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अब अगले साल ही चालू हो पाएगा ट्रॉमा सेंटर
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sun, 29 Nov 2015 10:55 PM IST
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घायलों के इलाज के लिए बन रहे ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने पर फिर संकट के बादल छा गए हैं। निरीक्षण के लिए पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने निर्माण कार्य में कमियों के चलते बिल्डिंग के हैंडओवर से इंकार कर दिया है।
अब कार्यदायी संस्था द्वारा कमियों को दूर किए जाने के बाद ही बिल्डिंग को हैंडओवर किया जाएगा। ऐसे में अब अगले साल ही ट्रामा सेंटर शुरू हो पाएगा।
खुर्जा में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था को इसे जुलाई माह में ही स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करना था लेकिन स्वास्थ्य विभाग की हीलाहवाली के कारण अब तक बिल्डिंग को हैंडओवर नहीं किया गया।
अब जब चार महीने बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बिल्डिंग का निरीक्षण करने पहुंची तो निर्माण में तमाम कमियां सामने आईं। इसके चलते हैंडओवर का काम फिर अटक गया है।
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रविवार को निरीक्षण करने गए डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान और एसीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि
ट्रामा सेंटर के लिए बनी बिल्डिंग में दरवाजे, सिंक और शौचालय का काम अभी ठीक से नहीं हुआ है।
इसे कार्यदायी संस्था को पंद्रह दिन के भीतर ठीक करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद फिर निरीक्षण किया जाएगा। अगर काम ठीक होगा तो इसे इस साल के अंत तक हैंडओवर कर लिया जाएगा।
घटिया निर्माण बना रोड़ा
ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने में इसका घटिया निर्माण रोड़ा बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे क्लीन चिट देकर हैंडओवर करने को तैयार नहीं है।
दरअसल, ट्रॉमा सेंटर में टाइल्स, दरवाजे व अन्य कामों में जमकर अनियमितताएं बरती गई हैं। सूत्रों के मुताबिक घटिया निर्माण कार्य के कारण अफसर इसे हैंडओवर करने को तैयार नहीं है।
तो बच जाएंगी कई जिंदगियां
ट्रॉमा सेंटर के आसपास के क्षेत्र में हर दिन करीब 30 से 40 सड़क हादसे होते हैं। इनमें लगभग 30 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं।
जिला अस्पताल या आसपास में बेहतर इलाज की सुविधा न होने के कारण इन घायलों को मेरठ या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। तत्काल इलाज न मिलने के कारण इनमें से ज्यादातर घायल दम तोड़ देते हैं।
विभागीय अधिकारियों ने ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण करने वाले अफसरों ने इसके निर्माण कार्य पर कुछ आपत्ति लगाई हैं। निर्माणदायी संस्था को 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद फिर निरीक्षण कर बिल्डिंग को हैंडओवर कर लिया जाएगा। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ
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अब कार्यदायी संस्था द्वारा कमियों को दूर किए जाने के बाद ही बिल्डिंग को हैंडओवर किया जाएगा। ऐसे में अब अगले साल ही ट्रामा सेंटर शुरू हो पाएगा।
खुर्जा में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था को इसे जुलाई माह में ही स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर करना था लेकिन स्वास्थ्य विभाग की हीलाहवाली के कारण अब तक बिल्डिंग को हैंडओवर नहीं किया गया।
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अब जब चार महीने बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बिल्डिंग का निरीक्षण करने पहुंची तो निर्माण में तमाम कमियां सामने आईं। इसके चलते हैंडओवर का काम फिर अटक गया है।
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रविवार को निरीक्षण करने गए डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक तालियान और एसीएमओ डॉ. अवनींद्र कुमार ने बताया कि
ट्रामा सेंटर के लिए बनी बिल्डिंग में दरवाजे, सिंक और शौचालय का काम अभी ठीक से नहीं हुआ है।
इसे कार्यदायी संस्था को पंद्रह दिन के भीतर ठीक करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद फिर निरीक्षण किया जाएगा। अगर काम ठीक होगा तो इसे इस साल के अंत तक हैंडओवर कर लिया जाएगा।
घटिया निर्माण बना रोड़ा
ट्रॉमा सेंटर के शुरू होने में इसका घटिया निर्माण रोड़ा बन गया है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसे क्लीन चिट देकर हैंडओवर करने को तैयार नहीं है।
दरअसल, ट्रॉमा सेंटर में टाइल्स, दरवाजे व अन्य कामों में जमकर अनियमितताएं बरती गई हैं। सूत्रों के मुताबिक घटिया निर्माण कार्य के कारण अफसर इसे हैंडओवर करने को तैयार नहीं है।
तो बच जाएंगी कई जिंदगियां
ट्रॉमा सेंटर के आसपास के क्षेत्र में हर दिन करीब 30 से 40 सड़क हादसे होते हैं। इनमें लगभग 30 लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं।
जिला अस्पताल या आसपास में बेहतर इलाज की सुविधा न होने के कारण इन घायलों को मेरठ या दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। तत्काल इलाज न मिलने के कारण इनमें से ज्यादातर घायल दम तोड़ देते हैं।
विभागीय अधिकारियों ने ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण करने वाले अफसरों ने इसके निर्माण कार्य पर कुछ आपत्ति लगाई हैं। निर्माणदायी संस्था को 15 दिन का समय दिया गया है। इसके बाद फिर निरीक्षण कर बिल्डिंग को हैंडओवर कर लिया जाएगा। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ