{"_id":"590f6e774f1c1baa7c8508bd","slug":"publishers-decide-in-december","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिसंबर में ही तय हो जाते हैं पब्लिशर्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिसंबर में ही तय हो जाते हैं पब्लिशर्स
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Mon, 08 May 2017 12:29 AM IST
विज्ञापन
Notebook
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कमीशन के खेल में घिरे स्कूल प्रबंधकों का नया कारनामा सामने आया है। जनपद के अधिकांश स्कूल प्रबंधक दिसंबर में ही प्राइवेट पब्लिशर्स से सांठगांठ करके कापी-किताब तय कर देते हैं। जनपद के अधिकांश स्कूल प्रबंधक बुक सेलर का भी चयन पहले ही कर देते हैं।
छात्रों को बांटे गए सिलेबस की स्कीम के नीचे पब्लिकेशन की किताब और बुकसेलर के नाम-पता अंकित कर दिया जाता है। स्कूल प्रबंधन और प्राइवेट पब्लिशर्स के बीच किताब-कॉपी के नाम पर कमीशन की बंदरबांट दिसंबर माह से शुरू कर दी जाती है।
विज्ञापन
वाणिज्य कर अफसर दिसंबर माह में ही यह तय कर लेते हैं कि एक अप्रैल से होने वाले नए सत्र में बच्चों को कौन सी किताब पढ़ानी है। जो पब्लिशर्स स्कूल प्रबंधक को ज्यादा फायदा पहुंचाता है, उसके पब्लिकेशन को सिलेबस में जगह मिल जाती है।
विज्ञापन
स्कीम के नीचे बुकसेलर को भी पहले ही तय कर दिया जाता है। स्कीम में ऐसे पब्लिशर्स की किताब होती हैं, जो अन्य दुकानों पर मिलती ही नहीं। वाणिज्य कर अफसरों को कई स्कूलों की ऐसी स्कीम मिल गई हैं। इन स्कीमों की जांच की जा रही है। वाणिज्य कर अफसर स्कूल प्रबंधक-प्राइवेट पब्लिशर्स पर शिकंजा कसने लगे हैं।
फर्जी बिल पर बेच दी करोड़ों की कापी-किताब
नगर के बुक सेलर ने किताब-कॉपी बेचने में खुलेआम टैक्स चोरी की। छात्रों को किताब-कॉपी एस्टीमेट बनाकर बेच डालीं। नगर के चार बड़े बुक सेलर ने हजारों बच्चों को फर्जी बिलों के आधार पर कोर्स की किताब-कॉपी बेचीं।
कुछ अभिभावकों को असली बिल थमाए गए , जबकि अधिकांश अभिभावकों को एस्टीमेट थमाकर टैक्स चोरी की गई। इन बुक सेलर ने अभिभावकों को ऐसी स्लिप थमा दी, जिस पर न कोई टिन नंबर था और न ही दुकान का पता।
स्लिप पर ऊपर सिर्फ स्कूल का नाम लिखकर एस्टीमेट संख्या डालकर बिल बनाकर वसूली की गई, जबकि कुछ अभिभावकों को दिए गए बिल में दुकानदार का नाम, टिन नंबर समेत सब कुछ अंकित था। वाणिज्य कर अफसरों ने इन एस्टीमेटों की जांच शुरू कर दी है।
स्कूल प्रबंधन और प्राइवेट पब्लिशर्स के बीच सांठगांठ की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। जिन प्राइवेट पब्लिशर्स और बुक सेलर ने टैक्स चोरी की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।-आरडी प्रसाद, ज्वाइंट कमिश्नर, सेल्स टैक्स
खानापूर्ति तक सिमटी प्रशासनिक कार्रवाई
शासन के आदेश पर महंगी किताब-कॉपी और मनमानी फीस को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई सिर्फ खानापूर्ति तक सिमट कर रह गई है। बरती जा रही ढील से सब बेखौफ हैं और किसी को अब कार्रवाई का भी कोई डर नहीं है। बावजूद इसके अभी भी अफसर हरहाल में कार्रवाई का दावा कर रहे हैं।
शासन के आदेश पर प्रशासन की ओर से अभिभावकों को महंगी किताब-कॉपी, ड्रेस और फीस आदि से निजात दिलाने को बड़े जोरशोर से कार्रवाई शुरू की। अफसरों ने दावा किया था कि कार्रवाई होगी और अभिभावकों को राहत दिलाई जाएगी। मगर, जैसे-जैसे समय बीतता गया तो कार्रवाई भी ढीली पड़ गई और अफसर भी शांत हो गए।
इस ढील को देखते हुए सब राहत महसूस कर रहे हैं कि अब कार्रवाई नहीं होगी। जबकि अभिभावकों को अभी भी आस बंधी है कि प्रशासन कार्रवाई कर उन्हें जरूर राहत दिलाएगा। उधर, बीएसए धर्मेंद्र सक्सेना का कहना है कि कार्रवाई जारी है और जल्द ही कोई उचित निर्णय लिया जाएगा। किसी को भी मनमानी नहीं करने दी जाएगी। अभिभावकों को जरूर राहत दिलाई जाएगी।