फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   price hike

एक माह में 10 रुपये बढ़ गए दूध के दाम

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 10:38 PM IST
विज्ञापन
price hike
एक माह में 10 रुपये बढ़ गए दूध के दाम
विज्ञापन

बुलंदशहर। एक महीने के अंदर दूध के दामों में 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। गांव में जो दूध 35 रुपये में मिल रहा था, वह 45 रुपये और शहर में 50 रुपये के स्थान पर 60 रुपये में दूध की बिक्री हो रही है। इस दौरान भूसा और खल भी महंगा हो गया है। दूध महंगा होने के कारण लोगों ने कटौती शुरू कर दी है।
पिछले कुछ समय तक भूसा 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, जबकि इन दिनों 1600 रुपये का एक क्विंटल मिल रहा है। इसकी सभी जगह और आसानी से उपलब्धता नहीं है। जिन लोगों ने स्टॉक करके रखा था, वह मनमाने दामों पर इसे बेच रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर खल के रेट भी बढ़ गए हैं। जो खल की बोरी दो हजार रुपये के आसपास थी। वह अब 2300 रुपये से अधिक हो गई है। इसी तरह दूधारू पशुओं को खिलाए जाने वाले अन्य खाद्य पदार्थ भी महंगे हो गए हैं। इसके चलते दूध के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि दूध के दाम बढ़ने से अब कटौती करनी शुरू कर दी है। दूध महंगा होने के कारण रसोई का खर्च भी बढ़ गया है।
विज्ञापन

जिले में करीब 13 लाख पशु, छह लाख दुधारू
जिले में करीब 13 लाख पशु हैं। इनमें से छह लाख से अधिक पशु दुधारू शामिल हैं। पशुपालक अपने पशुओं का दूध घर में प्रयोग करने के अलावा बेचते भी हैं। दूध खरीदने का काम प्राइवेट डेरी वाले भी कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर चर्चा शुरू होने लगी है कि दूध के दाम बढ़ने से सिंथेटिक दूध बनाने वाले भी सक्रिय हो गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

1990 के दशक में होता था अच्छा उत्पादन
1990 के दशक में बुलंदशहर दूध का अच्छा उत्पादन होता था। उस समय जिले में दूध खरीद करने वाले प्लांट की भरमार थी। उस समय दूध खरीदने का काम दुग्ध उत्पादन समिति भी करती थी। गांव-गांव दूध खरीदने के लिए समिति बनाई गई थी। जहां पर पशुपालकों को अच्छा दाम मिलता था। लेकिन धीरे-धीरे यह कारोबार धीमा होता गया और समितियां भी बंद होती चली गईं। अब दूध खरीदने का काम प्राइवेट दूध प्लांट या दूधिया ही कर रहे हैं। जो घर-घर से दूध खरीद कर प्राइवेट प्लांट के अलावा मिठाईयों की दुकान और शहर में घर-घर जाकर बेचने का काम करते हैं। खास बात यह है समिति बंद होने के बाद दूध उत्पादन समिति भी भंग हो गईं और अब दूध के उत्पादन का आंकड़ा किसी विभाग के पास नहीं है।
बोले पशुपालक
गर्मी शुरू होते ही एक तो दूध कम हो जाता है। दूसरा इस समय चारा और खली आदि महंगी मिल रही है। ऐसे में दूध के दाम में पिछले एक माह में इजाफा हुआ है। अधिकतर लोग गोवंश को दूध कम देने पर छोड़ देते हैं। इसके चलते भी दूध की कमी हो चली है और आने वाले दिनों में गर्मी बढ़ने पर दूध कम हो जाएगा तो और भी दाम बढ़ सकते हैं। -
- ओमपाल सिंह।
बोले दूध विक्रेता
एक माह पहले गांव में दूध का रेट 35 रुपये और शहर में 50 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। लेकिन अब गांव में 45 रुपये और शहर में 60 रुपये तक बिक रहा है। इसका कारण महंगाई है तो दूध की लगातार हो रही कमी भी है। गर्मी बढ़ने पर दूध के दाम और भी बढ़ने की संभावना है। - हरीश कुमार।

विभाग के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं होता है कि कितने दुधारू पशु हैं और कितना जिले में उत्पादन हो रहा है। पहले इसका आंकड़ा दूध उत्पादन समिति के पास होता था, लेकिन अब यह समिति भी पिछले कई साल से बंद चल रही है। - डॉ. अनिल कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed