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Bulandshahar News: सरकारी समारोह में निभाई महज रस्म, कई जोड़े बाद में करेंगे शादी
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मंडप में शादी के लिए बैठी दुल्हन।
बुलंदशहर। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कई जोड़े केवल सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए शामिल हुए, उन्होंने मंडप में बैठकर शादी की महज औपचारिकता पूरी की।
बुधवार को नुमाइश मैदान स्थित निकुंज हॉल में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए कई जोड़े अपनी शादी रीति-रिवाज से बाद में कई करेंगे। इनमें से कई जोड़ों की शादी की तिथि तय हो गई है तो कई की अभी तारीख भी नहीं तय हुई है।
उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में गरीब बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक लाख रुपये खर्च करती है। इसमें परिवार की आय दो से तीन लाख रुपये होनी चाहिए। इसमें से 64 हजार रुपये लड़की के खाते में जाते हैं और 21 हजार रुपये का सामान दिया जाता है। इसके अलावा 15 हजार रुपये आयोजन में खर्च किए जाते हैं।
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योजना के तहत जिला समाज कल्याण विभाग पात्र बेटियों के आवेदन प्राप्त होने के बाद उनका सत्यापन करता है। उसके बाद पात्र आवेदकों को विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आखिरी मोहर लगाता है।
इस बार इस योजना के तहत अधिकारियों ने 136 जोड़ों को समारोह में शामिल किया। इस दौरान जब नवविवाहित जोड़ों से बात की गई तो सामने आया कि शादी के जोड़े में बैठे कई युवक-युवतियां तो सिर्फ सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आए हैं। शादी तो उनकी नवंबर और दिसंबर में होगी।
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21, 22 और 24 नवंबर, एक और छह दिसंबर को दोबारा होगी इनकी शादी
निकुंज हॉल में शादी के जोड़े में बैठे जहांगीराबाद के मोहल्ला मेमरान निवासी राहुल ने बताया कि उनकी शादी अहार के गांव दराबर निवासी काजल से तय हुई है। आज तो वह रस्म अदायगी के लिए आए हैं। शादी छह दिसंबर को होगी।
उसमें परिवार और रिश्तेदार शामिल होंगे। स्याना से आए दिनेश ने बताया कि उनकी शादी स्याना क्षेत्र के गांव रानापुर निवासी खुशी से हो रही है, 21 नवंबर को वह दोबारा शादी करेंगे।
बताया कि अभी वह हापुड़ से नौकरी करके यहां आए हैं। शिकारपुर के रहने वाले मोहित ने बताया कि उनकी शादी अमरगढ़ निवासी सोनिका से तय हुई है। वह एक दिसंबर को शादी करेंगे।
खानपुर क्षेत्र के गांव जवासा के रहने वाले सचिन की शादी धमेड़ा गांव निवासी पूनम से तय हुई है। बताया कि वह शादी छह दिसंबर को करेंगे यहां तो वह औपचारिकता पूरी करने आए हैं। उन्होंने बताया कि एक जोड़ा तो आज ही शादी करके मंडप में आया है।
शिकारपुर के युवक ने नाम नहीं बताया, उसने कहा कि उसकी तीन महीने बाद शादी होगी किन तिथि तय नहीं है। अहमदगढ़ क्षेत्र के रहने वाले सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी शादी सैदगढ़ी की रचना कुमारी से तय हुई है। वह 22 नवंबर को शादी करेंगे।
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सूट के ऊपर ही लहंगा चुनरी पहनकर बैठ गईं कई दुल्हनें
सामूहिक विवाह मंडप में शादी समारोह के दौरान केवल खानापूर्ति देखने को मिली। अधिकतर के हाथ में न तो मेहंदी लगी थी और न ही हल्दी की कोई रस्म हुई थी। केवल औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कई दुल्हनें सूट के ऊपर ही लहंगा और चुनरी पहनकर बैठ गईं। उसी स्थिति में उन्होंने रस्म पूरी कर ली।
समारोह के बीच में दो युवतियां सूट पहनकर आती हैं और उनके पीछे दो लड़के आते हैं। लड़की खाली जगह देखकर बैठ जाती हैं, फिर लड़के बैठ जाते हैं। लड़की सूट के ऊपर चुनरी डाल लेती हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति आता है और वह टोकता है कि ऐसे नहीं चलेगा।
दोनों लड़कियां वहां से उठती हैं और मंडप से बाहर चली जाती हैं, कुछ देर बाद वह लहंगा चुनरी पहनकर आती हैं। उनसे नाम जानना चाहा तो बताने से इन्कार कर दिया। इस दौरान सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव सलेमपुर जाट की एक युवती दूल्हे का इंतजार करती रही।
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कोट
सभी धर्म की रीति रिवाज के हिसाब से ही शादी हुई है। हल्दी, मेहंदी व अन्य रस्में तो लोगों को अपने घर पर ही पूरी करनी होती हैं। बाकी जिलों में तो सूट में ही शादी कराते हैं, बुलंदशहर इकलौता जिला है, जहां सभी दुल्हन का मेकअप होता है और वह लहंगा चुनरी में बैठती हैं।
हमारी योजना में ऐसा है कि जिस दिन तक शादी कर रहे हैं, उस दिन तक उनकी शादी नहीं होनी चाहिए। शादी करके कोई जोड़ा शामिल नहीं हुआ होगा। मैं मंच पर पूरे टाइम मौजूद थी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। सभी जोड़ों ने सात फेरे भी लिए हैं। - रंजना सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी बुलंदशहर
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बुधवार को नुमाइश मैदान स्थित निकुंज हॉल में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल हुए कई जोड़े अपनी शादी रीति-रिवाज से बाद में कई करेंगे। इनमें से कई जोड़ों की शादी की तिथि तय हो गई है तो कई की अभी तारीख भी नहीं तय हुई है।
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उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में गरीब बेटियों की शादी के लिए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत एक लाख रुपये खर्च करती है। इसमें परिवार की आय दो से तीन लाख रुपये होनी चाहिए। इसमें से 64 हजार रुपये लड़की के खाते में जाते हैं और 21 हजार रुपये का सामान दिया जाता है। इसके अलावा 15 हजार रुपये आयोजन में खर्च किए जाते हैं।
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योजना के तहत जिला समाज कल्याण विभाग पात्र बेटियों के आवेदन प्राप्त होने के बाद उनका सत्यापन करता है। उसके बाद पात्र आवेदकों को विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आखिरी मोहर लगाता है।
इस बार इस योजना के तहत अधिकारियों ने 136 जोड़ों को समारोह में शामिल किया। इस दौरान जब नवविवाहित जोड़ों से बात की गई तो सामने आया कि शादी के जोड़े में बैठे कई युवक-युवतियां तो सिर्फ सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए आए हैं। शादी तो उनकी नवंबर और दिसंबर में होगी।
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21, 22 और 24 नवंबर, एक और छह दिसंबर को दोबारा होगी इनकी शादी
निकुंज हॉल में शादी के जोड़े में बैठे जहांगीराबाद के मोहल्ला मेमरान निवासी राहुल ने बताया कि उनकी शादी अहार के गांव दराबर निवासी काजल से तय हुई है। आज तो वह रस्म अदायगी के लिए आए हैं। शादी छह दिसंबर को होगी।
उसमें परिवार और रिश्तेदार शामिल होंगे। स्याना से आए दिनेश ने बताया कि उनकी शादी स्याना क्षेत्र के गांव रानापुर निवासी खुशी से हो रही है, 21 नवंबर को वह दोबारा शादी करेंगे।
बताया कि अभी वह हापुड़ से नौकरी करके यहां आए हैं। शिकारपुर के रहने वाले मोहित ने बताया कि उनकी शादी अमरगढ़ निवासी सोनिका से तय हुई है। वह एक दिसंबर को शादी करेंगे।
खानपुर क्षेत्र के गांव जवासा के रहने वाले सचिन की शादी धमेड़ा गांव निवासी पूनम से तय हुई है। बताया कि वह शादी छह दिसंबर को करेंगे यहां तो वह औपचारिकता पूरी करने आए हैं। उन्होंने बताया कि एक जोड़ा तो आज ही शादी करके मंडप में आया है।
शिकारपुर के युवक ने नाम नहीं बताया, उसने कहा कि उसकी तीन महीने बाद शादी होगी किन तिथि तय नहीं है। अहमदगढ़ क्षेत्र के रहने वाले सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी शादी सैदगढ़ी की रचना कुमारी से तय हुई है। वह 22 नवंबर को शादी करेंगे।
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सूट के ऊपर ही लहंगा चुनरी पहनकर बैठ गईं कई दुल्हनें
सामूहिक विवाह मंडप में शादी समारोह के दौरान केवल खानापूर्ति देखने को मिली। अधिकतर के हाथ में न तो मेहंदी लगी थी और न ही हल्दी की कोई रस्म हुई थी। केवल औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कई दुल्हनें सूट के ऊपर ही लहंगा और चुनरी पहनकर बैठ गईं। उसी स्थिति में उन्होंने रस्म पूरी कर ली।
समारोह के बीच में दो युवतियां सूट पहनकर आती हैं और उनके पीछे दो लड़के आते हैं। लड़की खाली जगह देखकर बैठ जाती हैं, फिर लड़के बैठ जाते हैं। लड़की सूट के ऊपर चुनरी डाल लेती हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति आता है और वह टोकता है कि ऐसे नहीं चलेगा।
दोनों लड़कियां वहां से उठती हैं और मंडप से बाहर चली जाती हैं, कुछ देर बाद वह लहंगा चुनरी पहनकर आती हैं। उनसे नाम जानना चाहा तो बताने से इन्कार कर दिया। इस दौरान सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव सलेमपुर जाट की एक युवती दूल्हे का इंतजार करती रही।
कोट
सभी धर्म की रीति रिवाज के हिसाब से ही शादी हुई है। हल्दी, मेहंदी व अन्य रस्में तो लोगों को अपने घर पर ही पूरी करनी होती हैं। बाकी जिलों में तो सूट में ही शादी कराते हैं, बुलंदशहर इकलौता जिला है, जहां सभी दुल्हन का मेकअप होता है और वह लहंगा चुनरी में बैठती हैं।
हमारी योजना में ऐसा है कि जिस दिन तक शादी कर रहे हैं, उस दिन तक उनकी शादी नहीं होनी चाहिए। शादी करके कोई जोड़ा शामिल नहीं हुआ होगा। मैं मंच पर पूरे टाइम मौजूद थी, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। सभी जोड़ों ने सात फेरे भी लिए हैं। - रंजना सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी बुलंदशहर