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मिलो से अनुबंध न होने से धान की खरीद ठप
Updated Mon, 04 Dec 2017 12:37 AM IST
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चकिया। क्रय केंद्रों तथा धान मिलों के बीच अनुबंध गठित करने में हो रही देरी के चलते धान की खरीद पूरे जिले में बाधित है। जिससे किसानों को अपना धान गेहूँ की खेती के लिए बिचैलियों को बेचने की मजबूरी है। सरकार के निर्देश पर जिले में छह क्रय एजेंसियों के जरिये कई क्रय क्रेंद्र बनाए गये हैं। इन क्रय केंद्रों पर धान खरीद के बोर्ड लग गये हैं तथा नमी मापक यंत्र भी उपलब्ध हो गये हैं। लेकिन धान के क्रय में तेजी नहीं आ पा रही है। जिससे किसानों में नाराजगी है।
क्षेत्र में धान की कटाई का काम पूरा हो चुका है तथा वर्तमान में किसान गेहूँ की बुआई करने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। गेहूँ की बुआई करने के लिए किसानों को गेहूँ के बीज, खाद, डीजल खरीदने के लिए नगद पैसे की जरूरत है। लेकिन धान की खरीद न होने से किसानों को उधार बीज खरीद कर बोना पड़ रहा है। धान खरीद में देरी के पीछे क्रय केन्द्रों एवं धान मिलों के बीच अनुबंध में हो रही देरी है। इस देरी के चलते किसान अपना धान कम पैसे में विचौलियों के माध्यम से बेचने को मजबूर हैं। पिछले रवि के सत्र में गेहूँ की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद होने से किसानों ने राहत की सास ली थी तथा उन्हें उपज का वाजिब मूल्य भी मिल गया था।
भारतीय किसान सभा के नेता लालचंद एडवोकेट कहते है कि सरकार ने गेहूँ की तरह धान को भी खरीदने का दावा किया था। लेकिन अब तक किसी क्रय केंद्र पर बोहनी न होने से किसानों में निराशा है। भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष विरेंद्र पाल ने कहा कि सरकार को जल्द क्रय केन्द्रों एवं मिलर्स के बीच अनुबंध कराकर धान खरीद कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि खरीद तत्काल आरंभ नहीं हुई तो किसान यूनियन आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
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क्षेत्र में धान की कटाई का काम पूरा हो चुका है तथा वर्तमान में किसान गेहूँ की बुआई करने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। गेहूँ की बुआई करने के लिए किसानों को गेहूँ के बीज, खाद, डीजल खरीदने के लिए नगद पैसे की जरूरत है। लेकिन धान की खरीद न होने से किसानों को उधार बीज खरीद कर बोना पड़ रहा है। धान खरीद में देरी के पीछे क्रय केन्द्रों एवं धान मिलों के बीच अनुबंध में हो रही देरी है। इस देरी के चलते किसान अपना धान कम पैसे में विचौलियों के माध्यम से बेचने को मजबूर हैं। पिछले रवि के सत्र में गेहूँ की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद होने से किसानों ने राहत की सास ली थी तथा उन्हें उपज का वाजिब मूल्य भी मिल गया था।
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भारतीय किसान सभा के नेता लालचंद एडवोकेट कहते है कि सरकार ने गेहूँ की तरह धान को भी खरीदने का दावा किया था। लेकिन अब तक किसी क्रय केंद्र पर बोहनी न होने से किसानों में निराशा है। भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष विरेंद्र पाल ने कहा कि सरकार को जल्द क्रय केन्द्रों एवं मिलर्स के बीच अनुबंध कराकर धान खरीद कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि खरीद तत्काल आरंभ नहीं हुई तो किसान यूनियन आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
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