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जिला अस्पताल में रोज आ रहे दो हजार मरीज

Tue, 19 Apr 2016 11:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर Updated Tue, 19 Apr 2016 11:33 PM IST
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Two thousand patients a day are arriving in hospital
जिला अस्पताल में भर्ती डायरिया के मरीज। - फोटो : अमर उजाला
एकाएक बढ़ी गर्मी और लू के थपेड़ों ने जनपद में डायरिया के मरीज बढ़ा दिए हैं। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी समेत निजी अस्पतालों में उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। पिछले दो दिन से जिला अस्पताल में रोज 200 के आसपास डायरिया के मरीज पहुंच रहे हैं।
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इसके चलते इस अस्पताल में औसतन मरीजों की संख्या 800 से 1000 प्रतिदिन के हिसाब से रहने लगी है। लेकिन पिछले दो दिन से यह संख्या 2000 से ज्यादा हो गई है। अधिकांश मरीज उल्टी-दस्त के आ रहे हैं। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और निजी अस्पतालों में भी डायरिया के मरीजों में काफी वृद्धि हुई है।
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डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी में डायरिया होना ठंड के डायरिया से अधिक खतरनाक होता है। यदि तीन से चार दिन तक डायरिया में सुधार नहीं होता है, तो मरीज की जान तक पर बन  आती है। अचानक हुई तापमान में वृद्धि से बढ़े मरीजः जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. पंकज उपाध्याय का कहना है कि तापमान मे एकाएक वृद्धि हुई है।
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मौसम में आए परिवर्तन से डायरिया की शिकायत आ जाती है। डॉ. पंकज कहते हैं कि तापमान में दोपहर को वृद्धि और शाम को नमी से भी डायरिया हो जाता है।

डायरिया से बचाव के उपाय
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. हितेश कौशिक का कहना है कि डायरिया से बचने के लिए लोगों को अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए। तलीय पदार्थों से बचना चाहिए। दही का सेवन अधिक करना चाहिए। बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाना चाहिए। बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने दें। सत्तू का पानी व नींबू पानी का भी उपयोग करना चाहिए।

मच्छर रुला रहे, विभाग सो रहे
पिछले दो-तीन दिन में मौसम में आई नमी के कारण मच्छरों की संख्या भी बढ़ गई है। मच्छरों ने आम लोगों का जीना दुश्वार कर दिया गया है। मच्छर लोगों को रुला रहे हैं तो विभागीय अफसर सो रहे हैं। न तो गांवों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा और न ही नगर क्षेत्रों में पालिकाओं द्वारा फॉगिंग या कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।

मच्छरों के कारण बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। गौरतलब है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में एएनएम और प्रधान के संयुक्त खाते में गांव में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने के लिए 10-10 हजार रुपये आते हैं, लेकिन इस बजट का उपयोग निजी कामों में ही किया जाता है। इसके अलावा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों द्वारा भी फॉगिंग नहीं कराई जा रही है।


गर्मी बढ़ने के कारण डायरिया के रोगियों की संख्या बढ़ गई है। इससे बचने के लिए लोगों को अधिक मात्रा में ग्लूकोज और पानी का सेवन करना चाहिए। सभी एएनएम को कीटनाशक दवाओं के छिड़काव कराने के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. दीपक ओहरी,सीएमओ

 
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