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Chandauli News: कुत्ते-बंदर के काटने पर रोज 50 से 60 लोग पहुंच रहे अस्पताल
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चकिया जिला संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी कक्ष में इंजेक्शन लगाते फार्मासिस्ट साकिब। स्रोत:-जाग
चकिया। जिले में कुत्ते, बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के काटने की घटनाएं लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। जिला संयुक्त चिकित्सालय में प्रतिदिन 50 से 60 लोग एंटी रेबीज टीका लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे अधिक मरीज कुत्तों के काटने से प्रभावित हैं। चिकित्सकों ने जानवर के काटने या खरोंचने पर तत्काल उपचार कराने की सलाह दी है।
जिला संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी कक्ष में पशुओं के काटने से घायल लोगों के प्राथमिक उपचार और टीकाकरण की व्यवस्था है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र सिंह के अनुसार, जानवरों के काटने से घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जरूरत के अनुसार एंटी रेबीज टीका लगाया जाता है। फार्मासिस्ट साकिब ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों में करीब 50 प्रतिशत कुत्तों, 30 प्रतिशत बंदरों, 10 प्रतिशत बिल्लियों और 10 प्रतिशत अन्य जानवरों के काटने से प्रभावित होते हैं।
इनसेट-
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चार दिनों में 173 लोगों को लगी वैक्सीन
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 13 अक्तूबर को 41, 16 अक्तूबर को 33, 23 अक्तूबर को 47 और 27 अक्तूबर को 52 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इन चार दिनों में कुल 173 लोगों का टीकाकरण हुआ। 27 अक्तूबर को सबसे अधिक 52 लोगों को टीका लगाया गया। मरीजों की आवाजाही को देखते हुए अस्पताल में टीकाकरण के लिए अलग कक्ष की जरूरत भी महसूस की जा रही है। इससे मरीजों को सुविधा मिलने के साथ इमरजेंसी में अन्य मरीजों के उपचार की व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
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इनसेट-
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सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है टीका
जिला संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल के साथ सभी ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर एंटी रेबीज टीका उपलब्ध है। जानवर के काटने के बाद मरीज नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते, बंदर, बिल्ली या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने अथवा खरोंचने को हल्के में न लें।
जानवर काटे तो तुरंत करें ये काम
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- घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
- घाव पर मिर्च, तेल, राख या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
- बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें।
- डॉक्टर के निर्देशानुसार एंटी रेबीज टीके की पूरी खुराक लगवाएं।
- जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी लगवाएं।
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जिला संयुक्त चिकित्सालय के इमरजेंसी कक्ष में पशुओं के काटने से घायल लोगों के प्राथमिक उपचार और टीकाकरण की व्यवस्था है। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र सिंह के अनुसार, जानवरों के काटने से घायल मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जरूरत के अनुसार एंटी रेबीज टीका लगाया जाता है। फार्मासिस्ट साकिब ने बताया कि अस्पताल आने वाले मरीजों में करीब 50 प्रतिशत कुत्तों, 30 प्रतिशत बंदरों, 10 प्रतिशत बिल्लियों और 10 प्रतिशत अन्य जानवरों के काटने से प्रभावित होते हैं।
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चार दिनों में 173 लोगों को लगी वैक्सीन
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, 13 अक्तूबर को 41, 16 अक्तूबर को 33, 23 अक्तूबर को 47 और 27 अक्तूबर को 52 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई। इन चार दिनों में कुल 173 लोगों का टीकाकरण हुआ। 27 अक्तूबर को सबसे अधिक 52 लोगों को टीका लगाया गया। मरीजों की आवाजाही को देखते हुए अस्पताल में टीकाकरण के लिए अलग कक्ष की जरूरत भी महसूस की जा रही है। इससे मरीजों को सुविधा मिलने के साथ इमरजेंसी में अन्य मरीजों के उपचार की व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
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सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है टीका
जिला संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल के साथ सभी ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर एंटी रेबीज टीका उपलब्ध है। जानवर के काटने के बाद मरीज नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुत्ते, बंदर, बिल्ली या किसी अन्य संदिग्ध जानवर के काटने अथवा खरोंचने को हल्के में न लें।
जानवर काटे तो तुरंत करें ये काम
- घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं।
- घाव पर मिर्च, तेल, राख या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं।
- बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह लें।
- डॉक्टर के निर्देशानुसार एंटी रेबीज टीके की पूरी खुराक लगवाएं।
- जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन भी लगवाएं।