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Bulandshahar News: खेतों को निगल रही गंगा, तैयार हो रही विवादों की जमीन

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:52 AM IST
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The Ganges is swallowing up farmlands; the stage is being set for disputes.
अहार क्षेत्र में गंगा में बहा सिद्धबाबा को जाने वाला सीसी मार्ग। संवाद
नरसेना/अहार। लगातार उफान पर चल रही गंगा बुलंदशहर जिले के खेतों को निगलती जा रही है। यहां के किसानों को अमरोहा के किसानों से जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ने की आशंका है। उनकी चिंता है कि जितना अधिक कटान होगा उनका उतना ही ज्यादा नुकसान होगा।
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वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार गंगा की धारा आठ साल बाद अपना स्थान बदल रही है। इसका रुख बुलंदशहर जिले की ओर अधिक है। इससे खादर क्षेत्र में तेज कटान हो रहा है। किसानों की सैकड़ों बीघा फसल और उपजाऊ जमीन गंगा में समा गई है। इसका दायरा हर रोज बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि हर साल थोड़ा-बहुत कटान होता है लेकिन इस बार स्थिति भयावह है। जलस्तर घटने के बाद बुलंदशहर और अमरोहा के किसान जमीन के मालिकाना हक को लेकर अपना-अपना दावा करेंगे, इससे झगड़े बढ़ सकते हैं।
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गंगा क्षेत्र के अधीन आने वाले 39 गांवों के किसानों की खादर में जमीन है। खादर के गांव फतेहपुर गुर्जर निवासी किसान चतर सिंह और भोले सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर जब घटता है तो बुलंदशहर और अमरोहा जनपद के किसानों के बीच खेतों को चिह्नित करते समय अक्सर झगड़े होते हैं। इस बार धारा बदलने से नए सिरे से जमीन चिह्नित करनी पड़ेगी। किसान हरि सिंह, महिपाल सिंह, धर्मपाल सिंह, छोटन सिंह, शरन सिंह ने बताया कि फतेहपुर सहित खादर के गांव अहार, औरंगाबाद तहारपुर की भूमि के किसानों की जमीन तेजी से कट रही है। बुलंदशहर जिले के किसानों का ज्यादा नुकसान हो रहा है।
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डीएफओ डॉ हरेंद्र सिंह का कहना है कि गंगा की धारा इस बार आठ साल बाद बदली है। पानी का रुख बुलंदशहर सीमा की ओर ओर अधिक होने से कटान तेजी से चल रहा है। गंगा का पानी कम होने के बाद ही पता चलेगा कि कितना कटान हुआ और कितने पेड़-पौधे गंगा में बह गए हैं।
नहीं घट रहा जलस्तर, अनूपशहर में सड़क पर पहुंचा पानी
अहार/अनूपशहर/नरसेना। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यह समस्या बिजनौर बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी से बन रही है। किसानों के खेत, फसल, वन विभाग की जमीन और पेड़-पौधे लगातार गंगा में समा रहे हैं। पानी खादर से खेतों की ओर बढ़ रहा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ रही है। अहार में सिद्ध बाबा घाट को जाने वाली सीसी रोड लगातार पानी में समा रही है। इससे पहले भी एक बाबा की समाधि समेत कई प्रमुख स्थान गंगा में समा चुके हैं। अनूपशहर क्षेत्र में घाटों को पार करके पानी सड़क पर आ गया है। सतर्कता बढ़ा दी गई है। एई ड्रेनेज अमित किशोर ने बताया कि जलस्तर में जल्द कमी आने की संभावना नहीं है। संवाद
डॉल्फिन की अठखेलियां और कछुओं का भी घर
हापुड़ की सीमा से प्रवेश कर नरौरा तक गुजरने वाली गंगा क्षेत्र को रामसर साइट के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र में गंगा में डॉल्फिन अठखेलियां करतीं दिख जाएंगी। घड़ियाल और कई दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का भी यह घर है। अहार क्षेत्र में वन विभाग का करीब 1500 एकड़ का क्षेत्र है। इस क्षेत्र में हर साल पौधे भी रोपित किए जाते हैं।

बैराज से 1.05 लाख क्यूसेक पानी की निकासी
नरौरा। गंगा बैराज पर गंगा के जलस्तर में लगातार उफान जारी है। बैराज से नदी की डाउन स्ट्रीम में 1,05,633 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है । सोमवार सायं 99,297 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही थी। सिंचाई विभाग के जल लेखा सहायक देवेश कुमार ने बताया कि बैराज से निकली एलजीसी नहर में 8099 क्यूसेक और पीएलजीसी नहर में 6677 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण तटीय क्षेत्र के गांवों में किसान फसल को लेकर चिंतित हैं।
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