{"_id":"588782f94f1c1bc37ecf4edf","slug":"the-battle-was-fought-for-the-farmers-were-imprisoned","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों के लिए लड़ी थी लड़ाई, गए थे जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों के लिए लड़ी थी लड़ाई, गए थे जेल
अमर उजाला/बुलंदशहर
Updated Tue, 24 Jan 2017 10:08 PM IST
विज्ञापन
हरी सिंह वाल्मीकि
- फोटो : ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ईमानदार छवि और सशक्त प्रशासक के रूप में कम करने वाले हरी सिंह बाल्मिकी मौजूदा नेताओं के लिए रोल मॉडल हैं। हरी सिंह किसानों के लिए सरकार से भिड़ जाते थे। एक बार किसानों के लिए आंदोलन में उन्होंने सैकड़ों लोगों के साथ गिरफ्तारी दी थी।
विज्ञापन
वहीं हरि सिंह की ईमानदारी का पता इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार में ऊर्जा मंत्रालय समेत दस मंत्रालयों का भार संभालने के बाद भी उनकी अंत्येष्टी के लिए उनके बेटों ने कर्ज लिया था। हरी सिंह वाल्मिकि का जन्म सरायधारी ऊपरकोट निवासी मुरलीधर के घर हुआ था। मुरलीधर जिला अस्पताल में वार्ड ब्वाय के रूप में काम करते थे।
विज्ञापन
हरीसिंह ने अपनी स्नातक की पढ़ाई मेरठ कॉलेज मेरठ से पूरी की थी। 1957 में खुर्जा लोकसभा सीट से प्रजा सोसलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद जेवर विधानसभा सीट से वर्ष 1967 में पीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े और विजयी हुए। वर्ष 1971 में कांग्रेस के टिकट पर खुर्जा लोकसभा सीटी से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर संसद पहुंचे।
विज्ञापन
एक बार फिर 1980 में जेवर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और भारी मतों से विजयी हुए। तब तक कांग्रेस पार्टी में हरी सिंह का कद बढ़ चुका था। तत्कालीन सरकार में ऊर्जा मंत्रालय समेत करीब 10 मंत्रालयों की जिम्मेदारी हरी सिंह के कंधों पर थी। ईमानदार छवि के हरी सिंह ने कभी ऐसा काम नहीं किया, जिससे उनकी छवि पर दाग लगे।
इसके बाद हरी सिंह को कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद बनाया। करीब तीन साल तक हरी सिंह एससी/एसटी आयोग के सदस्य रहे। हरी सिंह की छवि सशक्त प्रशासक और विकास पुरुष के रूप में थी। उन्होंने किसानों के लिए कई आंदोलन में हिस्सा लिया।
गाजियाबाद में हिंडन नदी पर उन्हें सैकड़ों लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया था। उनके पुत्र हर्षवर्धन ने बताया कि पिता हरी सिंह की वर्ष 2001 में उनकी मौत हुई तो उनके पास अंत्येष्टी कराने के लिए भी रुपये नहीं थे। इसलिए उधार रुपये लेकर उनकी अंत्येष्टी की थी।
दौलत नहीं, साफ छवि छोड़ गए हरी सिंह
हर्षवर्धन ने बताया कि हरी सिंह की मां का मिश्री देवी थीं। वह तीन भाई थे। सबसे बड़े कालीचरन और सबसे छोटे कंछी सिंह थे। भाइयों में दूसरे नंबर पर रहने वाले हरी सिंह की पांच बेटियां और दो पुत्र हैं। वह अपने पीछे कोई दौलत नहीं छोड़ गए। उनके पुत्र हर्षवर्धन राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं।
इस समय वह कांग्रेस की ओर से आगरा मंडी के प्रभारी हैं। जानकार बताते हैं कि कालाआम से जिलाधिकारी आवास की तरफ जाने वाले मार्ग का असली नाम हरी सिंह वाल्मिकी मार्ग है। डिवाइडर के पास उनके नाम का पत्थर लगा है।