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Bulandshahar News: बोले श्रीकृष्ण, सुदामा तूने आने में देर क्यों कर दी...
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शास्त्री नगर में चल रही श्री राम कथा सुनते भक्त। संवाद
बुलंदशहर। गंग नहर स्थित गुरु कार्ष्णि आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा बुधवार को भी जारी रही। कथा व्यास विश्व चैतन्य महाराज ने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा कि जब सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने पहुंचे तो कहा कि सुदामा तूने आने में देर क्यों कर दी। भक्त भी कथा सुनकर भावविभोर हो गए।
विश्व चैतन्य महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन में भगवत प्रेम में जितना हो सके लगा रहने चहिए। क्योंकि भगवत नाम ही मानव का पालन हार है। जितना हो सके सत्संग और संतों की बीच बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान के अनन्य भक्त होने साथ ही मित्र भी थे। जब सुदामा गरीबी में अधिक परेशान थे। तब उनकी पत्नी ने उनसे अपने मित्र कृष्ण के पास जाने को कहा पहले तो बार-बार मना करते रहे लेकिन बाद जाने को तैयार हुए और मथुरा पहुंच गए। वहां जब महल में पहुंचे तो अंदर जाने के लिए समाचार भिजवा गया। जब कृष्ण को पता चला के मेरा मित्र सुदामा आए हैं तो वह वह नंगे पैर ही बाहर दौड़े चले आए।
उस दौरान श्रीकृष्ण ने कहा कि सुदामा तूने आने में देर क्यों कर दी। क्या तुझे अपने मित्र पर भरोसा नहीं था। इसके बाद सुदामा का खूब आदर सत्कार किया और उनके कष्टों को दूर किया। साथ ही सुदामा के जीवन को ही बदल दिया। कथा में रामकिशोर शर्मा, बलदेव बाधवा, गोपाल गौतम, रवि बाबू, कीमती लाल, प्रदीप गोयल, मधु बाधवा और बीना समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।
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विश्व चैतन्य महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन में भगवत प्रेम में जितना हो सके लगा रहने चहिए। क्योंकि भगवत नाम ही मानव का पालन हार है। जितना हो सके सत्संग और संतों की बीच बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुदामा भगवान के अनन्य भक्त होने साथ ही मित्र भी थे। जब सुदामा गरीबी में अधिक परेशान थे। तब उनकी पत्नी ने उनसे अपने मित्र कृष्ण के पास जाने को कहा पहले तो बार-बार मना करते रहे लेकिन बाद जाने को तैयार हुए और मथुरा पहुंच गए। वहां जब महल में पहुंचे तो अंदर जाने के लिए समाचार भिजवा गया। जब कृष्ण को पता चला के मेरा मित्र सुदामा आए हैं तो वह वह नंगे पैर ही बाहर दौड़े चले आए।
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उस दौरान श्रीकृष्ण ने कहा कि सुदामा तूने आने में देर क्यों कर दी। क्या तुझे अपने मित्र पर भरोसा नहीं था। इसके बाद सुदामा का खूब आदर सत्कार किया और उनके कष्टों को दूर किया। साथ ही सुदामा के जीवन को ही बदल दिया। कथा में रामकिशोर शर्मा, बलदेव बाधवा, गोपाल गौतम, रवि बाबू, कीमती लाल, प्रदीप गोयल, मधु बाधवा और बीना समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।
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