{"_id":"6127cad28ebc3e7a0d5b791c","slug":"sugar-cane-frp-bulandshahr-news-gbd224790530","type":"story","status":"publish","title_hn":"गन्ना : एफआरपी में पांच रुपये की बढ़ोतरी नाकाफी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गन्ना : एफआरपी में पांच रुपये की बढ़ोतरी नाकाफी
विज्ञापन
गन्ना
- फोटो : ?????
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गन्ना : एफआरपी में पांच रुपये की बढ़ोतरी नाकाफी
बुलंदशहर। केंद्र सरकार की ओर से गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान और किसान नेताओं ने हैरानी जताते हुए इसे किसानों के साथ मजाक करार दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश में समर्थन मूल्य लागू है। यह राशि अपर्याप्त यानी छलावा साबित हो रही है। किसान और किसान नेताओं ने सरकार से 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ने की कीमत तय करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि डीजल, यूरिया समेत खेती-किसानी की आवश्यकता के सामानों की कीमत बढ़ रही है। उस अनुपात से उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 80 रुपये बढ़नी चाहिए। प्रदेश सरकार भी न्यूनतम 100 रुपये की बढ़ोतरी करे। एक ओर जहां किसानों की आय दोगुनी करने की बात की जा रही है, वहीं प्रदेश सरकार की ओर से पिछले चार साल से गन्ने का समर्थन मूल्य तक नहीं बढ़ाया है।
बोले किसान और किसान नेता
किसानों के साथ किया छलावा
गन्ने का पांच रुपये बढ़ाना मात्र किसानों के साथ छलावा है और इससे किसान को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। योगी सरकार ने भी चार साल में गन्ने की कीमत नहीं बढ़ाई है। इस बार 450 रुपये क्विंटल गन्ने की कीमत चाहिए।
- मांगेराम त्यागी, जनरल सेक्रेटरी एनसीआर, भारतीय किसान यूनियन।
पांच रुपये बढ़ना किसानों के साथ मजाक
केंद्र सरकार ने पांच रुपये गन्ने का बढ़ाकर किसान के साथ मजाक किया है। केंद्र सरकार के पास डीजल और खाद की कीमत बढ़ाने का अधिकार है। उसी अनुपात में जहां एफआरपी लागू है, वहां अब तक 80 रुपये बढ़ने चाहिए थे।
विज्ञापन
- धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति।
अब रामभरोसे ही हैं किसान
डीजल 90 रुपये प्रति लीटर हो गया। उर्वरक और कीटनाशक के दाम आसमान छू रहे हैं। खेती की लागत डेढ़ गुना बढ़ गई है और किसान को अपनी फसल का लागत मूल्य नहीं मिल रहा। अब तो किसान रामभरोसे ही है।
- पवन तेवतिया, भारतीय किसान यूनियन अंबावता
किसानों को किया जा रहा गुमराह
किसानों को गुमराह किया जा रहा है। कई सालों से लगातार पांच से 10 रुपये तक की बढ़ोतरी हो रही है। यह बढ़ोतरी लागत के अनुसार बढ़नी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इससे प्रदेश के किसानों को लाभ नहीं मिलेगा।
- अनुज कुमार रावत, जिला अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान संगठन।
विज्ञापन
बुलंदशहर। केंद्र सरकार की ओर से गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर किसान और किसान नेताओं ने हैरानी जताते हुए इसे किसानों के साथ मजाक करार दिया है। उनका कहना है कि प्रदेश में समर्थन मूल्य लागू है। यह राशि अपर्याप्त यानी छलावा साबित हो रही है। किसान और किसान नेताओं ने सरकार से 450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ने की कीमत तय करने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि डीजल, यूरिया समेत खेती-किसानी की आवश्यकता के सामानों की कीमत बढ़ रही है। उस अनुपात से उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 80 रुपये बढ़नी चाहिए। प्रदेश सरकार भी न्यूनतम 100 रुपये की बढ़ोतरी करे। एक ओर जहां किसानों की आय दोगुनी करने की बात की जा रही है, वहीं प्रदेश सरकार की ओर से पिछले चार साल से गन्ने का समर्थन मूल्य तक नहीं बढ़ाया है।
बोले किसान और किसान नेता
किसानों के साथ किया छलावा
गन्ने का पांच रुपये बढ़ाना मात्र किसानों के साथ छलावा है और इससे किसान को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। योगी सरकार ने भी चार साल में गन्ने की कीमत नहीं बढ़ाई है। इस बार 450 रुपये क्विंटल गन्ने की कीमत चाहिए।
विज्ञापन
- मांगेराम त्यागी, जनरल सेक्रेटरी एनसीआर, भारतीय किसान यूनियन।
पांच रुपये बढ़ना किसानों के साथ मजाक
केंद्र सरकार ने पांच रुपये गन्ने का बढ़ाकर किसान के साथ मजाक किया है। केंद्र सरकार के पास डीजल और खाद की कीमत बढ़ाने का अधिकार है। उसी अनुपात में जहां एफआरपी लागू है, वहां अब तक 80 रुपये बढ़ने चाहिए थे।
विज्ञापन
- धर्मेंद्र सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन महाशक्ति।
अब रामभरोसे ही हैं किसान
डीजल 90 रुपये प्रति लीटर हो गया। उर्वरक और कीटनाशक के दाम आसमान छू रहे हैं। खेती की लागत डेढ़ गुना बढ़ गई है और किसान को अपनी फसल का लागत मूल्य नहीं मिल रहा। अब तो किसान रामभरोसे ही है।
- पवन तेवतिया, भारतीय किसान यूनियन अंबावता
किसानों को किया जा रहा गुमराह
किसानों को गुमराह किया जा रहा है। कई सालों से लगातार पांच से 10 रुपये तक की बढ़ोतरी हो रही है। यह बढ़ोतरी लागत के अनुसार बढ़नी चाहिए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इससे प्रदेश के किसानों को लाभ नहीं मिलेगा।
- अनुज कुमार रावत, जिला अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान संगठन।