ने श्रद्धा पूर्वक मां महागौरी की आराधना की।
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मंदिरों में लगी रही भक्तों की भीड़
चंदौली। देवी मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए भक्तों का तांता देर शाम तक लगा रहा। वहीं रात को देवी जागरण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने देवी गीतों के माध्यम से लोगों में भक्ति की अलख जगाई।
नवरात्र में आठवें दिन महागौरी की लोगों ने पूरे विधि विधान से कलश की स्थापना कर पूजन-अर्चन किया। नगर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर, श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर, कैली रोड स्थित दुर्गा माता मंदिर और महाबीर मंदिर सहित अन्य मंदिरों में लोगों ने देवी माता के अलग-अलग रूपों के दर्शन पूजन किए इसके अलावा ग्रामीण अंचलों में मौजूद देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं का अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। खासकर नगर के रेलवे स्टेशन के सामने मां काली के मंदिर में काफी भीड़ उमड़ी रही। इसके अतिरित नवमी पूजन को लेकर भी बाजारों में खरीदारी होती रही। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी कहीं-कहीं मंदिरों के आस-पास मेले का आयोजन किया गया था, जहां लोगों देवी मां के दर्शन किए और बच्चाें संग मेले का भी आंनद उठाया।
नवरात्र के कारण माला-फूलों संग पूजन सामग्रियों के दामों में भी बढ़ोत्तरी रही। मंहगाई होने के बाद भी फूलों की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ लगी रही। पिछले वर्ष के तुलना में मालाआें के दामों में बढ़ोत्तरी रही। नवमी पूजन के लिए लोगों ने आवश्यकता के अनुसार माला-फूलों और पूजन सामग्रियों की खरीदारी किया। इससे वहां भारी भीड़ देखने को मिली।
फोटो संख्या 054
चंदौली। नगर स्थित प्राचीन काली माता मंदिर प्रांगण के समीप चल रहे शतचंडी महायज्ञ के आठवें दिन भक्तों ने विधि पूर्वक पूजन-अर्चन किया। इस दौरान रामदास नागा महाराज ने शाम मां गौरी की मंत्रोच्चार के साथ पूरे विधि-विधान से आरती की। महायज्ञ के अंतिम दिन मंगलवार व बुधवार को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भक्तों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा भी की।
इस अवसर पर नागा महाराज ने कहा कि यज्ञ समाप्ति मंगलवार को एक बजे होगी। इसके उपरांत यज्ञ स्थल पर उमड़े भक्त आहुति देकर ईश्वर से मंगल कामना करेंगे। शाम को यज्ञ स्थल पर आयोजित प्रवचन में आसपास क्षेत्र से भारी संख्या में भक्त उमड़ पड़े। मथुरा से आए कथावाचक महेंद्रनाथ व्यास ने भक्तों को कथा सुनाकर भाव विभोर कर दिया। कहा कि राम नाम से मुक्ति मिलती है और माता-पिता की सेवा करने से मनुष्य का जीवन सुखमय हो जाता है। सच्ची श्रद्धा व अटूट विश्वास के साथ भक्ति व भजन करने से मनुष्य को असीम सुख की प्राप्ति होती है। इस दौरान बीच-बीच में भक्तों के गगनभेदी जयकारे से पूरा मंदिर प्रांगण गूंज उठा। इसके पूर्व सुबह व शाम के वक्त भक्तों ने यज्ञ मंडप की पूरे आस्था के साथ परिक्रमा की।