{"_id":"5a1873b84f1c1b3c3d8b9992","slug":"111511551928-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला हिंसा के विरूद्ध ग्राम्या चलायेगी अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला हिंसा के विरूद्ध ग्राम्या चलायेगी अभियान
Updated Sat, 25 Nov 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चकिया। यूनाइटेड नेशन ट्रस्ट फंड के सहयोग से राष्ट्रीय अभियान के तहत ग्राम्या संस्था महिला उत्पीड़न तथा जेंडर आधारित गैर बराबरी के विरुद्ध अभियान चलाएगी। उक्त विचार ग्राम्या संस्था की निदेशक बिंदू सिंह ने शुक्रवार को स्थानीय वन विश्राम गृह दिलकुशा में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए महिला संगठनों, सरकार के साथ ही पुरुषों की भी भागीदारी जरूरी है। सामाजिक जीवन में बदलाव आने से ही महिला स्वास्थ्य में सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में महिला नसबंदी का प्रतिशत 96 दशमलव सात था। जो वर्ष 2016 में बढ़कर 97 दशमलव 25 प्रतिशत हो गया। वही पुरुष नसबंदी का प्रतिशत 2014 में 3 दशमलव 29 था। जो वर्ष 2016 में घटकर 2 दशमलव 75 रह गया। इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि नसबंदी जैसे परिवार नियोजन के महत्वपूर्ण कार्य से पुरुष परहेज कर रहे हैं तथा नसबंदी के मामले में महिलाओं को आगे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे पुरुषों में अनेक भ्रांतियां है। जिन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होने कहा कि महिला हिंसा रोकने के लिए बने कानून का कोई आधार नहीं दिखाई देता तथा महिला हेल्पलाईन भी महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार कम करने में विफल है। उन्होंने कहा कि यूनाईटेड नेशन ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रीय अभियान के तहत महिलाओं के उत्थान के लिए प्रयास जारी है। इस दौरान नीतू सिंह, सुरेन्द्र, त्रिभुवन, रामविलास, मोहन, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सामाजिक सम्मान दिलाने के लिए महिला संगठनों, सरकार के साथ ही पुरुषों की भी भागीदारी जरूरी है। सामाजिक जीवन में बदलाव आने से ही महिला स्वास्थ्य में सुधार होगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में महिला नसबंदी का प्रतिशत 96 दशमलव सात था। जो वर्ष 2016 में बढ़कर 97 दशमलव 25 प्रतिशत हो गया। वही पुरुष नसबंदी का प्रतिशत 2014 में 3 दशमलव 29 था। जो वर्ष 2016 में घटकर 2 दशमलव 75 रह गया। इन आंकड़ों से साफ जाहिर है कि नसबंदी जैसे परिवार नियोजन के महत्वपूर्ण कार्य से पुरुष परहेज कर रहे हैं तथा नसबंदी के मामले में महिलाओं को आगे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके पीछे पुरुषों में अनेक भ्रांतियां है। जिन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होने कहा कि महिला हिंसा रोकने के लिए बने कानून का कोई आधार नहीं दिखाई देता तथा महिला हेल्पलाईन भी महिलाओं के विरुद्ध अत्याचार कम करने में विफल है। उन्होंने कहा कि यूनाईटेड नेशन ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रीय अभियान के तहत महिलाओं के उत्थान के लिए प्रयास जारी है। इस दौरान नीतू सिंह, सुरेन्द्र, त्रिभुवन, रामविलास, मोहन, मनोज कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन