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सायरन बजते ही लगता था डर, दहशत में गुजरे चार दिन
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छात्र आदित्य सैनी के कीव से लौटने पर परिजनों ने मिठाई खिलाई।
- फोटो : KHURJA
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सायरन बजते ही लगता था डर, दहशत में गुजरे चार दिन
बुलंदशहर/खुर्जा। सायरन की आवाज आते ही ऐसा लगता था कि अभी बम गिरने वाला है। पिछले चार दिन दहशत में ही निकल गए, पता नहीं कब बम गिर जाए। यह कहना है खुर्जा के सुभाष रोड निवासी आदित्य सैनी का, जो बुधवार सुबह यूक्रेन से अपने घर सकुशल पहुंच गए। आदित्य 26 फरवरी को अपने फ्लैट से निकल गए थे।
आदित्य सैनी यूक्रेन की टर्नोपिल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टर्नोपिल यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने 12 मार्च तक छुट्टी घोषित कर दी। साथ ही भारतीय दूतावास की ओर से यूक्रेन जल्दी छोड़ने के निर्देश दिए गए। लेकिन यहां से निकलने में काफी परेशानी हुई। साथी छात्रों के साथ 26 फरवरी की सुबह बस में सवार होकर रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुए। इस बस में 30 छात्र थे, जिनमें पांच भारत और अन्य देशों से थे। उनके साथ चार छात्र गुजरात के थे।
पांच किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे रोमानिया बार्डर
आदित्य ने बताया कि बस किराए पर लेने के लिए प्रति छात्र करीब छह हजार रुपये देने पड़े। बस ने रोमानिया बॉर्डर से पांच किलोमीटर पहले छोड़ दिया था और वहां से फिर पैदल ही निकल पड़े। 27 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉडर में प्रवेश किया। रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट एक स्कूल में उन्हें रोका गया, जहां पर रोमानिया के लोगों ने उनके रुकने की व्यवस्था की। करीब 30 घंटे तक एयरपोर्ट के पास स्कूल में वहां रहना पड़ा। जिसके बाद भारतीय दूतावास की मदद से 28 फरवरी की दोपहर करीब 12 बजे के बाद उन्हें फ्लाइट मिली। 01 मार्च की रात 11:30 बजे के बाद दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे।
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परिजनों ने भारत सरकार का जताया आभार
आदित्य को देख परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खुशी में उनके आंखों से आंसू छलक पड़े। बुधवार सुबह आदित्य घर पहुंच गया। जिसके बाद परिजनों ने भारत सरकार का आभार जताते हुए धन्यवाद कहा। आदित्य के पिता राजकुमार सैनी ने बताया कि आगे की पढ़ाई भारत और यूक्रेन के संबंध पर निर्धारित करती है। यदि भारत सरकार इस बात पर भरोसा रखती है कि बच्चे वहां सुरक्षित हैं तो पढ़ाई के लिए भेजेंगे।
अभी तक यूक्रेन से चार छात्र आ चुके हैं वापस
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। यूक्रेन से अब तक जिले के चार छात्र वापस लौट आए हैं, जबकि दो छात्र युद्ध शुरू होने से पहले ही आ गए थे। अभी भी वहां पर कई छात्र फंसे हैं।
ऊंचागांव क्षेत्र के गांव दौलतपुर निवासी दीपक का पुत्र प्रदीप इस समय रोमानिया बॉर्डर पर फंसा है। पिता ने बताया कि कई बार बेटे से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे चिंता बढ़ जा रही है। गांव अहार निवासी आतिफ अली ने बंकर से निकल कर यूक्रेन से बॉर्डर पर जाते समय अपनी बहन को मेसेज कर जल्द वतन लौटने की संभावना जताई है। सिकंदराबाद निवासी छात्रों के परिजनों में भी जल्द ही उनके लाड़लों की वापसी की आस जग गई है। मोहल्ला वैद्यवाडा निवासी छात्र मुकुल गोयल, भाटियावाडा निवासी छात्र अनुराग सैनी, बस स्टैंड निवासी छात्र आकाश सैनी के परिजनों में लाडलों के जल्द ही परिवार के बीच लौटने की आस जग गई है। परिजनों का कहना है कि जल्द ही उनके जिगर के टुकड़े सकुशल उनके साथ होंगे। छात्र आकाश सैनी के पिता जयप्रकाश सैनी ने बताया कि आकाश रोमानिया में सेल्टर हाउस में पहुंच गया। छात्र अनुराग सैनी के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि अनुराग भी स्लोवाकिया में सेल्टर हाउस पहुंच गया है। मुकुल के परिजनों ने बताया कि वह भी स्लोवाकिया में सेल्टर हाउस पहुंच गया है। तीनों सकुशल हैं। अब उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। घर वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार है।
छात्रों की अभी नहीं हो पा रही वतन वापसी
नरौरा। यूक्रेन में फंसे नरौरा अणु विहार के तीनों छात्रों में से किसी की भी अभी तक वतन वापसी नहीं हो पाई है। जितेंद्र पांडेय ने बताया कि उनका बेटा तुषार पांडे अभी भी बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट शिविर में है। वह वहां से अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। यूसी ठाकुर ने बताया कि उनकी पुत्री अदिति यूक्रेन के लविव शहर पहुंची थी और वहां से हंगरी बॉर्डर के लिए बस से चली है। जबकि तीसरा छात्र विलय कुमार हंगरी पहुंच गया है।
पुत्र की सकुशल वापसी के लिए चल रहा धार्मिक अनुष्ठान
स्याना। नगर निवासी वीरेंद्र चौधरी का पुत्र यश यूक्रेन से बाहर निकलकर हंगरी बार्डर क्रास कर गया है। छात्र की अपने पिता से बुधवार सुबह 11 बजे जब वार्ता हुई तो उसने शीघ्र सकुशल वापसी की बात कही थी। उसके पिता वीरेन्द्र चौधरी, माता लाली चौधरी व छोटा भाई लाभ चौधरी खुश नजर आ रहे हैं। घर में सकुशल वापसी के लिए यज्ञ, पूजा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं।
यूक्रेन में हमले में मारे गए छात्र को दी श्रद्धांजलि
गुलावठी। यूक्रेन में रूस के हमले में मारे गए भारतीय छात्र नवीन शेखरप्पा को गुलावठी के शहीद स्मारक पर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा में आकाशवाणी कलाकार इन्द्रवीर सिंह तेवतिया ने कहा कि यूक्रेन के खारकीव में फंसे सभी छात्रों को निकालने के लिए भारत सरकार को रूस से बात करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि खारकीव तथा यूक्रेन के अन्य शहरों में फंसे छात्रों को सकुशल भारत वापस लाया जाए। इस मौके पर दो मिनट का मौन धारण कर एमबीबीएस छात्र नवीन शेखरप्प को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शोक सभा में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हरेंद्र सिंह तेवतिया, चांदनी राणा, शिवानी राणा, मधुर सिंह, संकेत गोयनका, आदित्य चौधरी, साहिल आदि मौजूद रहे।
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बुलंदशहर/खुर्जा। सायरन की आवाज आते ही ऐसा लगता था कि अभी बम गिरने वाला है। पिछले चार दिन दहशत में ही निकल गए, पता नहीं कब बम गिर जाए। यह कहना है खुर्जा के सुभाष रोड निवासी आदित्य सैनी का, जो बुधवार सुबह यूक्रेन से अपने घर सकुशल पहुंच गए। आदित्य 26 फरवरी को अपने फ्लैट से निकल गए थे।
आदित्य सैनी यूक्रेन की टर्नोपिल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि टर्नोपिल यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने 12 मार्च तक छुट्टी घोषित कर दी। साथ ही भारतीय दूतावास की ओर से यूक्रेन जल्दी छोड़ने के निर्देश दिए गए। लेकिन यहां से निकलने में काफी परेशानी हुई। साथी छात्रों के साथ 26 फरवरी की सुबह बस में सवार होकर रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुए। इस बस में 30 छात्र थे, जिनमें पांच भारत और अन्य देशों से थे। उनके साथ चार छात्र गुजरात के थे।
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पांच किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे रोमानिया बार्डर
आदित्य ने बताया कि बस किराए पर लेने के लिए प्रति छात्र करीब छह हजार रुपये देने पड़े। बस ने रोमानिया बॉर्डर से पांच किलोमीटर पहले छोड़ दिया था और वहां से फिर पैदल ही निकल पड़े। 27 फरवरी की सुबह रोमानिया बॉडर में प्रवेश किया। रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट एक स्कूल में उन्हें रोका गया, जहां पर रोमानिया के लोगों ने उनके रुकने की व्यवस्था की। करीब 30 घंटे तक एयरपोर्ट के पास स्कूल में वहां रहना पड़ा। जिसके बाद भारतीय दूतावास की मदद से 28 फरवरी की दोपहर करीब 12 बजे के बाद उन्हें फ्लाइट मिली। 01 मार्च की रात 11:30 बजे के बाद दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे।
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परिजनों ने भारत सरकार का जताया आभार
आदित्य को देख परिजनों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। खुशी में उनके आंखों से आंसू छलक पड़े। बुधवार सुबह आदित्य घर पहुंच गया। जिसके बाद परिजनों ने भारत सरकार का आभार जताते हुए धन्यवाद कहा। आदित्य के पिता राजकुमार सैनी ने बताया कि आगे की पढ़ाई भारत और यूक्रेन के संबंध पर निर्धारित करती है। यदि भारत सरकार इस बात पर भरोसा रखती है कि बच्चे वहां सुरक्षित हैं तो पढ़ाई के लिए भेजेंगे।
अभी तक यूक्रेन से चार छात्र आ चुके हैं वापस
बुलंदशहर/सिकंदराबाद। यूक्रेन से अब तक जिले के चार छात्र वापस लौट आए हैं, जबकि दो छात्र युद्ध शुरू होने से पहले ही आ गए थे। अभी भी वहां पर कई छात्र फंसे हैं।
ऊंचागांव क्षेत्र के गांव दौलतपुर निवासी दीपक का पुत्र प्रदीप इस समय रोमानिया बॉर्डर पर फंसा है। पिता ने बताया कि कई बार बेटे से फोन पर संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे चिंता बढ़ जा रही है। गांव अहार निवासी आतिफ अली ने बंकर से निकल कर यूक्रेन से बॉर्डर पर जाते समय अपनी बहन को मेसेज कर जल्द वतन लौटने की संभावना जताई है। सिकंदराबाद निवासी छात्रों के परिजनों में भी जल्द ही उनके लाड़लों की वापसी की आस जग गई है। मोहल्ला वैद्यवाडा निवासी छात्र मुकुल गोयल, भाटियावाडा निवासी छात्र अनुराग सैनी, बस स्टैंड निवासी छात्र आकाश सैनी के परिजनों में लाडलों के जल्द ही परिवार के बीच लौटने की आस जग गई है। परिजनों का कहना है कि जल्द ही उनके जिगर के टुकड़े सकुशल उनके साथ होंगे। छात्र आकाश सैनी के पिता जयप्रकाश सैनी ने बताया कि आकाश रोमानिया में सेल्टर हाउस में पहुंच गया। छात्र अनुराग सैनी के चाचा धनेश्वर सैनी ने बताया कि अनुराग भी स्लोवाकिया में सेल्टर हाउस पहुंच गया है। मुकुल के परिजनों ने बताया कि वह भी स्लोवाकिया में सेल्टर हाउस पहुंच गया है। तीनों सकुशल हैं। अब उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है। घर वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार है।
छात्रों की अभी नहीं हो पा रही वतन वापसी
नरौरा। यूक्रेन में फंसे नरौरा अणु विहार के तीनों छात्रों में से किसी की भी अभी तक वतन वापसी नहीं हो पाई है। जितेंद्र पांडेय ने बताया कि उनका बेटा तुषार पांडे अभी भी बुखारेस्ट एयरपोर्ट के निकट शिविर में है। वह वहां से अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहा है। यूसी ठाकुर ने बताया कि उनकी पुत्री अदिति यूक्रेन के लविव शहर पहुंची थी और वहां से हंगरी बॉर्डर के लिए बस से चली है। जबकि तीसरा छात्र विलय कुमार हंगरी पहुंच गया है।
पुत्र की सकुशल वापसी के लिए चल रहा धार्मिक अनुष्ठान
स्याना। नगर निवासी वीरेंद्र चौधरी का पुत्र यश यूक्रेन से बाहर निकलकर हंगरी बार्डर क्रास कर गया है। छात्र की अपने पिता से बुधवार सुबह 11 बजे जब वार्ता हुई तो उसने शीघ्र सकुशल वापसी की बात कही थी। उसके पिता वीरेन्द्र चौधरी, माता लाली चौधरी व छोटा भाई लाभ चौधरी खुश नजर आ रहे हैं। घर में सकुशल वापसी के लिए यज्ञ, पूजा व अन्य धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं।
यूक्रेन में हमले में मारे गए छात्र को दी श्रद्धांजलि
गुलावठी। यूक्रेन में रूस के हमले में मारे गए भारतीय छात्र नवीन शेखरप्पा को गुलावठी के शहीद स्मारक पर लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। शोक सभा में आकाशवाणी कलाकार इन्द्रवीर सिंह तेवतिया ने कहा कि यूक्रेन के खारकीव में फंसे सभी छात्रों को निकालने के लिए भारत सरकार को रूस से बात करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि खारकीव तथा यूक्रेन के अन्य शहरों में फंसे छात्रों को सकुशल भारत वापस लाया जाए। इस मौके पर दो मिनट का मौन धारण कर एमबीबीएस छात्र नवीन शेखरप्प को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शोक सभा में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हरेंद्र सिंह तेवतिया, चांदनी राणा, शिवानी राणा, मधुर सिंह, संकेत गोयनका, आदित्य चौधरी, साहिल आदि मौजूद रहे।