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धरम न दूसर सत्य समाना, आगम निगम पुरान बखाना
Updated Sun, 04 Nov 2018 01:13 AM IST
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कंदवा। धरम न दूसर सत्य समाना, आगम निगम पुरान बखाना। धर्म की इससे सुंदर और संक्षिप्त परिभाषा संभव नहीं है।
उक्त विचार गोरखा हनुमान मंदिर पर चल रही पांच दिवसीय संगीतमय मानस कथा के दूसरे दिन शनिवार को जौनपुर से पधारे मानस प्रवक्ता पं. रामेश्वरानंद जी महाराज ने कहीं। कहा कि एक तरफ गोस्वामी तुलसीदास जी ने सत्य को धर्म बताया है तो वहीं परहित सरिस धरम नहीं भाई कहकर धर्म के दूसरे सोपान की व्याख्या की है। परोपकार के तीन गुण तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण हैं ,पर गोस्वामी तुलसीदास ने त्रिगुणातीत परोपकार की बात कही है। उन्होंने सौभाग्य व दुर्भाग्य को परिभाषित करते हुए कहा कि मानव का प्रभु का सामीप्य प्राप्त करना सौभाग्य और जब दूर रहना दुर्भाग्य है। कहा कि हिंसा महज मारने या रक्त प्रवाहित करने को नहीं कहा जाता है। वाणी से, कर्म से और मन से भी हिंसा की जाती है। मानव को इन तीनों तरह की हिंसा से बचना चाहिए। मानस मंजरी विभा उपाध्याय ने कहा कि परमात्मा के प्रसन्न होने से मनुष्य को संपत्ति मिलती है पर प्रभु की प्रसन्नता से सत्संग का अवसर मिलता है। कथा के दौरान हरीश सिंह, सतीश सिंह, कपिलदेव उपाध्याय, शेषनाथ, इंदल सिंह, सियाराम यादव, विनोद तिवारी, पारस सिंह, सर्वजीत यादव, सच्चिदानंद उपाध्याय, नवल किशोर राय, पप्पू सिंह मौजूद रहे।