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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Secunderabad has the highest number of missing voters at 63,000, while Sadar has the lowest

Bulandshahar News: सिकंदराबाद में सर्वाधिक 63 हजार मतदाता लापता, सदर में सबसे कम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 14 Dec 2025 10:34 PM IST
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बुलंदशहर। मतदाता सूची को शत-प्रतिशत त्रुटिहीन बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बड़ी चुनौती सामने आई है। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर करीब 26 लाख 65 हजार मतदाता ऐसे मिले हैं, जो अनट्रेस्ड या मार्क अनकलेक्टेबल की श्रेणी में हैं। ये वो मतदाता हैं जिनका सत्यापन उनके दर्ज पते पर नहीं हो पाया है। सर्वाधिक 63 हजार अनट्रेस्ड मतदाता अकेले सिकंदराबाद विधानसभा क्षेत्र में मिले हैं, जबकि सदर विधानसभा में सबसे कम करीब 35,000 हैं।
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इस समस्या से निपटने के लिए अब प्रशासन ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों की मदद लेना शुरू कर दिया है, जिससे कि एक भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न छूटे। जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है। अब तक बीएलओ द्वारा 26.63 लाख से अधिक गणना प्रपत्र घर-घर जाकर वितरित किए जा चुके हैं। सत्यापन के दौरान सामने आया कि विधानसभावार बड़ी संख्या में मतदाता अपने दर्ज पते पर अनुपलब्ध हैं। जिले में कुल करीब 2.65 लाख मतदाता ऐसे हैं, जिनका सत्यापन नहीं हो सका है। इन मतदाताओं को मुख्य रूप से अनट्रेस्ड, शिफ्टेड , मृतक या दो जगह वोट जैसी श्रेणियों में रखा गया है।
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विधानसभावार अनट्रेस्ड मतदाताओं की स्थिति:
विधानसभा क्षेत्र मतदाताओं की कुल संख्या अनट्रेस्ड मतदाता (करीब)

सिकंदराबाद 4,02,000 63,000



अनूपशहर 3,83,059 61,854

शिकारपुर 3,40,140 49,000



स्याना 3,88,214 42,858

सदर 3,98,000 35,000



डिबाई 3,54,416 57,000

खुर्जा 2,53,852 43,000



शहरी क्षेत्रों से पलायन मुख्य वजह

उपजिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम वित्त एवं राजस्व अभिषेक सिंह ने बताया कि अनट्रेस्ड मतदाताओं की बड़ी संख्या शहरी क्षेत्रों से संबंधित है। रोज़गार या अन्य कारणों से लोगों का एक जगह से दूसरी जगह पलायन करना इस परेशानी की मुख्य वजह है। अधिकांश मतदाता किराएदार होते हैं, जो पता बदलने के बाद इसकी जानकारी नहीं देते हैं, जिससे बीएलओ को उन्हें ढूंढने में कठिनाई हो रही है। इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का सत्यापन न हो पाने के कारण अब राजनीतिक पार्टियों की मदद ली जा रही है।
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