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कैट में सेंध, बढ़ा दिए 80 स्टूडेंट्स के परसेंटाइल
लखनऊ/आशीष त्रिवेदी
Updated Sat, 29 Jun 2013 01:40 PM IST
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) व अन्य प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए आयोजित किए गए कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) के रिजल्ट में छेड़छाड़ कर 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ा दिए गए। यह खेल कैट की वेबसाइट www.catiim.in को मेंटेन करने वाली लखनऊ की कंपनी वेब वेवर्स ने किया है।
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सभी 80 स्टूडेंट्स के दाखिले रद्द
मामला पकड़े जाने के बाद कैट का आयोजन करने वाले केरल के आईआईएम कोझिकोड ने इस कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। सभी 80 अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है। कैट में इस बार 2,14,068 अभ्यर्थी बैठे थे। परीक्षा लखनऊ समेत देशभर के 36 शहरों में हुई थी।
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इस सेंधमारी से सभी भौचक
कैट में पहली बार हुई इस सेंधमारी से सभी भौचक हैं। आईआईएम कोझिकोड के लिए पब्लिक रिलेशन का जिम्मा संभाल रही अधिकारी मेघना चंद्रा ने बताया कि लखनऊ की वेब वेवर्स कंपनी कैट की वेबसाइट का मेंटेनेंस करती है। आईआईएम कोझिकोड ने कैट के रिजल्ट के डाटा की जो सीडी वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए वेब वेवर्स को सौंपी, उसमें इसने टेम्परिंग कर 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ा दिए।
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सारी कारस्तानी वेब वेवर्स की
शिकायत पर आईआईएम कोझिकोड ने मास्टर डाटा सीडी से मिलान किया तो वेब वेवर्स की गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच में उजागर हुआ कि सारी कारस्तानी वेब वेवर्स की है, आईआईएम कोझिकोड इसके लिए कहीं से भी जिम्मेदार नहीं है। क्योंकि उसने प्रोमेटिक कंपनी से रिजल्ट का डाटा तैयार कराने के बाद वेब वेवर्स को वेबसाइट पर अपलोड करने के लिए दिया था।
अन्य छात्रों को उठाना पड़ा नुकसान
जिन 80 अभ्यर्थियों के परसेंटाइल बढ़ाए गए थे, उन्हें कई आईआईएम व बिजनेस स्कूलों में दाखिले मिल गए थे और इसके कारण अन्य छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा। मामला पकड़े जाने के बाद सभी दाखिले रद्द कर दिए गए हैं।
उनकी जगह जो अभ्यर्थी बेहतर परसेंटाइल लाए थे, उन्हें दाखिला दिया जा रहा है। वेब वेवर्स के खिलाफ आईआईएम कोझिकोड ने 15 जून को ही रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वजह नहीं है साफ
वेब वेवर्स का ऑफिस लखनऊ में है। मेघना चंद्रा ने बताया कि इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर इन अभ्यर्थियों को वेब वेवर्स ने किस नीयत से लाभ पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि वेब वेवर्स ने पूरा खेल धन के लालच में किया हो।
जांच के बाद होगा खुलासा
पूरा मामला तो पुलिस की पड़ताल और मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। इन सभी 80 अभ्यर्थियों के नाम और टेस्टिंग आईडी नंबर सभी 13 आईआईएम और उन निजी प्रबंधन संस्थानों को भेज दिए गए हैं, जो आईआईएम के स्कोर का प्रयोग करते हैं। ताकि आगे किस तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे।
क्या-क्या हुआ था...
मालूम हो कि आईआईएम में दाखिले के लिए पिछले साल 11 अक्टूबर से लेकर 6 नवंबर तक कैट के तहत कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट लिए गए थे। इसके बाद बीती 9 जनवरी 2013 को इसका परिणाम घोषित किया गया। इसके बाद सभी आईआईएम में कैट स्कोर के अनुसार जीडीपीआई के लिए अभ्यर्थियों को बुलाया गया और जून महीने में सभी आईआईएम में दाखिले की प्रक्रिया को पूरा किया जा रहा है।
तीन साल से वेबसाइट मेंटेन कर रही है वेब वेवर्स
कैट की वेबसाइट के मेंटेनेंस का काम वेब वेवर्स बीते तीन सालों से कर रही है। यह ठेका उसे तब मिला था, जब आईआईएम लखनऊ ने कैट आयोजित कराया था। इसके बाद आईआईएम कोलकाता ने भी जब कैट का आयोजन करवाया तो वेबसाइट को मेंटेन करने का पूरा काम इसी से करवाया।
हुआ रिजल्ट में टेम्परिंग का खेल
मेघना के मुताबिक दो बार गड़बड़ी न मिलने पर फिर इसी कंपनी से वेबसाइट के मेंटेनेंस का काम करवाने का निर्णय लिया गया। मगर, कंपनी ने रिजल्ट अपलोड करने में टेम्परिंग कर परसेंटाइल बढ़ाने का जो खेल किया, उससे सभी सकते में आ गए हैं। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही सबकुछ साफ होगा कि आखिर इस खेल के पीछे कौन है।