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धनुष टूटते ही सीता ने गले में डाली वरमाला
Updated Sat, 10 Nov 2018 12:36 AM IST
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कंदवा। क्षेत्र के अमड़ा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में गुरुवार की रात गांव के युवकों ने धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का आकर्षक एवं मनोहारी मंचन किया। धनुष टूटते ही सीता ने प्रभु के गले में वरमाला डाली और श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव एवं जय श्रीराम के नारे लगाए।
बरहनी विकास खंड के अमड़ा गांव में हर वर्ष दीपावली के अगले दिन एक दिवसीय रामलीला रामलीला समिति के तत्वावधान में गांव के युवकों की ओर से होती रही है। गुरुवार की रात धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। लीला का शुभारंभ सीता स्वयंवर के साथ हुआ। दरबार में महाराज जनक, महर्षि विश्वामित्र के साथ राम अनुज लक्ष्मण के साथ विराजमान थे। स्वयंवर के दौरान एक से बढ़कर एक महारथी, योद्धा और पराक्रमी राजा भगवान शिव के धनुष को तोड़ना तो दूर हिला भी नहीं सके। राजा जनक के दरबार में कोई ऐसा नहीं बचा जिसने जोर आजमाइश न की हो। तब जनक की तीखी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि यदि बड़े भाई की आज्ञा मिले तो मैं पूरे ब्रह्मांड को कंदुक की भांति उठाकर फेंक दूं। राम क्रोधित लक्ष्मण को शांत कराते हैं। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम धनुष के पास जाते हैं और गुरु को प्रणाम करते हैं। राम धनुष को प्रणाम कर उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष बीच से टूट जाता है। सीता हाथ में जयमाल लेकर राम की ओर बढ़ती हैं और उनके गले में जयमाल डाल देती हैं। इसी क्षण परशुराम गर्जना करते हुए आते हैं। शिव धनुष को खंडित देखकर परशुराम क्रोधित होते हैं। उसके बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद होता है। बाद में अपनी शंका दूर होने पर परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इस दौरान डाक्टर समर बहादुर सिंह, बलराम पाठक, अनिल सिंह, उदय नारायण सिंह, प्रमोद कुमार, अंशुमान सिंह, संजय सिंह, रामकिशुन, मृत्युंजय मौजूद रहे ।
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बरहनी विकास खंड के अमड़ा गांव में हर वर्ष दीपावली के अगले दिन एक दिवसीय रामलीला रामलीला समिति के तत्वावधान में गांव के युवकों की ओर से होती रही है। गुरुवार की रात धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। लीला का शुभारंभ सीता स्वयंवर के साथ हुआ। दरबार में महाराज जनक, महर्षि विश्वामित्र के साथ राम अनुज लक्ष्मण के साथ विराजमान थे। स्वयंवर के दौरान एक से बढ़कर एक महारथी, योद्धा और पराक्रमी राजा भगवान शिव के धनुष को तोड़ना तो दूर हिला भी नहीं सके। राजा जनक के दरबार में कोई ऐसा नहीं बचा जिसने जोर आजमाइश न की हो। तब जनक की तीखी बातें सुनकर लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि यदि बड़े भाई की आज्ञा मिले तो मैं पूरे ब्रह्मांड को कंदुक की भांति उठाकर फेंक दूं। राम क्रोधित लक्ष्मण को शांत कराते हैं। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम धनुष के पास जाते हैं और गुरु को प्रणाम करते हैं। राम धनुष को प्रणाम कर उठा लेते हैं और प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष बीच से टूट जाता है। सीता हाथ में जयमाल लेकर राम की ओर बढ़ती हैं और उनके गले में जयमाल डाल देती हैं। इसी क्षण परशुराम गर्जना करते हुए आते हैं। शिव धनुष को खंडित देखकर परशुराम क्रोधित होते हैं। उसके बाद परशुराम लक्ष्मण संवाद होता है। बाद में अपनी शंका दूर होने पर परशुराम उन्हें आशीर्वाद देकर वापस लौट जाते हैं। इस दौरान डाक्टर समर बहादुर सिंह, बलराम पाठक, अनिल सिंह, उदय नारायण सिंह, प्रमोद कुमार, अंशुमान सिंह, संजय सिंह, रामकिशुन, मृत्युंजय मौजूद रहे ।
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