वेस्ट यूपी में चुनौती, क्या मोदी कर पाएंगे करिश्मा?
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भारतीय जनता पार्टी की आज रविवार को मेरठ के शताब्दी नगर में होने जा रही सातवीं विजय शंखनाद रैली पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनैतिक हलचल पैदा करेगी। भाजपाइयों को अपने प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी से करिश्मे की उम्मीद है।
इस इलाके में कमल खिलाने के लिए किसी चमत्कार के बिना काम भी चलने वाला नहीं है। पिछले चुनाव में रालोद से गठबंधन के बावजूद भाजपा सिर्फ दो ही सीटें जीत पाई थी जबकि इस बार किला अकेले दम पर फतह करने की मुश्किल चुनौती है।
इसीलिए सभी की नजरें इस पर लगी हैं कि मोदी जीत का क्या मंत्र देते हैं?
1998 में चली थी भाजपा की लहर
भाजपा के पश्चिम प्रांत की इस रैली में लोकसभा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र संख्या एक (सहारनपुर ) से नंबर 14 (बुलंदशहर) तक कवर किए जाएंगे। इन लोकसभा क्षेत्रों में विधान सभा संख्या एक (बेहट) से संख्या 70 (खुर्जा) तक आते हैं।
इस इलाके में 1998 में भाजपा की ऐसी लहर चली थी कि रालोद मुखिया अजित सिंह अपने सबसे मजबूत गढ़ बागपत में खुद भी चुनाव हार गए थे लेकिन इसके बाद भाजपा वेस्ट यूपी में ऐसा करिश्मा दोबारा नहीं दोहरा पाई।
खास बात यह है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह इसी क्षेत्र की गाजियाबाद सीट से सांसद, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी मेरठ से और विधान मंडल के नेता हुकुम सिंह कैराना सीट से विधायक हैं।
वोट बैंक में सेंध लगाना आसान नहीं
अब पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी भाजपा में वापस आ चुके हैं। इसके बावजूद दलितों के आधार वोट बैंक पर बने बसपा के जातीय समीकरण बिगाड़ने और रालोद के जाट वोट बैंक में सेंध लगाना आसान नहीं है। मुस्लिम कार्ड चलकर सपा पूरा जोर लगा रही है। मुजफ्फरनगर दंगे से बदले माहौल ने भाजपा की उम्मीदें बढ़ाई जरूर हैं लेकिन संगठन को मजबूत करने से लेकर दमदार प्रत्याशी उतारने तक की चुनौती अभी भी बनी हुई है।
तब :
2009 के चुनाव में भाजपा का रालोद से गठबंधन था। इन 14 सीटों में से रालोद तीन और भाजपा दो पर विजयी रही थी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने सपा प्रमुख मुलायम सिंह से हाथ मिला लिया था।
अब:
2014 का यह चुनाव भाजपा को अकेले दम पर लड़ना है। सियासी समीकरणों के लिहाज से नेगेटिव फैक्टर यह है कि इस बार रालोद का गठबंधन कांग्रेस से है। पॉजिटिव यह है कि कल्याण सिंह भाजपा के साथ आ चुके हैं।
कौन कितने पानी में
(14 लोस, 70 विस क्षेत्र)
पार्टी---------सांसद----------------विधायक
बसपा----------05------------------22
सपा------------02------------------25
भाजपा---------02------------------13
रालोद---------03-------------------03
कांग्रेस---------01-------------------06
अन्य----------01-------------------01
अटल की लहर में छा गई थी भाजपा
1998 में राज तिलक की करो तैयारी, आ रहे हैं अटल बिहारी, नारे के साथ उतरी भाजपा ने पश्चिमी यूपी में कमाल कर दिया था। पुराने परिसीमन पर हुए उस चुनाव में सहारनपुर, मेरठ और मुरादाबाद मंडल क्षेत्र की 13 में से 10 सीटें जीती थीं भाजपा ने।
भाजपा के टिकट पर सहारनपुर से नकली सिंह, कैराना से वीरेन्द्र वर्मा, मुजफ्फरनगर से सोहनवीर सिंह, बागपत से सोमपाल शास्त्री, मेरठ से अमरपाल सिंह, हापुड़-गाजियाबाद से रमेश चंद तोमर, बुलंदशहर से छत्रपाल, खुर्जा से अशोक प्रधान, अमरोहा के चेतन चौहान, रामपुर से मुख्तार अब्बास नकली सांसद बने थे।