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ट्रेन से धक्के देकर उतार रहे थे गार्ड, यूक्रेन के लोगों को दी जा रही थी प्राथमिकता
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ट्रेन से धक्के देकर उतार रहे थे गार्ड, यूक्रेन के लोगों को दी जा रही थी प्राथमिकता
बुलंदशहर/सिकंदराबाद/खानपुर। यूक्रेन में फंसे जिले के पांच और छात्र अपने घर लौट आए। अभी तक जिले के 30 छात्रों की घर वापसी हो चुकी है। जबकि कई और छात्रों के परिजन इंतजार में हैं। यूक्रेन से रविवार को लौटे छात्रों ने अपने संघर्ष की दास्तां बयां की। छात्रों ने बताया कि वहां हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गार्ड ट्रेन से धक्का देकर उतार रहे थे और यूक्रेनियों को प्राथमिकता दी जा रही थी। बम के धमाकों की आवाज डरा रही थी।
सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाडा निवासी छात्र अनुराग सैनी कीव में एबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की संभावना के चलते उसने घर वापसी के लिए 25 फरवरी का टिकट कराया था लेकिन 24 फरवरी को युद्ध छिड़ जाने के कारण उसकी फ्लाइट कैंसल हो गई। जिसके बाद वह कीव में फंस गया। हमलों के चलते उसे कई दिनों तक बंकर में रहना पड़ा। बंकर में क्षमता से अधिक लोगों के होने के कारण कई बार सांस लेने में भी परेशानी होने लगती थी। 28 फरवरी को वह कीव से निकले। चार किमी पैदल यात्रा कर वह रेलवे स्टेशन पहुंचे। रास्ते में मंजर बड़ा डरावना था। जगह-जगह लाशें पड़ी थीं। कई दोस्तों को चोट आने के कारण चलने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में वह एक-दूसरे का सहारे बने। रेलवे स्टेशन पहुंचने पर गार्ड उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दे रहे थे। गार्ड उन्हें धक्का देकर नीचे उतार देते थे। केवल यूक्रेनियन को ही ट्रेन में सवार होने दिया जा रहा था। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए स्टेशन पर तैनात यूक्रेन आर्मी हवाई फायरिंग भी कर रही थी। काफी संघर्ष करने के बाद वह ट्रेन में सवार हो सके। जिसके बाद वह स्लोवाकिया स्थित शेल्टर हाउस पहुंचे। शेल्टर हाउस में उन्हें सभी प्रकार की सुविधा मिली। शनिवार को घर वापसी के लिए वह फ्लाइट में बैठा।
ककोड़ क्षेत्र के गांव झाझर निवासी मनीष सोलंकी पुत्र श्योराज सोलंकी भी रूस से वापस घर लौट आया। मनीष सोलंकी रूस में एबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है। पिता श्योराज सिंह सोलंकी ने बताया कि बढ़ते खतरे को देखते हुए उन्होंने मनीष को रूस से वापस बुला लिया। बुलंदशहर के शनिदेव मंदिर रोड निवासी आराध्य पंडित ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर माइनस डिग्री तापमान में रहना मुश्किल हो गया था। 24 फरवरी की सुबह बम धमाके की आवाज सुनकर आंख खुली तो तेज उड़ते धुआं का गुबार देख सिहर उठा। वहां का माहौल बेहद खराब है और खाने-पीने के भी लाले पड़ गए थे। अब घर लौटने पर ही राहत मिली है। रविवार को विधायक देवेंद्र लोधी व जिला कोषाध्यक्ष अनिल गोयल ने घर पहुंचकर बच्चे का कुशलक्षेम जाना। विधानसभा संयोजक सुधीर अग्रवाल, देवेंद्र प्रधान, लोकेश लोधी भी मौजूद रहे।
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गोली और बम धमाकों की आवाज के बीच 18 किलोमीटर पैदल चल पकड़ी ट्रेन
नरौरा। अणुविहार कॉलोनी निवासी दो छात्रों की यूक्रेन से सकुशल वापसी के बाद छात्रा अदिति ठाकुर की ऑपरेशन गंगा के तहत वतन वापसी हो गई है। जिससे परिवार में खुशी का माहौल है। यूसी ठाकुर की पुत्री अदिति यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस सेकंड ईयर की छात्रा है। अदिति ने बताया कि 24 फरवरी को बमबारी शुरू होने के बाद उन्हें पांच दिन मेट्रो के बंकर में रहना पड़ा। गोली ओर बमों की आवाज के बीच छिपते हुए18 किमी पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंची। भारी भीड़ में यूक्रेन के लोगों को वरीयता मिल रही थी। टीचर ने मदद की। किसी तरह ट्रेन में 15 घंटे खड़े होकर यात्रा कर 2 मार्च को लवीव पहुंची। जहां से बस से पोलैंड बॉर्डर की ओर गईं। पांच किमी पैदल चलकर बॉर्डर पर पहुंचीं। जहाँ पांच घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद बॉर्डर पार किया। जहाँ उन्हें श्री श्री रविशंकर महाराज के आश्रम में दो दिन रहना पड़ा। जिसके बाद फ्लाइट मिलने पर वह दिल्ली और रविवार को सुबह नरौरा पहुंची।
रोमानिया और बेलारूस से मिल रहा कोर्स पूरा कराने का ऑफर
बुलंदशहर। अनूपशहर बस अड्डा क्षेत्र निवासी और यूक्रेन से वापस लौटे छात्र शान अली ने बताया कि यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों से रोमानिया और बेलारूस आदि देशों की मेडिकल यूनिवर्सिटी ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। ऐसा होने पर अब छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी। साथ ही डिग्री अधूरी रहने का भी डर नहीं रहेगा।
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बुलंदशहर/सिकंदराबाद/खानपुर। यूक्रेन में फंसे जिले के पांच और छात्र अपने घर लौट आए। अभी तक जिले के 30 छात्रों की घर वापसी हो चुकी है। जबकि कई और छात्रों के परिजन इंतजार में हैं। यूक्रेन से रविवार को लौटे छात्रों ने अपने संघर्ष की दास्तां बयां की। छात्रों ने बताया कि वहां हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गार्ड ट्रेन से धक्का देकर उतार रहे थे और यूक्रेनियों को प्राथमिकता दी जा रही थी। बम के धमाकों की आवाज डरा रही थी।
सिकंदराबाद के मोहल्ला भाटियावाडा निवासी छात्र अनुराग सैनी कीव में एबीबीएस चतुर्थ वर्ष का छात्र है। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की संभावना के चलते उसने घर वापसी के लिए 25 फरवरी का टिकट कराया था लेकिन 24 फरवरी को युद्ध छिड़ जाने के कारण उसकी फ्लाइट कैंसल हो गई। जिसके बाद वह कीव में फंस गया। हमलों के चलते उसे कई दिनों तक बंकर में रहना पड़ा। बंकर में क्षमता से अधिक लोगों के होने के कारण कई बार सांस लेने में भी परेशानी होने लगती थी। 28 फरवरी को वह कीव से निकले। चार किमी पैदल यात्रा कर वह रेलवे स्टेशन पहुंचे। रास्ते में मंजर बड़ा डरावना था। जगह-जगह लाशें पड़ी थीं। कई दोस्तों को चोट आने के कारण चलने में परेशानी हो रही थी। ऐसे में वह एक-दूसरे का सहारे बने। रेलवे स्टेशन पहुंचने पर गार्ड उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दे रहे थे। गार्ड उन्हें धक्का देकर नीचे उतार देते थे। केवल यूक्रेनियन को ही ट्रेन में सवार होने दिया जा रहा था। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए स्टेशन पर तैनात यूक्रेन आर्मी हवाई फायरिंग भी कर रही थी। काफी संघर्ष करने के बाद वह ट्रेन में सवार हो सके। जिसके बाद वह स्लोवाकिया स्थित शेल्टर हाउस पहुंचे। शेल्टर हाउस में उन्हें सभी प्रकार की सुविधा मिली। शनिवार को घर वापसी के लिए वह फ्लाइट में बैठा।
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ककोड़ क्षेत्र के गांव झाझर निवासी मनीष सोलंकी पुत्र श्योराज सोलंकी भी रूस से वापस घर लौट आया। मनीष सोलंकी रूस में एबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है। पिता श्योराज सिंह सोलंकी ने बताया कि बढ़ते खतरे को देखते हुए उन्होंने मनीष को रूस से वापस बुला लिया। बुलंदशहर के शनिदेव मंदिर रोड निवासी आराध्य पंडित ने बताया कि रोमानिया बॉर्डर पर माइनस डिग्री तापमान में रहना मुश्किल हो गया था। 24 फरवरी की सुबह बम धमाके की आवाज सुनकर आंख खुली तो तेज उड़ते धुआं का गुबार देख सिहर उठा। वहां का माहौल बेहद खराब है और खाने-पीने के भी लाले पड़ गए थे। अब घर लौटने पर ही राहत मिली है। रविवार को विधायक देवेंद्र लोधी व जिला कोषाध्यक्ष अनिल गोयल ने घर पहुंचकर बच्चे का कुशलक्षेम जाना। विधानसभा संयोजक सुधीर अग्रवाल, देवेंद्र प्रधान, लोकेश लोधी भी मौजूद रहे।
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गोली और बम धमाकों की आवाज के बीच 18 किलोमीटर पैदल चल पकड़ी ट्रेन
नरौरा। अणुविहार कॉलोनी निवासी दो छात्रों की यूक्रेन से सकुशल वापसी के बाद छात्रा अदिति ठाकुर की ऑपरेशन गंगा के तहत वतन वापसी हो गई है। जिससे परिवार में खुशी का माहौल है। यूसी ठाकुर की पुत्री अदिति यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस सेकंड ईयर की छात्रा है। अदिति ने बताया कि 24 फरवरी को बमबारी शुरू होने के बाद उन्हें पांच दिन मेट्रो के बंकर में रहना पड़ा। गोली ओर बमों की आवाज के बीच छिपते हुए18 किमी पैदल चलकर रेलवे स्टेशन पहुंची। भारी भीड़ में यूक्रेन के लोगों को वरीयता मिल रही थी। टीचर ने मदद की। किसी तरह ट्रेन में 15 घंटे खड़े होकर यात्रा कर 2 मार्च को लवीव पहुंची। जहां से बस से पोलैंड बॉर्डर की ओर गईं। पांच किमी पैदल चलकर बॉर्डर पर पहुंचीं। जहाँ पांच घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद बॉर्डर पार किया। जहाँ उन्हें श्री श्री रविशंकर महाराज के आश्रम में दो दिन रहना पड़ा। जिसके बाद फ्लाइट मिलने पर वह दिल्ली और रविवार को सुबह नरौरा पहुंची।
रोमानिया और बेलारूस से मिल रहा कोर्स पूरा कराने का ऑफर
बुलंदशहर। अनूपशहर बस अड्डा क्षेत्र निवासी और यूक्रेन से वापस लौटे छात्र शान अली ने बताया कि यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों से रोमानिया और बेलारूस आदि देशों की मेडिकल यूनिवर्सिटी ने संपर्क करना शुरू कर दिया है। ऐसा होने पर अब छात्र-छात्राओं को राहत मिलेगी। साथ ही डिग्री अधूरी रहने का भी डर नहीं रहेगा।