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ग्यारह न्यायाधीशों के जिम्मे 48 हजार से अधिक लंबित मुकदमे

Wed, 27 Apr 2016 12:59 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला चंदौली
ब्यूरो, अमर उजाला चंदौली Updated Wed, 27 Apr 2016 12:59 AM IST
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48 thousand cases pending in courts
लाोक अदालत
 जनपद में जजशिप स्थापना का इतिहास लगभग 19 वर्ष पुराना है। इसके बावजूद अब तक चंदौली में एक अदद न्यायालय भवन नहीं बन सका है। इसके चलते यहां न्यायिक अधिकारियों की कमी बनी हुई है। ताजा सूरतेहाल यह है कि ग्यारह न्यायाधीशों के पास 48 हजार 500 मुकदमे लंबित हैं। न्यायालय भवन न होने के कारण उच्च न्यायालय भी न्यायिक अधिकारियों को जिले में नहीं भेज पा रहा है। जनपद में जिला जज सहित कुल ग्यारह न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इन अधिकारियों के पास कुल मिलाकर 48 हजार 500 मुकदमे पेंडिंग हैं। यहां मुख्य न्यायालय डिस्ट्रिक्ट डेमोक्रेटिक बार के भवन में चलता है। यहां न्यायिक मजिस्ट्रेट और सहायक न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद विगत एक वर्षों से रिक्त है। इन अदालतों में मुकदमों की सुनवाई न होकर सिर्फ तारीखें पड़ती रहती हैं। सर्वाधिक लंबित मामले जमीन से जुड़े हैं।  
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रेलवे क्रासिंग सबसे बड़ी समस्या
चंदौली। पंडित कमलापति त्रिपाठी डिग्री कालेज परिसर में पांच कोर्ट चलते हैं। यहां से मुख्य न्यायालय की दूरी लगभग डेढ़ किमी है। दोनों न्यायालयों के बीच रेलवे क्रासिंग है। इस क्रासिंग पर गेट बंद रहने से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और वादकारियों का काफी समय खराब हो जाता है। एक न्यायिक अधिकारी बताते हैं कि रेलवे क्रासिंग पर जाम में खराब हुए समय को जोड़ा जाए तो वर्ष में तो लगभग 24 दिन होते हैं।
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बयान.....
जिले में न्यायालय भवन नहीं होने से कई न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि यहां लंबित मुकदमों की संख्या अन्य जनपदों की अपेक्षा काफी अधिक है।
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शमशेर सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी
 
न्यायालयों में वर्तमान में जो व्यवस्था है उसमें भी बिजली पानी की किल्लत कोढ़ में खाज का काम कर रही है। रणधीर सिंह, अध्यक्ष, सिविल बार एसोसिएशन

 
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