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बंधुआ मजदूरी कर रहे तीन किशोर मुक्त
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बंधुआ मजदूरी कर रहे तीन किशोर मुक्त
बाल कल्याण समिति उन्हें परिवार को सौंपा
सचित्र 51
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौली। गुजरात में एक कंपनी में 11 महीने से बंधुआ मजदूरी कर रहे तीन किशोरों को मुक्त कराने के बाद सोमवार को बाल न्यायालय में पेश किया गया। जहां बाल न्यायाधीश इंद्रजीत शर्मा और दिनेश कुमार ने तीनों किशोरों का बयान दर्ज करने के बाद उन्हें उनके परिवार के लोगों को सौंप दिया। इस दौरान किशोरों का स्वास्थ्य की भी जांच कराई गई।
ढ़ोढ़नपुर चकिया निवासी चंद्रशेखर(14), प्रीतपुर गरला निवासी मिथुन(16) और अनिल(18) ने बताया कि विदेशी वनवासी और पिंटू वनवासी ने 11 माह पहले उन्हे 16 हजार रुपये रोजाना का वेतन दिलाने के नाम पर गुजरात के राजकोट ले गए। जहां एक साड़ी कारखाने में उनसे बगैर मजदूरी के कार्य कराया जाता रहा। सुबह छह बजे से लेकर रात 12 तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी कंपनी के लोगों द्वारा केवल भोजन दिया जाता था। इसका विरोध करने पर उनके साथ कई बार मारपीट भी की गई। इसी बीच परिवार के लोगों ने मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के लोगों से संपर्क किया गया। जिसके बाद संस्था ने गुजरात के अन्य संस्थाओं की मदद से तीनों किशोरों को मुक्त करा लिया।मामले की जांच पड़ताल करने के बाद बाल न्यायाधीश इंद्रजीत शर्मा और दिनेश कुमार ने तीनों किशोरों को उनके परिवार के लोगों को सौंप दिया।
बाल कल्याण समिति उन्हें परिवार को सौंपा
सचित्र 51
अमर उजाला ब्यूरो
चंदौली। गुजरात में एक कंपनी में 11 महीने से बंधुआ मजदूरी कर रहे तीन किशोरों को मुक्त कराने के बाद सोमवार को बाल न्यायालय में पेश किया गया। जहां बाल न्यायाधीश इंद्रजीत शर्मा और दिनेश कुमार ने तीनों किशोरों का बयान दर्ज करने के बाद उन्हें उनके परिवार के लोगों को सौंप दिया। इस दौरान किशोरों का स्वास्थ्य की भी जांच कराई गई।
ढ़ोढ़नपुर चकिया निवासी चंद्रशेखर(14), प्रीतपुर गरला निवासी मिथुन(16) और अनिल(18) ने बताया कि विदेशी वनवासी और पिंटू वनवासी ने 11 माह पहले उन्हे 16 हजार रुपये रोजाना का वेतन दिलाने के नाम पर गुजरात के राजकोट ले गए। जहां एक साड़ी कारखाने में उनसे बगैर मजदूरी के कार्य कराया जाता रहा। सुबह छह बजे से लेकर रात 12 तक कठिन परिश्रम करने के बाद भी कंपनी के लोगों द्वारा केवल भोजन दिया जाता था। इसका विरोध करने पर उनके साथ कई बार मारपीट भी की गई। इसी बीच परिवार के लोगों ने मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के लोगों से संपर्क किया गया। जिसके बाद संस्था ने गुजरात के अन्य संस्थाओं की मदद से तीनों किशोरों को मुक्त करा लिया।मामले की जांच पड़ताल करने के बाद बाल न्यायाधीश इंद्रजीत शर्मा और दिनेश कुमार ने तीनों किशोरों को उनके परिवार के लोगों को सौंप दिया।
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