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ड्रिप विधि सिंचाई प्रणाली का किया निरीक्षण
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चंदौली। प्रधानमंत्री जल संचय योजना के तहत केवीके में पौधों की सिंचाई अब ड्रीप विधि से हो रही है। शनिवार को विधायक साधना सिंह ने इसका निरीक्षण किया। उन्होने इस विधि से सिंचाई करने के लिए किसानों को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया।
किसान टपक विधि से सिंचाई कर अधिक पैदावार कर सकते हैं। इससे उनकी अच्छी खसाी आय होगी। शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में लगाए गए ड्रिप एरिगेशन विधि का अवलोकन किया। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों को इसका प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डा. आरपीएस रघुवंशी ने किसानों को इस विधि से सिंचाई करने की जानकारी दी। कहा कि प्रधानमंत्री जल संचय योजना के तहत टपक विधि अपनाकर किसान कम पानी में अधिक पैदावार कर सकते हैं। सब्जी और बागवानी के लिए सबसे फायदेमंद साबित होगा। इसमें आम, आंवला, अनार, अमरूद और केला के लिए उपयोगी है। इस विधि से पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी मिलता है। वहीं आज से समय में घटते पानी के ग्राउंड लेबल को भी बचाने में सहायक सिद्ध होगा। कहा कि इस विधि को अपनाने के लिए पौधे के साइज के हिसाब से लागत आता है। इसमें अनुसूचित जाति के लोगों को 80 और अन्य किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। पांच एकड़ के किसानों को अनुदान कम है। वहीं सीमांक किसानों को अनुदान ज्यादा रखा गया है। इस मौके पर डा. विनोद सिंह, डा. पीएन सिंह, डा. समीर पांडेय, राघव सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
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किसान टपक विधि से सिंचाई कर अधिक पैदावार कर सकते हैं। इससे उनकी अच्छी खसाी आय होगी। शनिवार को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में लगाए गए ड्रिप एरिगेशन विधि का अवलोकन किया। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों को इसका प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डा. आरपीएस रघुवंशी ने किसानों को इस विधि से सिंचाई करने की जानकारी दी। कहा कि प्रधानमंत्री जल संचय योजना के तहत टपक विधि अपनाकर किसान कम पानी में अधिक पैदावार कर सकते हैं। सब्जी और बागवानी के लिए सबसे फायदेमंद साबित होगा। इसमें आम, आंवला, अनार, अमरूद और केला के लिए उपयोगी है। इस विधि से पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी मिलता है। वहीं आज से समय में घटते पानी के ग्राउंड लेबल को भी बचाने में सहायक सिद्ध होगा। कहा कि इस विधि को अपनाने के लिए पौधे के साइज के हिसाब से लागत आता है। इसमें अनुसूचित जाति के लोगों को 80 और अन्य किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। पांच एकड़ के किसानों को अनुदान कम है। वहीं सीमांक किसानों को अनुदान ज्यादा रखा गया है। इस मौके पर डा. विनोद सिंह, डा. पीएन सिंह, डा. समीर पांडेय, राघव सिंह सहित किसान मौजूद रहे।
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