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सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम
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भूड़ चौराहे से खुर्जा रोड पर सड़क किनारे लगे पौधा सूखे हुए।
- फोटो : BULANDSHAHR
सांसें हो रही हैं कम, आओ पेड़ लगाएं हम
बुलंदशहर। पर्यावरण बचाने को लिए यूं तो सालों से तमाम दावे किए जाते हैं। प्रदूषण कम करने को लेकर तरह-तरह की योजनाएं बनाई जाती है, लेकिन सरकार के नुमाइंदे द्वारा लापरवाही बरते जाने से इसकी जिम्मेदारी पर्यावरण प्रहरी निभा रहे हैं। जिनकी वजह से इस बार पर्यावरण दिवस पर हर जगह का नजारा बदला-बदला है। प्रदूषण कम होने की वजह से वातावरण स्वच्छ बना हुआ है तो वहीं, गर्मी का असर भी अन्य वर्षों की अपेक्षा कम हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पीपल, बरगद, रबर प्लांट, बांस, पाम के पौधे प्रदूषण कम करते हैं। साथ ही ये वातावरण से जहरीली गैसों को साफ करते हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों के निकलने वाले धुआं और क्लोरो-फ्लोरो कार्बन गैस से होता है।
पौधा भेंट कर लोगों के कर रहे हैं जागरूक
नगनगर के रेसकोर्स कालोनी निवासी प्रवीण कुमार पुत्र सुरेंद्र पाल सिंह तेवतिया पर्यावरण प्रेमी है। ग्रेजुएट की पढ़ाई करने के बाद खेतीबाड़ी में हाथ बंटाने के अलावा अंग्रेजी माध्यम के एक स्कूल का संचालन कर रहे हैं। प्रवीण कुमार ने बताया कि वृक्ष मानव जीवन का हिस्सा हैं। जिस प्रकार जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, ठीक उसी तरह वृक्ष द्वारा प्रदान की जाने वाली प्राणवायु के बिना जीवन के बारें में सोचा भी नहीं जा सकता। बताया कि वह समय-समय पर लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक करते रहते हैं और अब तक चार हजार से अधिक पौध रोपण कर चुके हैं। साथ ही पिछले तीन वर्षों से नर्सरी में पौधे तैयार कर 11 हजार से अधिक लोगों को निशुल्क वितरित कर चुके हैं।
सेवानिवृत्त कर्मी कर रहे लोगों को जागरूक
नगर निवासी 65 वर्षीय राजेंद्र पथिक वर्षों से पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। साथ ही सेवानिवृत्त होने के बाद वह पेंशन के खर्चे से जागरूकता पंपलेट छपवाकर लोगों को पौधरोपण करने की सलाह देते रहते हैं। इसके अलावा वह कूड़ा-कचरा न जलाने और धुआ रहित वाहन न चलाने की सलाह भी देते रहते हैं। बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो जनपद का एक्यूआई काफी समय तक 100 से कम रह सकता है। इसके लिए वायु प्रदूषण वाले वाहनों का बहिष्कार करना होगा और पौधरोपण कर उनका संरक्षण करना होगा।
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गंगा किनारे 32 गांवों में रोपित किए 11 हजार पौधे
जीवन धारा नमामि गंगे फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिओम शर्मा भी पर्यावरण के प्रहरी हैं। वह गंगा की स्वच्छता के साथ पानी बचाने का भी काम करते हैं। साथ ही पर्यावरण बचाने के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में पौध रोपण की शुरूआत की। इसके लिए उन्होंने जनपद में गंगा किनारे वाले 32 गांवों का चुनाव किया। अब तक वह इन गांवों में 11 हजार से अधिक पौधे रोपित कर चुके हैं। साथ ही ग्रामीणों को भी अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। पांच हजार पौधे रोपित करने पर वर्ष 2019 में उन्हें प्रयागराज के कुंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उनका कहना है कि अधिक से अधिक पौधे रोपित करने से ही पर्यावरण को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। उनके द्वारा किए जा रहे यह कार्य आगे भी जारी रहेंगे।
गंगा की स्वच्छता के साथ पौधरोपण किया शुरू
युवा जितेंद्र शर्मा वैसे तो आईटी क्षेत्र से संबंधित हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए गंगा की स्वच्छता और पौधरोपण का भी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैं अपने साथियों के साथ समय-समय पर गंगा की स्वच्छता के लिए कूड़ा-कचरा आदि निकालने का काम जारी रखे हुए हूं। साथ ही अब पौधरोपण का कार्य भी शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक 50 ही पौधे रोपित किए हैं, लेकिन मेरी ओर से पौधे लगाने के साथ गंगा की स्वच्छता के लिए किया जा रहा काम आगे भी जारी रहेगा। मेरा प्रयास है कि अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाऊं। इसके साथ समय-समय पर लोगों को भी पौधे रोपित करने के लिए प्रेरित करता रहता हूं।
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बुलंदशहर। पर्यावरण बचाने को लिए यूं तो सालों से तमाम दावे किए जाते हैं। प्रदूषण कम करने को लेकर तरह-तरह की योजनाएं बनाई जाती है, लेकिन सरकार के नुमाइंदे द्वारा लापरवाही बरते जाने से इसकी जिम्मेदारी पर्यावरण प्रहरी निभा रहे हैं। जिनकी वजह से इस बार पर्यावरण दिवस पर हर जगह का नजारा बदला-बदला है। प्रदूषण कम होने की वजह से वातावरण स्वच्छ बना हुआ है तो वहीं, गर्मी का असर भी अन्य वर्षों की अपेक्षा कम हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पीपल, बरगद, रबर प्लांट, बांस, पाम के पौधे प्रदूषण कम करते हैं। साथ ही ये वातावरण से जहरीली गैसों को साफ करते हैं। क्योंकि सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों के निकलने वाले धुआं और क्लोरो-फ्लोरो कार्बन गैस से होता है।
पौधा भेंट कर लोगों के कर रहे हैं जागरूक
नगनगर के रेसकोर्स कालोनी निवासी प्रवीण कुमार पुत्र सुरेंद्र पाल सिंह तेवतिया पर्यावरण प्रेमी है। ग्रेजुएट की पढ़ाई करने के बाद खेतीबाड़ी में हाथ बंटाने के अलावा अंग्रेजी माध्यम के एक स्कूल का संचालन कर रहे हैं। प्रवीण कुमार ने बताया कि वृक्ष मानव जीवन का हिस्सा हैं। जिस प्रकार जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, ठीक उसी तरह वृक्ष द्वारा प्रदान की जाने वाली प्राणवायु के बिना जीवन के बारें में सोचा भी नहीं जा सकता। बताया कि वह समय-समय पर लोगों को पौधरोपण के प्रति जागरूक करते रहते हैं और अब तक चार हजार से अधिक पौध रोपण कर चुके हैं। साथ ही पिछले तीन वर्षों से नर्सरी में पौधे तैयार कर 11 हजार से अधिक लोगों को निशुल्क वितरित कर चुके हैं।
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सेवानिवृत्त कर्मी कर रहे लोगों को जागरूक
नगर निवासी 65 वर्षीय राजेंद्र पथिक वर्षों से पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करते आ रहे हैं। साथ ही सेवानिवृत्त होने के बाद वह पेंशन के खर्चे से जागरूकता पंपलेट छपवाकर लोगों को पौधरोपण करने की सलाह देते रहते हैं। इसके अलावा वह कूड़ा-कचरा न जलाने और धुआ रहित वाहन न चलाने की सलाह भी देते रहते हैं। बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो जनपद का एक्यूआई काफी समय तक 100 से कम रह सकता है। इसके लिए वायु प्रदूषण वाले वाहनों का बहिष्कार करना होगा और पौधरोपण कर उनका संरक्षण करना होगा।
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गंगा किनारे 32 गांवों में रोपित किए 11 हजार पौधे
जीवन धारा नमामि गंगे फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरिओम शर्मा भी पर्यावरण के प्रहरी हैं। वह गंगा की स्वच्छता के साथ पानी बचाने का भी काम करते हैं। साथ ही पर्यावरण बचाने के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में पौध रोपण की शुरूआत की। इसके लिए उन्होंने जनपद में गंगा किनारे वाले 32 गांवों का चुनाव किया। अब तक वह इन गांवों में 11 हजार से अधिक पौधे रोपित कर चुके हैं। साथ ही ग्रामीणों को भी अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। पांच हजार पौधे रोपित करने पर वर्ष 2019 में उन्हें प्रयागराज के कुंभ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उनका कहना है कि अधिक से अधिक पौधे रोपित करने से ही पर्यावरण को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। उनके द्वारा किए जा रहे यह कार्य आगे भी जारी रहेंगे।
गंगा की स्वच्छता के साथ पौधरोपण किया शुरू
युवा जितेंद्र शर्मा वैसे तो आईटी क्षेत्र से संबंधित हैं, लेकिन इसके साथ उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए गंगा की स्वच्छता और पौधरोपण का भी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैं अपने साथियों के साथ समय-समय पर गंगा की स्वच्छता के लिए कूड़ा-कचरा आदि निकालने का काम जारी रखे हुए हूं। साथ ही अब पौधरोपण का कार्य भी शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक 50 ही पौधे रोपित किए हैं, लेकिन मेरी ओर से पौधे लगाने के साथ गंगा की स्वच्छता के लिए किया जा रहा काम आगे भी जारी रहेगा। मेरा प्रयास है कि अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण को बचाऊं। इसके साथ समय-समय पर लोगों को भी पौधे रोपित करने के लिए प्रेरित करता रहता हूं।