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Bulandshahar News: अचार व कान्हा की पोशाक बनाकर महिलाएं संवार रहीं जीवन
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अनूपशहर क्षेत्र के गांव खुशहालगढ़ में अचार बनाने की तैयारी करती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिल
अनूपशहर। मन में अगर चाह हो तो जीवन संवारी जा सकता है। ऐसा ही कुछ गांव खुशहालगढ़ में संचालित नारी शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं कर रही हैं। अचार व कान्हा की पोशाक बनाकर महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर चल रही हैं। इतना ही नहीं उनके द्वारा गाय के गोबर से तैयार उपलों की मांग दिल्ली तक है। होली पर भी वह गुलाल बनाकर अच्छी कमाई करती हैं।
नारी शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूजा तेवतिया ने बताया कि समूह से जुड़ी 10 से अधिक महिलाओं ने पहले अचार बनाने की शुरूआत की। आम, मिर्च व अन्य तरह के अचार बनाकर जगह-जगह होने वाले कार्यक्रमों व मेलों में स्टाॅल लगाकर बिक्री की जाती है। हालांकि इससे अच्छी आमदनी होती है, लेकिन यह काम सीजनल होता है।
इस वजह से इसके साथ ही महिलाओं ने कान्हा की आकर्षक पोशाकें तैयार करनी शुरू की। बताया कि अब स्थिति यह है कि लोग खुद अपनी पसंद के कपड़े देकर कान्हा व राधा की पोशाक तैयार कराते हैं। प्रतिदिन दो-चार महिलाएं स्वयं की पसंद का कपड़ा, घोटा व दूसरे सामान देकर कान्हा की पोशाक तैयार कराती हैं।
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पूजा ने बताया कि इसके साथ सभी महिलाओं ने मिलकर गाय के गोबर के उपले बनाने भी शुरू किए, तो इसकी मांग दिल्ली तक होने लगी है। इन उपलों को खरीदने के लिए विक्रेता सीधा संपर्क करने लगे हैं। बताया कि इसी तरह महिलाएं होली के दिनों गुलाल भी तैयार करती हैं। उनके द्वारा तैयार हर्बल गुलाल की जिले में ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी सप्लाई होती है।
इससे सभी महिलाएं हर माह इतनी कमाई कर लेती हैं, जिससे वह अपने परिवार को चलाने में सहयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्य से समूह की महिलाओं के अलावा अब दूसरी महिलाओं को भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वह भी यह कार्य कर आत्मनिर्भर बन सकें।
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नारी शक्ति महिला स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष पूजा तेवतिया ने बताया कि समूह से जुड़ी 10 से अधिक महिलाओं ने पहले अचार बनाने की शुरूआत की। आम, मिर्च व अन्य तरह के अचार बनाकर जगह-जगह होने वाले कार्यक्रमों व मेलों में स्टाॅल लगाकर बिक्री की जाती है। हालांकि इससे अच्छी आमदनी होती है, लेकिन यह काम सीजनल होता है।
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इस वजह से इसके साथ ही महिलाओं ने कान्हा की आकर्षक पोशाकें तैयार करनी शुरू की। बताया कि अब स्थिति यह है कि लोग खुद अपनी पसंद के कपड़े देकर कान्हा व राधा की पोशाक तैयार कराते हैं। प्रतिदिन दो-चार महिलाएं स्वयं की पसंद का कपड़ा, घोटा व दूसरे सामान देकर कान्हा की पोशाक तैयार कराती हैं।
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पूजा ने बताया कि इसके साथ सभी महिलाओं ने मिलकर गाय के गोबर के उपले बनाने भी शुरू किए, तो इसकी मांग दिल्ली तक होने लगी है। इन उपलों को खरीदने के लिए विक्रेता सीधा संपर्क करने लगे हैं। बताया कि इसी तरह महिलाएं होली के दिनों गुलाल भी तैयार करती हैं। उनके द्वारा तैयार हर्बल गुलाल की जिले में ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी सप्लाई होती है।
इससे सभी महिलाएं हर माह इतनी कमाई कर लेती हैं, जिससे वह अपने परिवार को चलाने में सहयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि इस कार्य से समूह की महिलाओं के अलावा अब दूसरी महिलाओं को भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वह भी यह कार्य कर आत्मनिर्भर बन सकें।