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कोर्ट रूम में युवक ने खुद को मारे ब्लेड
अमर उजाला/बुलंदशहर
Updated Fri, 17 Mar 2017 11:10 PM IST
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खुद को ब्लेड मारने वाला मंटूरी सिंह।
- फोटो : ब्यूरो
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एक युवक ने तहसीलदार की कोर्ट रूम में अपने सिर में ब्लेड से लगातार कई वार किये। खून से लथपथ युवक बेहोश होकर कोर्ट में ही गिर पड़ा। सूचना मिलते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एसडीएम की गाड़ी से उसे सीएचसी शिकारपुर ले जाया गया। जहां उसे भर्ती कराया गया है।
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क्षेत्र के गांव दरवेशपुर निवासी मंटूरी सिंह पुत्र श्यौदान सिंह का तहसीलदार की कोर्ट में जमीन संबंधी मामला विचाराधीन है। शुक्रवार को उस केस में तारीख लगी थी, लेकिन पश्चिमी उत्तरप्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच की स्थापना की मांग को लेकर वकीलों ने हड़ताल की थी। इसके चलते कोर्ट की वाद की सुनवाई न कर तारीख दी जा रही थी।
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हड़ताल के चलते दोपहर एक बजे तहसीलदार कोर्ट में नहीं थे और पेशकार जगदीश गौतम द्वारा वादकारियों को तारीख दी जा रही थी। मंटूरी भी अपने वकील के साथ कोर्ट परिसर में पहुंचा। बताया गया कि पेशकार द्वारा वकील को तारीख देने की बात पर वह बिगड़ गया।
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उसने अपने सिर में एक के बाद एक ब्लेड से कई वार किये। खून बहने से वह जमीन पर गिर पड़ा। सूचना पर उसकी पत्नी भी अस्पताल पहुंची। तहसीलदार सुशील कुमार ने बताया कि मंटूरी का जमीन से संबंधित एक वाद कोर्ट में विचाराधीन है।
उसमें 17 मार्च तारीख थी, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई नहीं हुई। उक्त वाद में सुनवाई हेतु 20 मार्च की तारीख दी गई थी। जिसके बाद उसने सिर में ब्लेड से वार किए हैं।
तारीख पर तारीख मिलने से हताश था मंटूरी
तहसीलदार की कोर्ट में वाद दायर करने के बाद उसे न्याय की उम्मीद जगी थी, लेकिन चार वर्षों से उसे मिली सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही थी। परिजनों का कहना है कि इसलिए मंटूरी मानसिक रूप से परेशान था। शुक्रवार को वकीलों की हड़ताल के चलते उसे फिर तारीख मिली। जिससे वह पूरी तरह टूट गया और उसने कोर्ट आत्महत्या करने का प्रयास किया।
उप्र प्रशासन के अधिकारियों की अदालतों का क्षेत्र में अफसरों की डयूटी के चलते वादकारियों को तारीख पर तारीख मिलती रहती है। क्षेत्र के गांव दरवेशपुर निवासी मन्टूरी का भी यही हाल हुआ। जानकारी के अनुसार मन्टूरी के चाचा तेजपाल जो लाबल्द थे ने वर्ष 2004 में अपने हिस्से की जमीन का बैनामा गांव के ही व्यक्ति को किया था।
उसका दाखिल खारिज भी हो चुका है। करीब तीन वर्ष पूर्व मन्टूरी ने चाचा का वारिस बताते हुये उक्त बैनामा पर ऐतराज लगाते हुये तहसीलदार कोर्ट में वाद योजित कर दिया। लेकिन कोर्ट से अभी तक फैसला नहीं सुनाया गया। बार बार तारीख पर आने से मन्टूरी मानसिक रूप से त्रस्त हो चुका था। आखिरकार शुक्रवार को एक बार फिर तारीख मिलने से वह तिलमिला गया।