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23 गांवों का पानी नहीं है पीने लायक
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Wed, 23 Dec 2015 11:48 PM IST
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जनपद में 23 गांवों का पानी पीने लायक नहीं है। जल निगम द्वारा प्रयोगशाला में कराई गई जांच में यह बात सामने आई है। अधिकांश ग्राम सभाओं में लिए गए पानी के सैंपल में आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक मिली है।
सिकंदराबाद के गांव जौली, धनौरा, वैर-बादशाहपुर, अटैरना, समेत करीब 23 गांवों में जल निगम ने पानी की सैंपलिंग कराई थी। नमूनों की प्रयोगशाला में जांच हुई तो 23 गांवों में पानी पीने लायक नहीं निकला।
पीने के पानी में आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई। पानी में सिल्ट की मात्रा भी भरपूर थी। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से फिलहाल इन गांवों में रहने वाले लाखों लोग दूषित पेयजल का सेवन करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों में प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा व गुबार है। वैर बादशाहपुर निवासी दिलशाद ने बताया कि गांव का पानी खराब हो चुका है। इसी कारण कई हैंडपंपो पर जल निगम लाल निशान लगा चुका है।
प्रशासन की ओर से स्वच्छ पेयजल का बंदोबस्त नहीं होने से ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दूषित पानी पीने से गांव के गई लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में भी हैं।
ये गांव भी हैं प्रभावित
सिकंदराबाद के गांव शेरपुर, सावली, हृदयपुर, जोखाबाद, तिलबेगमपुर में भी दूषित पानी पीने को लोग मजबूर हैं।
वर्ष 2007-08 में दूषित पेयजल से छुटकारा दिलाने के लिए पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था।
मगर गांवों में पानी की टंकिया शो पीस बनकर रह गई हैं।
23 गांवों का पानी दूषित पाया गया है। ग्रामीणों को स्वच्छ पानी मिले इसलिए इन गांवों में पाइप लाइन से पानी की सप्लाई की जाएगी। शासन को पानी की टंकी के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति और फंड मिलते की काम शुरू किया जाएगा। - एसके भारद्वाज, एक्सईएन, जल निगम
आयरन तत्व की अधिकता वाला पानी भारी होता है। ऐसा पानी लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचाता है। लगातार ऐसे पानी के सेवन से किडनी फेल हो सकती है और लीवर भी खराब हो सकता है। ऐसा पानी हड्डी और आंतों के लिए ठीक नहीं माना जाता है। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ बुलंदशहर
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सिकंदराबाद के गांव जौली, धनौरा, वैर-बादशाहपुर, अटैरना, समेत करीब 23 गांवों में जल निगम ने पानी की सैंपलिंग कराई थी। नमूनों की प्रयोगशाला में जांच हुई तो 23 गांवों में पानी पीने लायक नहीं निकला।
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पीने के पानी में आयरन की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई। पानी में सिल्ट की मात्रा भी भरपूर थी। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से फिलहाल इन गांवों में रहने वाले लाखों लोग दूषित पेयजल का सेवन करने को मजबूर हैं।
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ग्रामीणों में प्रशासन के अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा व गुबार है। वैर बादशाहपुर निवासी दिलशाद ने बताया कि गांव का पानी खराब हो चुका है। इसी कारण कई हैंडपंपो पर जल निगम लाल निशान लगा चुका है।
प्रशासन की ओर से स्वच्छ पेयजल का बंदोबस्त नहीं होने से ग्रामीण दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं। दूषित पानी पीने से गांव के गई लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में भी हैं।
ये गांव भी हैं प्रभावित
सिकंदराबाद के गांव शेरपुर, सावली, हृदयपुर, जोखाबाद, तिलबेगमपुर में भी दूषित पानी पीने को लोग मजबूर हैं।
वर्ष 2007-08 में दूषित पेयजल से छुटकारा दिलाने के लिए पानी की टंकियों का निर्माण कराया गया था।
मगर गांवों में पानी की टंकिया शो पीस बनकर रह गई हैं।
23 गांवों का पानी दूषित पाया गया है। ग्रामीणों को स्वच्छ पानी मिले इसलिए इन गांवों में पाइप लाइन से पानी की सप्लाई की जाएगी। शासन को पानी की टंकी के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति और फंड मिलते की काम शुरू किया जाएगा। - एसके भारद्वाज, एक्सईएन, जल निगम
आयरन तत्व की अधिकता वाला पानी भारी होता है। ऐसा पानी लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचाता है। लगातार ऐसे पानी के सेवन से किडनी फेल हो सकती है और लीवर भी खराब हो सकता है। ऐसा पानी हड्डी और आंतों के लिए ठीक नहीं माना जाता है। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ बुलंदशहर