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सतीश कुछ ऐसा करो कमाल, जीतकर मेडल कर दो निहाल

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 11:21 PM IST
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Olympics
सतीश कुछ ऐसा करो कमाल, जीतकर मेडल कर दो निहाल
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सिकंदराबाद। टोक्यो ओलंपिक में बृहस्पतिवार को बाक्सिंग स्पर्धा में सतीश यादव के होने वाले मुकाबले पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। सतीश के गांव पचौता व जनपद में इस मुकाबले को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है। मुकाबले को लेकर युवाओं में काफी जोश है। बुधवार को रोइंग खिलाड़ी अरविंद के प्रदर्शन को देखकर लोगों में काफी उत्साह है। अब अरविंद विश्व रैंकिंग के लिए खेलेंगे।
तहसील क्षेत्र के गांव पचौता निवासी सतीश यादव पुत्र किरनपाल यादव टोक्यो में चल रहे ओलंपिक गेम में मेंस सुपर हैवी वेट बॉक्सिंग प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रतियोगिता में सतीश को अपना पहला मुकाबला 24 जुलाई को खेलना था। लेकिन बाई मिलने के कारण वह दूसरे राउंड में पहुंच गए। अब सतीश के पंचों का मुकाबला जमाइका देश के खिलाड़ी ब्राउन रिकार्डो को करना होगा। यह मैच जीतने के साथ ही सतीश प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में प्रवेश कर जाएंगे। इसलिए पदक पाने के लिए इस मुकाबले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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पूरे देश की निगाहें इस समय सतीश पर टिकी हुई हैं। मुकाबले को लेकर सतीश के गांव में लोगों में काफी उत्सुकता देखने को मिल रही है। खासकर युवाओं में काफी जोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीण सतीश के परिजनों के साथ लाइव मुकाबला देखने को उत्सुक नजर आ रहे हैं। हर एक की जुबां पर बस यही है कि सतीश प्रतियोगिता में तुम अपने पंचों से प्रतिद्वंदी को धूल चटाकर देश का नाम रोशन करो।
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वहीं, सतीश के पिता किरनपाल यादव ने बताया कि बेटे का ओलंपिक में खेलना काफी बड़ी बात है। सतीश बचपन से ही जुझारू प्रवृत्ति का रहा है। वह देश का नाम जरूर रोशन करेगा।
हर ओर हो रही सतीश की चर्चा
बृहस्पतिवार को सतीश के मुकाबले को लेकर चारों ओर चर्चा हो रही है। गांव की गलियां हो या चौपाल जहां भी लोग जमा होते हैं वह सतीश के मुकाबले की बात करते हैं। हर कोई सतीश की जीत के लिए प्रार्थना कर रहा है। उनका लाल पदक जीतकर विदेशी धरती पर तिरंगा फहरा देश का मान बढ़ाए। गांव में चौपाल पर सतीश के पिता को लोगों ने बधाई दी। इस दौरान सूबेदार (रिटायर्ड) राम निवास यादव, लवकुश यादव, अमित यादव, आदेश समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

बोले साथी और ग्रामीण
बचपन से ही सतीश में आसमान छूने की चाहत थी। वह खेल में ही अपना भविष्य बनाना चाहता था। ईश्वर ने उनकी मंशा पूरी कर दी। अब सपने को पूरा करने की सतीश की बारी है।
प्रवीन यादव, बचपन के साथी
स्कूल के समय से ही सतीश के कद काठी को देखकर सबको लगता था कि एक दिन वह खेल में अपना भविष्य बनाएगा और तिरंगे का मान बढ़ाएगा।
- लोकेश यादव, बचपन के साथी
बचपन से ही सतीश में कुछ अलग कर दिखाने का जनून था। स्कूल समय से ही वह हर खेल प्रतियोगिता में जीतने के लिए पूरा दमखम लगा देते थे। - सुनील बचपन के साथी
बचपन से ही सतीश में जीत का जनून था। वह जिस खेल प्रतियोगिता में भी भाग लेते थे। हर हाल में जीतना चाहता थे। इसके लिए वह पूरी जान लगा देते थे।
- अमित यादव
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