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धान के कटोरे में लहलहाएगी औषधि की फसल
Updated Wed, 09 Aug 2017 01:07 AM IST
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चंदौली। धान का कटोरा कहे जाने वाले जनपद में औषधीय पौधों की फसल लहलहाती नजर आएगी। शासन स्तर से निर्देश प्राप्त होने के बाद जिला उद्यान विभाग औषधि की खेती कराने की तैयारी में जुट गया है। नक्सल क्षेत्र सहित कम पानी वाले इलाकों के किसान औषधि की खेती कर अच्छा मुनाफा अर्जित कर सकते हैं। इसके लिए उद्यान विभाग की ओर से अनुदान की भी व्यवस्था की गई है। जनपद में पहली बार शुरू की गई इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को विभाग की वेबसाइट पर जाकर औषधि पौध मिशन पर अपना आनलाइन पंजीकरण कराना होगा।
जिला उद्यान विभाग कम पानी वाले और पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को औषधि की खेती की तरफ आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। खासकर नक्सल क्षेत्र नौगढ़, चकिया, शहाबगंज सहित गंगा किनारे के ऊंचे स्थान औषधि की खेती के लिए काफी मुफीद हैं। विभाग की ओर से तुलसी, अश्वगंधा, सतावर, एलोवेरा, मूसली, सिड्रोनेला, तामा-रोजा आदि औषधीय फसलों की खेती पर 50 प्रतिशत से अधिक का अनुदान मिलेगा। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि जो किसान औषधि की खेती करना चाहते हैं वह उद्यान विभाग की वेबसाइट पर जाकर पहले औषधि पौधमिशन पर अपना पंजीकरण कराएंगे। इसके पश्चात जिस फसल की खेती करना चाहते हैं उसका नाम और खेती का क्षेत्रफल भरना होगा। बताया कि इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि फसल तैयार होने पर वह उसे कहां बेच सकते हैं। खेती से पहले बकायदा विशेषज्ञों द्वारा किसानों को तकनीक की जानकारी दी जाएगी। बताया कि अश्वगंधा के लिए दस हेक्टेयर और अन्य फसलों के लिए पांच-पांच हेक्टेयर की खेती का लक्ष्य निर्धारित है।
जिला उद्यान विभाग कम पानी वाले और पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों को औषधि की खेती की तरफ आकर्षित करने की तैयारी कर रहा है। खासकर नक्सल क्षेत्र नौगढ़, चकिया, शहाबगंज सहित गंगा किनारे के ऊंचे स्थान औषधि की खेती के लिए काफी मुफीद हैं। विभाग की ओर से तुलसी, अश्वगंधा, सतावर, एलोवेरा, मूसली, सिड्रोनेला, तामा-रोजा आदि औषधीय फसलों की खेती पर 50 प्रतिशत से अधिक का अनुदान मिलेगा। जिला उद्यान अधिकारी सुरेंद्र राम भाष्कर ने बताया कि जो किसान औषधि की खेती करना चाहते हैं वह उद्यान विभाग की वेबसाइट पर जाकर पहले औषधि पौधमिशन पर अपना पंजीकरण कराएंगे। इसके पश्चात जिस फसल की खेती करना चाहते हैं उसका नाम और खेती का क्षेत्रफल भरना होगा। बताया कि इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित भी किया जाएगा और उन्हें बताया जाएगा कि फसल तैयार होने पर वह उसे कहां बेच सकते हैं। खेती से पहले बकायदा विशेषज्ञों द्वारा किसानों को तकनीक की जानकारी दी जाएगी। बताया कि अश्वगंधा के लिए दस हेक्टेयर और अन्य फसलों के लिए पांच-पांच हेक्टेयर की खेती का लक्ष्य निर्धारित है।
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