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नगर निकाय चुनाव.....12
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:59 AM IST
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चंदौली। नगर निकायों में अध्यक्ष पद के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद सियासी समीकरण अचानक बदल गए हैं। अगली कतार में बैठे दावेदार जहां मायूस हो गए हैं वहीं आरक्षण ने कई अनजान चेहरों के सपनों को पंख लगा दिए हैं। नगर पंचायत चंदौली की बात करें तो इस बार यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 14 अक्तूबर 1971 में गठन के बाद से पहली बार नगर पंचायत की सीट अनुसूचित हुई है। वहीं वर्ष 2006 में सीट सामान्य थी। पिछड़े वर्ग ने चार बार नगर पंचायत की नुमाइंदगी की है।
नगर पंचायत चंदौली का पहला चुनाव 1988 में बगैर आरक्षण के हुआ। पिछड़ा वर्ग के लालता यादव नगर पंचायत के पहले अध्यक्ष बने। इसके बाद 1995 में अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई। लालता यादव दोबारा अध्यक्ष बने। 2000 में पिछड़ी महिला सीट पर मिथिलेश गुप्ता अध्यक्ष बनीं। 2006 में पहली बार अध्यक्ष का पद सामान्य रहा। इस दौरान सुदर्शन सिंह ने जीत दर्ज कर पंचायत की कमान संभाली। 2012 में चंदौली नगर पंचायत एक बार फिर से पिछड़ी महिला के लिए आरक्षित हुई। इस बार मीनाक्षी यादव ने निकाय चुनाव अपने नाम किया। इस बार अध्यक्ष बनने का सपना संजोए बैठे दावेदार सामान्य सीट की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन आरक्षण जारी होते ही दावेदारों के सपने टूट कर बिखर गए। जबकि अनुुसूचित वर्ग के लोगों में खुशी है।
नगर पंचायत चंदौली का पहला चुनाव 1988 में बगैर आरक्षण के हुआ। पिछड़ा वर्ग के लालता यादव नगर पंचायत के पहले अध्यक्ष बने। इसके बाद 1995 में अध्यक्ष की सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हुई। लालता यादव दोबारा अध्यक्ष बने। 2000 में पिछड़ी महिला सीट पर मिथिलेश गुप्ता अध्यक्ष बनीं। 2006 में पहली बार अध्यक्ष का पद सामान्य रहा। इस दौरान सुदर्शन सिंह ने जीत दर्ज कर पंचायत की कमान संभाली। 2012 में चंदौली नगर पंचायत एक बार फिर से पिछड़ी महिला के लिए आरक्षित हुई। इस बार मीनाक्षी यादव ने निकाय चुनाव अपने नाम किया। इस बार अध्यक्ष बनने का सपना संजोए बैठे दावेदार सामान्य सीट की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन आरक्षण जारी होते ही दावेदारों के सपने टूट कर बिखर गए। जबकि अनुुसूचित वर्ग के लोगों में खुशी है।
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