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Bulandshahar News: पोर्टेबल कोविड अस्पताल का अब अन्य कार्यों में किया जाएगा उपयोग
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बुलंदशहर। कोरोना संक्रमण समाप्त होने के बाद खुर्जा में बना 100 बेड का अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल खाली पड़ा है। जिसे अब अन्य आपातकालीन बीमारी होने पर प्रयोग में लिया जाएगा। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इससे अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल को प्रयोग में लाया जा सके।
खुर्जा के जटिया चिकित्सालय में एक साल पूर्व कोरोना संक्रमण बढ़ने पर 100 बेड का अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल बनाया गया। इसमें 100 बेड का पोर्टेबल अस्पताल बनाने के साथ संसाधन और सीवर लाइन से कनेक्ट किया गया। इसके तैयार हो जाने के बाद इसका किसी भी कोविड मरीज के लिए प्रयोग नहीं किया गया। ऐसे में यह खाली चलता आ रहा है। खाली रहने पर इसमें रखे संसाधनों के खराब होने की संभावना बनी हुई है। इसको लेकर अब विभाग इस पोर्टेबल अस्पताल को अन्य बीमारियों में मरीजों के उपचार करने में प्रयोग करेगा।
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44 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ पोर्टेबल अस्पताल
खुर्जा के जटिया अस्पताल में शासन की ओर से 44 लाख रुपये की लागत से पोर्टेबल कोविड अस्पताल तैयार कराया गया। जिसमें वातानुकूलित 100 बेड की सुविधा है। वहीं अस्पताल में दो-दो बेड के कक्ष बने हैं, जिसमें शौचालय की भी सुविधा है। वहीं ऑक्सीजन पाइपलाइन के साथ-साथ टीवी भी कक्ष में दिया गया है। इसका निर्माण लोक निर्माण विभाग से कराया गया, जो दिसंबर 2021 को शुरू कर दिया गया। 30 जनवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका निरीक्षण किया। लेकिन इसमें अभी तक किसी मरीज को भर्ती नहीं किया गया।
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प्रदेश के चार जिलों में बने थे पोर्टेबल अस्पताल
इमेरिकन इंडिया फाउंउेशन (एआईएफ) ने कोरोना काल के समय मरीजों को बेड की संख्या कम पड़ने पर बुलंदशहर व बलिया में 100-100 बेड, कुशीनगर में 72 बेड और गोरखपुर में 34 बेड का पोर्टेबल अस्पताल बनाया। पिछले दिनों इन चारों पोर्टेबल अस्पतालों का सर्वे करने पर पता चला कि आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस पोर्टेबल अस्पताल खाली पड़े हैं। इन्हें आम जनता को लाभ देने के लिए गैर-कोविड में भी उपयोग किया जा सकता है।
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पिछले वर्ष बनाया गया था डेंगू डेडिकेटेड हॉस्पिटल
पिछले वर्ष 2023 में जिले में डेंगू मरीज बढ़ने पर पोर्टेबल अस्पताल को डेंगू डेडिकेटेड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया। लेकिन पोर्टेबल अस्पताल में एक भी मरीज को भर्ती कर सुविधा का लाभ नहीं मिला। सरकारी चिकित्सालयों में डेंगू मरीज मिलने पर जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर इलाज किया गया। हालत गंभीर होने पर संबंधित को रेफर कर दिया गया।
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खुर्जा के जटिया चिकित्सालय में बने अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल को अब अन्य बीमारी के मरीज बढ़ने पर प्रयोग में लिया जा सकेगा। इसके लिए शासन के भी निर्देश मिल चुके हैं। पोर्टेबल अस्पताल आधुनिक चिकित्सकीय सुविधा से परिपूर्ण हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ
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खुर्जा के जटिया चिकित्सालय में एक साल पूर्व कोरोना संक्रमण बढ़ने पर 100 बेड का अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल बनाया गया। इसमें 100 बेड का पोर्टेबल अस्पताल बनाने के साथ संसाधन और सीवर लाइन से कनेक्ट किया गया। इसके तैयार हो जाने के बाद इसका किसी भी कोविड मरीज के लिए प्रयोग नहीं किया गया। ऐसे में यह खाली चलता आ रहा है। खाली रहने पर इसमें रखे संसाधनों के खराब होने की संभावना बनी हुई है। इसको लेकर अब विभाग इस पोर्टेबल अस्पताल को अन्य बीमारियों में मरीजों के उपचार करने में प्रयोग करेगा।
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44 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ पोर्टेबल अस्पताल
खुर्जा के जटिया अस्पताल में शासन की ओर से 44 लाख रुपये की लागत से पोर्टेबल कोविड अस्पताल तैयार कराया गया। जिसमें वातानुकूलित 100 बेड की सुविधा है। वहीं अस्पताल में दो-दो बेड के कक्ष बने हैं, जिसमें शौचालय की भी सुविधा है। वहीं ऑक्सीजन पाइपलाइन के साथ-साथ टीवी भी कक्ष में दिया गया है। इसका निर्माण लोक निर्माण विभाग से कराया गया, जो दिसंबर 2021 को शुरू कर दिया गया। 30 जनवरी 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका निरीक्षण किया। लेकिन इसमें अभी तक किसी मरीज को भर्ती नहीं किया गया।
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प्रदेश के चार जिलों में बने थे पोर्टेबल अस्पताल
इमेरिकन इंडिया फाउंउेशन (एआईएफ) ने कोरोना काल के समय मरीजों को बेड की संख्या कम पड़ने पर बुलंदशहर व बलिया में 100-100 बेड, कुशीनगर में 72 बेड और गोरखपुर में 34 बेड का पोर्टेबल अस्पताल बनाया। पिछले दिनों इन चारों पोर्टेबल अस्पतालों का सर्वे करने पर पता चला कि आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस पोर्टेबल अस्पताल खाली पड़े हैं। इन्हें आम जनता को लाभ देने के लिए गैर-कोविड में भी उपयोग किया जा सकता है।
पिछले वर्ष बनाया गया था डेंगू डेडिकेटेड हॉस्पिटल
पिछले वर्ष 2023 में जिले में डेंगू मरीज बढ़ने पर पोर्टेबल अस्पताल को डेंगू डेडिकेटेड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया। लेकिन पोर्टेबल अस्पताल में एक भी मरीज को भर्ती कर सुविधा का लाभ नहीं मिला। सरकारी चिकित्सालयों में डेंगू मरीज मिलने पर जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कर इलाज किया गया। हालत गंभीर होने पर संबंधित को रेफर कर दिया गया।
खुर्जा के जटिया चिकित्सालय में बने अस्थाई पोर्टेबल अस्पताल को अब अन्य बीमारी के मरीज बढ़ने पर प्रयोग में लिया जा सकेगा। इसके लिए शासन के भी निर्देश मिल चुके हैं। पोर्टेबल अस्पताल आधुनिक चिकित्सकीय सुविधा से परिपूर्ण हैं। - डॉ. विनय कुमार सिंह, सीएमओ