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यूपी: कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में फंसा पेंच
लखनऊ/ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2013 01:04 AM IST
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यूपी में अब इसे बदले सियासी समीकरण के साथ सरकार की मेहरबानी समझा जाए या फिर विजिलेंस विभाग की कार्यप्रणाली का दोष, नतीजा यही है कि पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सका है।
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जबकि विजिलेंस की खुली जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद राज्य सरकार द्वारा पूर्व मंत्री के खिलाफ एक पखवारा पहले ही राज्य सरकार ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू करने की अनुमति दे दी थी।
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फिर भी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर राज्य सरकार द्वारा मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने की अनुमति दिए जाने के बाद भी अभी तक सतर्कता अधिष्ठान इसे दर्ज नहीं कर सका है।
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सरकार की अनुमति मिलने के एक पखवारे से अधिक का समय बीत जाने के बाद सतर्कता अधिष्ठान के अधिकारियों ने इसके लिए तकनीकी कारणों को दोषी ठहराया है।
हालांकि, पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ मुकदमा दर्ज न होने के पीछे पिछले दिनों बदले सियासी समीकरणों को जिम्मेदार माना जा रहा है लेकिन औपचारिक तौर पर कोई इस बाबत टिप्पणी नहीं कर रहा है।
विजिलेंस के अफसरों के मानें तो पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया गया था, उसमें कुछ तकनीकी खामियां रह गई थीं। अगर खामी वाले ड्राफ्ट पर मुकदमा दर्ज कराया जाता तो इसका पूर्व मंत्री को लाभ मिलता।
इस मामले में पूर्व मंत्री के खिलाफ मुकदमा विभाग के झांसी सेक्टर द्वारा दर्ज कराया जाना था।
विजिलेंस के अफसरों की मानें तो तकनीकी खामी वाला ड्राफ्ट वापस मंगा लिया गया है और नए सिरे से बेहतर ड्राफ्ट तैयार करने को कहा गया है झांसी सेक्टर नया ड्राफ्ट तैयार कर विजिलेंस मुख्यालय भेजेगा, जिसका अधिकारियों द्वारा अध्ययन करा जाएगा और फिर विधिक परामर्श लिया जाएगा।
इस सारी कवायद को करने के बाद फाइनल ड्राफ्ट वापस झांसी सेक्टर भेजा जाएगा। जिसके बाद औपचारिक तौर पर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
गौरतलब है कि सतर्कता विभाग ने पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पर भारतीय दंड विधान व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धाराओं में राज्य सरकार से मुकदमा दर्ज विवेचना करने की अनुमति मांगी थी।
पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के खिलाफ भी लोकायुक्त द्वारा की गई जांच पर राज्य सरकार ने मामले की जांच विलिजेंस से कराए जाने के आदेश दिए थे।
जिसके बाद सरकार ने विजिलेंस को कुशवाहा के खिलाफ खुली जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने अपनी यह जांच पूरी कर रिपोर्ट 18 अप्रैल 2013 को राज्य सरकार को सौंप दी थी।
खुली जांच पूरी करने के बाद सौंपी गई विजिलेंस की रिपोर्ट पर अब सरकार ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने की अनुमति देते हुए कहा था कि पूर्व मंत्री के साथ ही अनियमितता बरतने वाले लोकसेवकों के खिलाफ भी यही कार्रवाई की जाए।