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स्मॉग से घुटन और आंखों में जलन

Sat, 05 Nov 2016 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर Updated Sat, 05 Nov 2016 11:50 PM IST
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Suffocated by smog and eye irritation
स्मॉग के चलते सिकंदराबाद में दिन में भी लाइट जलाकर जाते वाहन। - फोटो : ब्यूरो

शनिवार को जिले को स्मॉग की सफेद चादर ने अपने आगोश में ले लिया। वातावरण में धूल के कण इतने अधिक थे कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत के साथ आंखों में जलन महसूस हुई। दिन में दृश्यता इतनी कम हो गई कि वाहन चालकों दिन में लाइन जलानी पड़ी। हाईवे समेत कई मार्गों पर वाहन धीरे-धीरे चले, जिससे जाम लग गया।

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वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर माह के बाद बारिश नहीं हुई। दिवाली पर पटाखे जलाए गए। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उप्र में धान की पुआल को जलाया गया। इससे निकलने वाला धुआं बना और हवा में धूल भी मिल गई। धुआं-धूल के कण आसमान में पहुंचे और हवा का दबाव कम होने के कारण कणों ने स्मॉग का रूप धारण कर लिया। 
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स्मॉग से सांस और अस्थमा के मरीजों  को ही नहीं बल्कि आम और स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। आंखों में जलन महसूस हुई और नाक में खुजलाहट जैसी स्थिति बन गई।
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लगातार घटेगा तापमान
आसमान में स्मॉग के चलते मौसम में बदलाव के भी आसार बन गए हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 31 और न्यूनतम 17 डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि रविवार को अधिकतम तापमान कम होकर 31 और न्यूनतम 15 डिग्री सेल्सियस व सोमवार  को अधिकतम 29 और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचने की संभावना है।

इससे लगातार तापमान कम होने और ठंड बढ़ने की  संभावना भी बन गई है। उत्तर भारत में कहीं भी अगर कम दबाव का छेत्र बना तो तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

तेज हवा और बारिश से ही मिलेगी राहत
वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि आसमान में स्मॉग से जल्द राहत नहीं मिलने के आसार बन रहे हैं। इससे राहत तेज हवा चलने पर ही मिल सकती है। इससे राहत पाने को बारिश की भी जरूरत है। मगर, अभी बारिश के   आसार भी दिखाई नहीं दे रहे। तेज हवा की इस समय जरूरत है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो स्मॉग का कई दिन तक सामना करना पड़ेगा।


मास्क और चश्मा का करें प्रयोग
सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी का कहना है कि स्मॉग से सांस और अस्थमा के मरीजों को बचना है तो उन्हें मास्क पहनना चाहिए। आंखों से स्मॉग से बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग करें। चश्मा का प्रयोग दुपहिया वाहन चलाते समय जरूरी है। त्वचा को बचाने के लिए शरीर के साथ मुंह, हाथ और पांव को ढकना जरूरी है। बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है।



 

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