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Bulandshahar News: गांगरौल की महिलाएं टाई बनाकर बन रहीं आत्मनिर्भर
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चोला क्षेत्र के गांव गांगरौल में टाई तैयार करती महिलाएं। संवाद
बुलंदशहर/चोला। जिले में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं कोई न कोई काम कर रही हैं। चोला क्षेत्र का गांव गांगरौल ऐसा गांव है, जहां पर 500 से अधिक महिलाएं टाई बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इनके द्वारा तैयार की जाने वाली टाई की विदेश तक आपूर्ति होती हैं।
गांव गांगरौल में संचालित बलदाऊ जी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ऊषा के अनुसार शुरूआत में यह काम बहुत कम महिलाएं कर रहीं थी। लेकिन जब समूह का गठन हुआ तो यह काम इतना बढ़ गया कि अब आर्डर भी पूरे नहीं हो पाते हैं। इस काम से अब आसपास के गांवों की महिलाओं को भी जोड़ा जा रहा है।
ऊषा ने बताया कि टाई बनाने का आर्डर उन्हें दिल्ली से मिलता है। वहां से ही टाई का कपड़ा समेत अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाता है। एक टाई तैयार करने पर एक से दो रुपये मिलते हैं। एक दिन में एक महिला करीब 300 से ज्यादा टाई बना लेती हैं। इस तरह से वह रोजाना अच्छी कमाई कर लेती हैं।
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इससे होने वाली कमाई से जहां उनका परिवार चलता है तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि टाई बनाने का काम इतना बढ़ गया है कि महिलाओं के साथ उनके परिवार के पुरुष भी सहयोग करने लगे हैं। उनका प्रयास है कि इस कार्य से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर काम दिया जाए, ताकि वह भी आत्मनिर्भर बन सकें।
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गांव गांगरौल में संचालित बलदाऊ जी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ऊषा के अनुसार शुरूआत में यह काम बहुत कम महिलाएं कर रहीं थी। लेकिन जब समूह का गठन हुआ तो यह काम इतना बढ़ गया कि अब आर्डर भी पूरे नहीं हो पाते हैं। इस काम से अब आसपास के गांवों की महिलाओं को भी जोड़ा जा रहा है।
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ऊषा ने बताया कि टाई बनाने का आर्डर उन्हें दिल्ली से मिलता है। वहां से ही टाई का कपड़ा समेत अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाता है। एक टाई तैयार करने पर एक से दो रुपये मिलते हैं। एक दिन में एक महिला करीब 300 से ज्यादा टाई बना लेती हैं। इस तरह से वह रोजाना अच्छी कमाई कर लेती हैं।
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इससे होने वाली कमाई से जहां उनका परिवार चलता है तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि टाई बनाने का काम इतना बढ़ गया है कि महिलाओं के साथ उनके परिवार के पुरुष भी सहयोग करने लगे हैं। उनका प्रयास है कि इस कार्य से अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर काम दिया जाए, ताकि वह भी आत्मनिर्भर बन सकें।