{"_id":"65e9f0845c9021863403a61b","slug":"teachers-protested-against-online-attendance-bulandshahr-news-c-133-1-bul1002-112621-2024-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: शिक्षकों ने किया ऑनलाइन हाजिरी लगाने का विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: शिक्षकों ने किया ऑनलाइन हाजिरी लगाने का विरोध
विज्ञापन
बुलंदशहर। परिषदीय स्कूल अभिलेखों के डिजिटाइजेशन और ऑनलाइन उपस्थिति का शिक्षकों ने विरोध किया है। बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में इस पर रोक लगाने की मांग का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपा गया।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने कहा कि ऑनलाइन उपस्थिति और परिषदीय स्कूलों के डिजिटाइजेशन को लागू करने से पहले शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति सुविधा प्रदान की जाएं। जिलाध्यक्ष देवेंद्र शर्मा ने कहा कि राज्य कर्मचारियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा, ईएल की व्यवस्था और हाफ डे सीएल भी प्राप्त है। लेकिन विभागीय शिक्षकों को उत्पीड़न के नाम पर उत्तर प्रदेश कर्मचारी सेवक आचरण नियमावली लागू कर दी गई है। यह शिक्षकों के साथ बहुत बड़ा भेदभाव है।
जिला मंत्री अरुण राठी ने कहा कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा के महाविद्यालयों में अभिलेखों के रख-रखाव और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक लिपिक नियुक्त होता है, जबकि शिक्षकों को सभी कार्य स्वयं करने पड़ते हैं। परिषदीय स्कूलों में डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में एक लिपिक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति करनी चाहिए। जिला कोषाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि बेसिक के शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। महाविद्यालयों एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए पंचायत, निकाय, विधानसभा, लोकसभा सहित अन्य चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है। जबकि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों पर रोक लगाई गई है।
विज्ञापन
वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्भय नंद शर्मा ने कहा कि पहले परिषदीय विद्यालयों में उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके बाद ही ऑनलाइन उपस्थिति और डिजिटलाइजेशन व्यवस्था लागू की जाए। ज्ञापन देने वालों में विनोद शर्मा, मुलेंद्र प्रताप सिंह, अनीता त्यागी, पंकज गुप्ता, रविराज, राजेंद्र सिंह, आस मोहमद आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र यादव ने कहा कि ऑनलाइन उपस्थिति और परिषदीय स्कूलों के डिजिटाइजेशन को लागू करने से पहले शिक्षकों को राज्य कर्मचारियों की भांति सुविधा प्रदान की जाएं। जिलाध्यक्ष देवेंद्र शर्मा ने कहा कि राज्य कर्मचारियों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा, ईएल की व्यवस्था और हाफ डे सीएल भी प्राप्त है। लेकिन विभागीय शिक्षकों को उत्पीड़न के नाम पर उत्तर प्रदेश कर्मचारी सेवक आचरण नियमावली लागू कर दी गई है। यह शिक्षकों के साथ बहुत बड़ा भेदभाव है।
विज्ञापन
जिला मंत्री अरुण राठी ने कहा कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा के महाविद्यालयों में अभिलेखों के रख-रखाव और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक लिपिक नियुक्त होता है, जबकि शिक्षकों को सभी कार्य स्वयं करने पड़ते हैं। परिषदीय स्कूलों में डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले सरकार को प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में एक लिपिक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति करनी चाहिए। जिला कोषाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि बेसिक के शिक्षक शिक्षिकाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। महाविद्यालयों एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए पंचायत, निकाय, विधानसभा, लोकसभा सहित अन्य चुनाव लड़ने पर रोक नहीं है। जबकि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों पर रोक लगाई गई है।
विज्ञापन
वरिष्ठ उपाध्यक्ष निर्भय नंद शर्मा ने कहा कि पहले परिषदीय विद्यालयों में उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके बाद ही ऑनलाइन उपस्थिति और डिजिटलाइजेशन व्यवस्था लागू की जाए। ज्ञापन देने वालों में विनोद शर्मा, मुलेंद्र प्रताप सिंह, अनीता त्यागी, पंकज गुप्ता, रविराज, राजेंद्र सिंह, आस मोहमद आदि उपस्थित रहे।