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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   People are getting worried due to lack of bus stand in Sayana

Bulandshahar News: स्याना में बस अड्डा नहीं होने से लोग हो रहे परेशान

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 07 Sep 2024 10:56 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
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स्याना। नगर में नियमित रोडवेज बस एवं रोडवेज बस अड्डे का संचालन न होने से यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में यात्रियों को निजी बसें या डग्गामार वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। निजी बसों के बुगरासी चौराहे पर खड़े रहने से अक्सर जाम की भी समस्या बन जाती है। जबकि पालिका द्वारा लाखों रुपये खर्च कर कल्याण सिंह पार्क के आगे यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया।
स्याना फल पट्टी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। फलों का कारोबार करने के लिए व्यापारियों का दिल्ली समेत अन्य जनपदों में जाना होता है। इसके लिए पूर्व में दिल्ली के लिए रोडवेज बस सेवा की मांग की गई, लेकिन अभी तक दिल्ली के लिए रोडवेज बस सेवा संचालित नहीं हो सकी। वहीं, नगर में रोडवेज बस अड्डे की भी मांग हुई, उसके लिए प्रयास किए, लेकिन वह भी अभी तक नहीं बन सका। यात्रियों को सफर करने के लिए निजी बस या डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इनके लिए भी कोई स्थाई बस स्टैंड नहीं है। डग्गामार वाहन चालक एवं निजी बस चालक मार्ग पर कहीं भी बसों को रोककर खड़े हो जाते हैं। इससे नगर में आए दिन जाम की समस्या बनी रहती है। यात्रियों की सुविधा के लिए पालिका ने चार साल पूर्व कल्याण सिंह पार्क के आगे लाखों रुपये खर्च कर बस स्टैंड प्रतीक्षालय का निर्माण कराया। लेकिन यहां पर बस चालक बसों को नहीं रोकते हैं। बसों के निर्धारित जगह न रुकने से व नगर में स्थाई पार्किंग न होने से मुख्य मार्गों से लेकर नगर के बाजारों में जाम की समस्या से हर किसी को जूझना पड़ रहा है। हिंदुस्तान उत्थान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश कुमार चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री व डीएम बुलंदशहर को पत्र भेजकर नगर में रोडवेज बस स्टैंड बनाने और रोडवेज बसों का संचालन करने की मांग की गई है।
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व्यापारी वत्सल रस्तोगी ने कहा कि नगर में रोडवेज बसों का संचालन सुचारू रूप से नहीं होने के कारण व्यापारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं। व्यापारियों को सामान लाने के लिए अन्य शहरों को जाना पड़ता है, लेकिन मजबूरी में प्राइवेट बसें या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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