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Bulandshahar News: दो भाई मां को कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा पर निकले, पहुंचे अनूपशहर
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अनूपशहर में पहुंचे चार धाम की यात्रा पर अपनी मां को लेकर निकले दो भाई। संवाद
अनूपशहर। बदायूं जिले के नूरपुर गांव के दो सगे भाई तेजपाल (19) और धीरज (24) अपनी 50 वर्षीय मां राजेश्वरी को कंधे पर बैठाकर तीर्थयात्रा पर निकले हैं। वे अपनी मां को लकड़ी की कुर्सी पर बैठाकर बांस के सहारे कंधे पर लेकर चल रहे हैं। यह यात्रा उनके गांव से दिल्ली स्थित कात्यायनी मंदिर तक 345 किलोमीटर लंबी है। उन्होंने 15 अक्टूबर को यात्रा शुरू की। यात्रा के छह नवंबर को समाप्त होने की उम्मीद है।
छोटे बेटे तेजपाल ने बताया कि दोनों भाई प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलते हैं। दिल्ली के कात्यायनी मंदिर पहुंचने के बाद सात नवंबर को बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के साथ एक और पैदल यात्रा में शामिल होंगे। यह यात्रा सात नवंबर को कात्यायनी मंदिर से शुरू होकर 16 नवंबर को वृंदावन में समाप्त होगी। जिसमें वे अपनी मां को कंधे पर बैठाकर ले जाएंगे।
यह पहली बार नहीं है जब दोनों भाइयों ने अपनी मां को तीर्थयात्रा कराई है। इससे पहले वे अपनी मां को कंधे पर बैठाकर चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री) और अयोध्या के राम मंदिर की यात्रा भी करा चुके हैं। वह यात्रा 18 फरवरी 2024 को शुरू हुई थी और सितंबर 2024 में साढ़े छह महीने बाद पूरी हुई थी।
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बताया कि उनके पिता का निधन 2013 में हो गया था। तेजपाल खेती करते हैं जबकि धीरज ई-रिक्शा चलाते हैं। तेजपाल ने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से वे समाज के युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि बुढ़ापे में अपने माता-पिता को अकेला न छोड़ें या वृद्धाश्रम में न भेजें। राजेश्वरी देवी ने कहा कि बच्चों को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
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छोटे बेटे तेजपाल ने बताया कि दोनों भाई प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलते हैं। दिल्ली के कात्यायनी मंदिर पहुंचने के बाद सात नवंबर को बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के साथ एक और पैदल यात्रा में शामिल होंगे। यह यात्रा सात नवंबर को कात्यायनी मंदिर से शुरू होकर 16 नवंबर को वृंदावन में समाप्त होगी। जिसमें वे अपनी मां को कंधे पर बैठाकर ले जाएंगे।
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यह पहली बार नहीं है जब दोनों भाइयों ने अपनी मां को तीर्थयात्रा कराई है। इससे पहले वे अपनी मां को कंधे पर बैठाकर चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री) और अयोध्या के राम मंदिर की यात्रा भी करा चुके हैं। वह यात्रा 18 फरवरी 2024 को शुरू हुई थी और सितंबर 2024 में साढ़े छह महीने बाद पूरी हुई थी।
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बताया कि उनके पिता का निधन 2013 में हो गया था। तेजपाल खेती करते हैं जबकि धीरज ई-रिक्शा चलाते हैं। तेजपाल ने बताया कि इस यात्रा के माध्यम से वे समाज के युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि बुढ़ापे में अपने माता-पिता को अकेला न छोड़ें या वृद्धाश्रम में न भेजें। राजेश्वरी देवी ने कहा कि बच्चों को अपने माता-पिता की सेवा करनी चाहिए और उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।