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एक साल से गोदाम में पड़ा है 1300 क्विंटल ब्लैक राइस, नहीं मिल रहे खरीदार

Thu, 24 Feb 2022 12:25 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Feb 2022 12:25 AM IST
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1300 quintals of black rice lying in the godown
पीडीडीयू नगर/कंदवा। कमजोर मार्केटिंग और खरीदारों के रुचि नहीं लेने से 1300 क्विंटल काला चावल गोदाम में पड़ा है। इससे एक जनपद एक उत्पाद में शामिल काले चावल की खेती करने वाले किसानों के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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कृषि विभाग और पूरे सरकारी अमला का दावा है कि ब्लैक राइस की खेती से किसानों की आय दोगुनी नहीं बल्कि तीन गुना बढ़ी है पर किसानों का कहना है कि उनकी उपज से आय तो दूर लागत भी नहीं निकल पाई है। आलम यह है कि पिछले एक साल से नवीन मंडी के गोदाम में 1300 क्विंटल ब्लैक राइस रखा हुआ है पर उसके खरीदार नहीं मिल रहे। वहीं इस वर्ष भी जिन लोगों ने काले चावल की खेती की है। उसकी उपज उनके घर पर पड़ी हुई है।
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पीडीडीयू नगर। जनपद में प्रगतिशील किसानों में शुमार सिकठा गांव के किसान रतन सिंह का कहना है कि पहले दो वर्ष तक उन्होंने आधा एकड़ में खेती किया था। जब 85 रुपए किलो मूल्य मिला तो डेढ़ एकड़ में ब्लैक राइस की खेती किया था। लेकिन इस बार कोई खरीदार ही नहीं मिला।जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ा है।जब तक मार्केटिंग सही नहीं होगी तब तक ऐसे ही भटकना पड़ेगा। इन परेशानियों को देखते हुए मैंने इसकी खेती बन्द कर दी है।
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कंदवा। मचवा गांव के किसान अवनींद्र कुमार पांडेय ने करीब एक एकड़ में ब्लैक राइस की खेती किया था।लेकिन उनकी उपज का कोई खरीदार नहीं मिला। जिससे वे हताश हैं। उन्होंने बताया कि ब्लैक राइस की मार्केटिंग काफी कमजोर है। जिससे कोई खरीदार नहीं मिला। लाभ तो दूर इस बार तो लागत भी नहीं निकल पायी है। अगर खरीदार मिल जाते हैं तो अगले वर्ष फिर से खेती शुरू कर सकता हूं।
कंदवा। करीब एक एकड़ में ब्लैक राइस की खेती करने वाले इमिलिया गांव के किसान अजय कुमार सिंह का कहना है कि इसकी अभी तक ठीक तरीके से मार्केटिंग नहीं हो पायी है। इससे बाजार में ब्लैक राइस को न तो सही दाम मिल पा रहा है न ही खरीदार मिल पा रहे हैं। लेकिन कृषि विभाग सतत प्रयास करते हुए ब्लैक राइस को मशहूर करने में जुटा है।
कंदवा। करीब 15 बिस्वे में ब्लैक राइस की खेती करने वाले कंदवा गांव के किसान अच्युतानंद त्रिपाठी ने बताया कि ब्लैक राइस के उपज की अनुमानित लागत 150 से 200 रुपये आंकी गई थी। वर्ष 2019-20 में चंदौली काला चावल समिति के माध्यम से किसानों ने 8500 रुपये कुंतल के हिसाब से बेचा था। लेकिन 2020-21 और 2021-22 में कोई खरीदार नहीं मिला है। आय दोगुना होना तो दूर लागत भी नहीं निकल पायी है। जिससे किसानों का मनोबल टूट रहा है।
पहले 8500 अब 3500 प्रति क्विंटल पर भी नहीं खरीद रही कंपनी
पीडीडीयू नगर। जिले में 2018 में डीएम नवनीत चहल के पहल पर ब्लैक राइस की खेती शुरू हुई। जिला कृषि अधिकारी वसंत कुमार दूबे ने बताया कि 2019 में लगभग चार सौ हेक्टेयर में आठ सौ के करीब किसानों ने काले चावल की खेती की। उस समय 1400 क्विंटल धान की उपज हुई। उस समय सुखबीर एग्रो पंजाब ने 175 और शिव हिल कंपनी मुंबई ने 200 क्विंटल धान की खरीद 8500 रुपये की दर से की थी। बाकी चावल फुटकर में बेचा गया। वहीं 2020 में पांच सौ हेक्टेयर में एक हजार किसानों ने काले चावल की खेती की। जिसमें 1400 क्विंटल उपज हुई। इसमें 100-100 क्विंटल धान की खरीद नोएडा की कंपनियों ने, 25-25 क्विंटल सोनीपत की कंपनियों ने और 25 क्विंटल मिर्जापुर की एक कंपनी ने किया। बाकी धान गोदाम में पड़ा है। कंपनी से 3500 प्रति क्विंटल के दर से बात हुई पर कंपनी ने अभी तक उठान नहीं किया है। वहीं 2021 में भी 400 हेक्टेयर में खेती हुई है। जिसका धान आना है।संवाद
कन्दवा। ब्लैक राइस को औषधीय गुणों से भरपूर और शुगर फ्री चावल कहा जाता है। इस चावल में प्रोटीन और एंटी आक्सीडेन्ट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लेकिन इसमें फैट की मात्रा बेहद कम है, जिससे यह मधुमेह,कैंसर, हृदय संबंधी रोगों में फायदेमंद होता है। इसमें एंटीआक्सीडेंट, विटामिन ई, फ़ाइबर और प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, आर्थराइटिस, एलर्जी से जूझ रहे लोगों के लिए यह किसी दवा की तरह काम करता है। यह प्राकृतिक तौर पर ग्लूटेन-फ्री और प्रोटीन, आयरन, विटामिन ई, कैल्शियम, मैग्नीशियम, नेचुरल फाइबर आदि से भरपूर है, इसलिए वजन घटाने में मददगार होता है। इसे एक नेचुरल डिटॉक्सिफायर माना जाता है।संवाद
पीडीडीयू नगर। सन 2020 में काला चावल का निर्यात आस्ट्रेलिया जैसे देश में हुआ था। वहीं यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) ने आकांक्षात्मक जनपदों में नीति आयोग के विभिन्न पैरामीटर्स पर 2018 से 2020 तक विभिन आयामों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के चलते जनपद चंदौली को शीर्ष द्वितीय स्थान दिया। संवाद

काला चावल का अभी तक कोई खरीदार नहीं मिला है। जिससे किसानों की उपज नवीन मंडी परिषद के गोदाम में रखी गई है। इसकी बिक्री के लिए प्रयास किया जा रहा है।-वीरेंद्र सिंह, महामंत्री, काला चावल समिति
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