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छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़, खुली वैन में ढो रहे बच्चे
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छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़, खुली वैन में ढो रहे बच्चे
बुलंदशहर। जिले में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने गाजियाबाद की घटना से भी सबक नहीं लिया है। स्कूलों के वाहन नियमों को दरकिनार को बच्चों को खुली वैन में ढो रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 114 स्कूली वाहनों की फिटनेस नहीं है। इन वाहनों के संचालकों को विभाग ने केवल नोटिस भेजकर खानापूर्ति की है। किसी के खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं की है।
गाजियाबाद की घटना के बाद सात स्कूली वाहनों को सीज किया गया है। हालांकि एक अनुमान के मुताबिक 1200 से अधिक ऐसे स्कूली वाहन संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो फिटनेस है और न ही परमिट। जिले में 400 से अधिक सीबीएसई, एडेड एवं सेल्फ फाइनेंस स्कूल हैं। इनमें करीब 2000 से अधिक वाहन संचालित होते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार केवल 850 वाहन ही पंजीकृत हैं।
घटना के बाद भी लापरवाह स्कूल
गाजियाबाद में लापरवाही से छात्र की मौत के बाद भी जिले के स्कूल सतर्क नहीं हुए। शुक्रवार को पड़ताल में सामने आया कि स्कूल बसों में न तो हेल्पर हैं और न ही छोटे बच्चों के लिए केयर टेकर की व्यवस्था है। गुलावठी, स्याना, बुगरासी, सिकंदराबाद, खुर्जा, शिकारपुर, औरंगाबाद, जहांगीराबाद, अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, ऊंचागांव, अहमदगढ़ क्षेत्र में किसी भी स्कूली वाहन में हेल्पर नहीं मिला। अधिकतर वाहनों में बच्चों की सुरक्षा चालक के हवाले थी। काफी वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे ढोए जा रहे थे। गुलावठी में खुली वैन में बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था।
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7 वाहन सीज, 16 के काटे चालान
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने गाजियाबाद की घटना के बाद तीन दिन में 7 स्कूली वाहनों को सीज किया है और 16 वाहनों के चालान काटे हैं। 114 पंजीकृत बसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पिछले कई दिनों से स्कूली वाहनों की चेकिंग की जा रही है। जो वाहन नियम तोड़ते पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ चालान और सीज करने की कार्रवाई की जा रही है। फिटनेस नहीं कराने वाले स्कूलों को कई बार नोटिस भेजा जा चुका है। सड़कों पर इन वाहनों के संचालन पर कार्रवाई की जाएगी। - राजीव बंसल, एआरटीओ प्रवर्तन
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बुलंदशहर। जिले में परिवहन विभाग के अधिकारियों ने गाजियाबाद की घटना से भी सबक नहीं लिया है। स्कूलों के वाहन नियमों को दरकिनार को बच्चों को खुली वैन में ढो रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत 114 स्कूली वाहनों की फिटनेस नहीं है। इन वाहनों के संचालकों को विभाग ने केवल नोटिस भेजकर खानापूर्ति की है। किसी के खिलाफ आज तक कार्रवाई नहीं की है।
गाजियाबाद की घटना के बाद सात स्कूली वाहनों को सीज किया गया है। हालांकि एक अनुमान के मुताबिक 1200 से अधिक ऐसे स्कूली वाहन संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो फिटनेस है और न ही परमिट। जिले में 400 से अधिक सीबीएसई, एडेड एवं सेल्फ फाइनेंस स्कूल हैं। इनमें करीब 2000 से अधिक वाहन संचालित होते हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार केवल 850 वाहन ही पंजीकृत हैं।
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घटना के बाद भी लापरवाह स्कूल
गाजियाबाद में लापरवाही से छात्र की मौत के बाद भी जिले के स्कूल सतर्क नहीं हुए। शुक्रवार को पड़ताल में सामने आया कि स्कूल बसों में न तो हेल्पर हैं और न ही छोटे बच्चों के लिए केयर टेकर की व्यवस्था है। गुलावठी, स्याना, बुगरासी, सिकंदराबाद, खुर्जा, शिकारपुर, औरंगाबाद, जहांगीराबाद, अनूपशहर, बुलंदशहर, डिबाई, ऊंचागांव, अहमदगढ़ क्षेत्र में किसी भी स्कूली वाहन में हेल्पर नहीं मिला। अधिकतर वाहनों में बच्चों की सुरक्षा चालक के हवाले थी। काफी वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चे ढोए जा रहे थे। गुलावठी में खुली वैन में बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था।
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7 वाहन सीज, 16 के काटे चालान
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने गाजियाबाद की घटना के बाद तीन दिन में 7 स्कूली वाहनों को सीज किया है और 16 वाहनों के चालान काटे हैं। 114 पंजीकृत बसों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पिछले कई दिनों से स्कूली वाहनों की चेकिंग की जा रही है। जो वाहन नियम तोड़ते पाए जा रहे हैं, उनके खिलाफ चालान और सीज करने की कार्रवाई की जा रही है। फिटनेस नहीं कराने वाले स्कूलों को कई बार नोटिस भेजा जा चुका है। सड़कों पर इन वाहनों के संचालन पर कार्रवाई की जाएगी। - राजीव बंसल, एआरटीओ प्रवर्तन