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तीसरे दिन 14 पॉटरी फैक्ट्रियां हुईं सील
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sat, 07 May 2016 10:12 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर खरा न उतरने के कारण तीसरे दिन शनिवार को भी 14 फैक्ट्रियों को सील किया गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर एसडीएम और प्रदूषण विभाग के अफसरों ने यह कार्रवाई की। अब तक 51 फैक्ट्रियों में से अब तक 31 फैक्ट्रियों पर तालाबंदी की कार्रवाई की जा चुकी है।
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बता दें कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी के नवीनीकरण के लिए आवेदन लंबित होने के कारण एनजीटी ने नगर के 51 पॉटरी फैक्ट्रियों को प्रदूषण फैलाने वाली माना और मानक के अनुरूप बताते हुए बंद करने के निर्देश दिए थे।
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इसी क्रम में पिछले तीन दिनों से चल रही कार्रवाई के तहत बृहस्पतिवार को आठ, शुक्रवार को 9 और शनिवार को 14 फैक्ट्रियों पर तालाबंदी की कार्रवाई की गई। एसडीएम इंदुप्रकाश सिंह ने बताया कि शेष 20 फैक्ट्रियों पर सोमवार को कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदूषण नहीं फैला रहा पॉटरी उद्योग
खुर्जा। ‘पॉटरी फैक्ट्रियां प्रदूषण नहीं फैला रही हैं। ऐसा हाईकोर्ट भी मानती है।’ यह बात खुर्जा पॉटरी मेन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन की बंदी की कार्रवाई के खिलाफ हुई बैठक में कही।
सचिव दुष्यंत कुमार, संरक्षक रवि राना और प्रदूषण समिति के चैयरमैन सुभाष खन्ना ने संयुक्त रूप से बताया कि एनजीटी के निर्देशानुसार 108 ईकाइयों की उत्तर प्रदेश नियंत्रण बोर्ड लखनऊ की ओर से गठित टीम द्वारा मॉनिटरिंग की गई।
इसकी रिपोर्ट एनजीटी न्यायालय को प्रेषित की गई। इसे माननीय न्यायालय ने स्वीकृत करते हुए उपरोक्त पॉटरियों को प्रदूषण मुक्त माना। उन्हाेंने बताया कि जिन 51 पॉटरियों पर पूर्ववर्ती कंसेंट और नवीनीकरण के लिए आवेदन लंबित थे, उनको एनजीटी ने सहमति प्राप्त होने तक बंद करने के आदेश पारित किए थे।
कोट्स
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 51 इकाईयों ने जल और वायु की सहमति प्राप्त नहीं की थी। इसके कारण पॉटरियां प्रदूषण के नियमों पर खरी नहीं पाई गईं। ऐसे में एनजीटी के निर्देश पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। - गीतेश चंद्रा, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
हजारों मजदूरों के आगे रोजी-रोटी का सवाल
बंद हो रही 51 पॉटरियों में करीब आठ से दस हजार मजदूर काम करते हैं। लेकिन तालाबंदी होने के चलते हजारों मजदूरों के सामने परिवार के पेट पालने का संकट गहरा गया है।
मजदूर ननुआ, राजकुमार, पप्पन आदि ने बताया कि वह जिन फैक्ट्रियों में काम कर रहे थे उसमें अब तालाबंदी हो गई है। ऐसे में अब अपना परिवार लेकर कहां जाएं। पिछले तीन दिनों से वह इसी चिंता में बैठे हुए हैं। ऐसे में अब उनके पास वापस घर लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। मजदूरों ने बताया कि वह जिला प्रशासन के पास जाकर गुहार लगाएंगे।