{"_id":"5f4fd4a48ebc3e54e65763e8","slug":"polution-label-of-bulandshahar-bulandshahr-news-gbd2047478136","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में शुद्ध हुआ बुलंदशहर की हवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में शुद्ध हुआ बुलंदशहर की हवा
विज्ञापन
polution label of bulandshahar
- फोटो : BULANDSHAHR
कोरोना काल में शुद्ध हुई बुलंदशहर की हवा
बुलंदशहर। जहरीली हवा को लेकर देश के प्रदूषित शहरों में शामिल रहने वाले जनपद के लिए लॉकडाउन वरदान साबित हुआ। अक्सर 200-300 के करीब रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) अगस्त माह में 100 से भी कम रहा। जबकि, गत वर्ष 300 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक मापा गया था। वहीं, माह के अधिकांश दिनों में इसका स्तर 50 से भी कम रहा।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में शामिल होने के कारण जनपद का एक्यूआई कोरोना संक्रमण से पूर्व अक्सर 200 से अधिक रहता था, कभी-कभी सूचकांक 400 के करीब भी मापा गया। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान वाहनों के संचालन पर पाबंदी लगने और अन्य साधन बंद होने से जनपद की आबोहवा में काफी सुधार देखने को मिला। एक अगस्त से 31 अगस्त के बीच के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलेगा कि सिर्फ दो अगस्त ही ऐसा था, जिस दिन इस माह का सर्वोच्च स्तर 97 दर्ज किया गया। इसके अलावा माह में तीन अन्य दिनों 90 के पार वायु गुणवत्ता सूचकांक रहा।
अगस्त माह में मात्र नौ दिन जनपद का एक्यूआई 50 से भी कम रहा। जबकि, 20 अगस्त को माह का सबसे कम एक्यूआई दर्ज किया गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार 13 अगस्त को 50, 14 अगस्त को 39, 16 अगस्त को 48, 17 व 19 अगस्त को 41-41, 20 अगस्त को 30, 13 अगस्त को 43, 24 अगस्त को 36 और 31 अगस्त को एक्यूआई 35 मापा गया।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के अनुसार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक के अनुसार देखें तो 50 से कम वायु गुणवत्ता सूचकांक एक तरह से हवा की शुद्धता का परिचायक है। 25 के आसपास वाले सूचकांक को स्वास्थ्य के लिए हर तरीके से बेहतर बताया जाता है। 50 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति थोड़ी चिंताजनक मानी जाती है। वहीं, 100 से अधिक पहुंचने के बाद इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा माना जाने लगता हैं। पर्यावरणविद् राजेंद्र पथिक ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो जनपद का एक्यूआई 100 से कम रह सकता हैं। इसके लिए पौधरोपण करते रहे और उनका संरक्षण करें।
विज्ञापन
बुलंदशहर। जहरीली हवा को लेकर देश के प्रदूषित शहरों में शामिल रहने वाले जनपद के लिए लॉकडाउन वरदान साबित हुआ। अक्सर 200-300 के करीब रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) अगस्त माह में 100 से भी कम रहा। जबकि, गत वर्ष 300 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक मापा गया था। वहीं, माह के अधिकांश दिनों में इसका स्तर 50 से भी कम रहा।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में शामिल होने के कारण जनपद का एक्यूआई कोरोना संक्रमण से पूर्व अक्सर 200 से अधिक रहता था, कभी-कभी सूचकांक 400 के करीब भी मापा गया। लेकिन कोरोना संक्रमण के दौरान वाहनों के संचालन पर पाबंदी लगने और अन्य साधन बंद होने से जनपद की आबोहवा में काफी सुधार देखने को मिला। एक अगस्त से 31 अगस्त के बीच के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलेगा कि सिर्फ दो अगस्त ही ऐसा था, जिस दिन इस माह का सर्वोच्च स्तर 97 दर्ज किया गया। इसके अलावा माह में तीन अन्य दिनों 90 के पार वायु गुणवत्ता सूचकांक रहा।
विज्ञापन
अगस्त माह में मात्र नौ दिन जनपद का एक्यूआई 50 से भी कम रहा। जबकि, 20 अगस्त को माह का सबसे कम एक्यूआई दर्ज किया गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स के अनुसार 13 अगस्त को 50, 14 अगस्त को 39, 16 अगस्त को 48, 17 व 19 अगस्त को 41-41, 20 अगस्त को 30, 13 अगस्त को 43, 24 अगस्त को 36 और 31 अगस्त को एक्यूआई 35 मापा गया।
विज्ञापन
विशेषज्ञों के अनुसार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानक के अनुसार देखें तो 50 से कम वायु गुणवत्ता सूचकांक एक तरह से हवा की शुद्धता का परिचायक है। 25 के आसपास वाले सूचकांक को स्वास्थ्य के लिए हर तरीके से बेहतर बताया जाता है। 50 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक की स्थिति थोड़ी चिंताजनक मानी जाती है। वहीं, 100 से अधिक पहुंचने के बाद इसे स्वास्थ्य के लिए खतरा माना जाने लगता हैं। पर्यावरणविद् राजेंद्र पथिक ने बताया कि लोगों का सहयोग रहा तो जनपद का एक्यूआई 100 से कम रह सकता हैं। इसके लिए पौधरोपण करते रहे और उनका संरक्षण करें।