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शाबाश सतीश, बढ़ो आगे... मंजिल अब दूर नहीं
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मुकाबले जीतने के बाद फोटो में बेटे का माथा चूमतीं सतीश की मां।
- फोटो : SIKANDRABAD
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शाबाश सतीश, बढ़ो आगे... मंजिल अब दूर नहीं
बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक में बुलंदशहर के सुपर हैवीवेट मुक्केबाज सतीश यादव ने जमैका के रिकार्डो ब्राउन को हरा क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस जीत के बाद जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है। सिकंदराबाद गांव पचौता निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज पहली बार ओलंपिक में प्रतिभाग कर रहे हैं। क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के बाद अब सतीश पदक से महज एक कदम दूर है। क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल करने पर देश के लिए एक मेडल पक्का हो जाएगा। हर किसी की जुबान पर बस यही है कि शाबाश सतीश, आगे बढ़ो, अब मंजिल दूर नहीं।
बॉक्सर सतीश यादव एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने के बाद टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। टोक्यो ओलंपिक में बृहस्पतिवार को सतीश का पहला मुकाबला था। सतीश ने अपने पंच से जमैका के मुक्केबाज को शुरू से काबू में रखा।
माथे पर खरोंच के बाद भी बनाए रखी बढ़त
मुकाबले में माथे पर खरोंच भी आई, लेकिन सतीश का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा और कामयाबी हासिल की। जमैका के एक प्वाइंट के एवज में सतीश ने लगातार चार प्वाइंट लिए। जनपद समेत देशवासी 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल विजेता सतीश यादव से पदक की पूरी उम्मीद कर रहे हैं। सतीश यादव ने 2018 कॉमनवेल्थ में खुद से वादा किया था कि ओलंपिक में देश को सोना दिलाऊंगा।
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एक अगस्त को उज्बेकिस्तान के बखोदिर से होगा मुकाबला
एक अगस्त को सतीश यादव का सामना उज्बेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव से होगा। बखोदिर मौजूदा विश्व और एशियाई चैंपियन हैं। हालांकि, सतीश ने उन्हें कभी नहीं हराया लेकिन इंडिया ओपन में आखिरी बार दोनों का सामना हुआ था और वह बंटा हुआ फैसला था। सतीश ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी।
इस तरह बनाई बढ़त
बॉक्सर सतीश यादव ने 91 किलो वर्ग के अंतिम-16 मुकाबले में जीत हासिल की है। सतीश ने पहला राउंड 5-0, दूसरा और तीसरा 4-1 से जीत लिया। अब सतीश अंतिम आठ में पहुंच चुके हैं। वहीं, सतीश यादव से पदक की उम्मीद बढ़ गई है। सतीश यादव सुपर हैवीवेट में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय भी हैं।
2010 में जीता था पहला पदक
सतीश यादव ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहले नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में कांस्य पदक जीता, 2015 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और 2019 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। हाल ही में चोट लगने के कारण जर्मनी में हुए कोलोगन बॉक्सिंग वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए और मैच न होने के कारण सिल्वर मेडल प्राप्त किया। बॉक्सर सतीश यादव अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित हैं।
अरविंद की विश्व में 11वें नंबर की बनी जोड़ी
बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक की रोइंग स्पर्धा में अरविंद की जोड़ी पदक से चूक गई। लेकिन बृहस्पतिवार को अरविंद की जोड़ी विश्व की 11वें नंबर पर काबिज हो गई। विश्व रैंकिंग के लिए बृहस्पतिवार को छह टीम के बीच स्पर्धा आयोजित हुई। इसमें अरविंद की जोड़ी पांचवें नंबर पर रही। अंतरराष्ट्रीय कैनोइंग खिलाड़ी शांति स्वरूप ने बताया कि अरविंद की जोड़ी ने देश और जिले के लिए बड़ी उपलब्धि दी है। आज तक विश्व रैंकिंग तक इंडिया की कोई भी जोड़ी नहीं पहुंच सकी है। दोनों की जोड़ी ओलंपिक में पहली बार प्रतिभाग कर सेमीफाइनल तक पहुंची। अब तक किए प्रदर्शन से उनकी जोड़ी ने देश के लिए इतिहास रचा है जो किसी पदक से कम भी नहीं है। बताया कि इंडिया की यह पहली जोड़ी है जो सेमीफाइनल तक पहुंची है।
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बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक में बुलंदशहर के सुपर हैवीवेट मुक्केबाज सतीश यादव ने जमैका के रिकार्डो ब्राउन को हरा क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस जीत के बाद जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई है। सिकंदराबाद गांव पचौता निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज पहली बार ओलंपिक में प्रतिभाग कर रहे हैं। क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के बाद अब सतीश पदक से महज एक कदम दूर है। क्वार्टर फाइनल में जीत हासिल करने पर देश के लिए एक मेडल पक्का हो जाएगा। हर किसी की जुबान पर बस यही है कि शाबाश सतीश, आगे बढ़ो, अब मंजिल दूर नहीं।
बॉक्सर सतीश यादव एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने के बाद टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। टोक्यो ओलंपिक में बृहस्पतिवार को सतीश का पहला मुकाबला था। सतीश ने अपने पंच से जमैका के मुक्केबाज को शुरू से काबू में रखा।
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माथे पर खरोंच के बाद भी बनाए रखी बढ़त
मुकाबले में माथे पर खरोंच भी आई, लेकिन सतीश का हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने अपना दबदबा कायम रखा और कामयाबी हासिल की। जमैका के एक प्वाइंट के एवज में सतीश ने लगातार चार प्वाइंट लिए। जनपद समेत देशवासी 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल विजेता सतीश यादव से पदक की पूरी उम्मीद कर रहे हैं। सतीश यादव ने 2018 कॉमनवेल्थ में खुद से वादा किया था कि ओलंपिक में देश को सोना दिलाऊंगा।
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एक अगस्त को उज्बेकिस्तान के बखोदिर से होगा मुकाबला
एक अगस्त को सतीश यादव का सामना उज्बेकिस्तान के बखोदिर जालोलोव से होगा। बखोदिर मौजूदा विश्व और एशियाई चैंपियन हैं। हालांकि, सतीश ने उन्हें कभी नहीं हराया लेकिन इंडिया ओपन में आखिरी बार दोनों का सामना हुआ था और वह बंटा हुआ फैसला था। सतीश ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी।
इस तरह बनाई बढ़त
बॉक्सर सतीश यादव ने 91 किलो वर्ग के अंतिम-16 मुकाबले में जीत हासिल की है। सतीश ने पहला राउंड 5-0, दूसरा और तीसरा 4-1 से जीत लिया। अब सतीश अंतिम आठ में पहुंच चुके हैं। वहीं, सतीश यादव से पदक की उम्मीद बढ़ गई है। सतीश यादव सुपर हैवीवेट में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय भी हैं।
2010 में जीता था पहला पदक
सतीश यादव ने पहला गोल्ड मेडल 2010 में उत्तर भारत एशिया चैंपियनशिप में जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहले नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में कांस्य पदक जीता, 2015 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक, 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता और 2019 में बैंकाक में हुई एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुके हैं। हाल ही में चोट लगने के कारण जर्मनी में हुए कोलोगन बॉक्सिंग वर्ल्डकप में गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए और मैच न होने के कारण सिल्वर मेडल प्राप्त किया। बॉक्सर सतीश यादव अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित हैं।
अरविंद की विश्व में 11वें नंबर की बनी जोड़ी
बुलंदशहर। टोक्यो ओलंपिक की रोइंग स्पर्धा में अरविंद की जोड़ी पदक से चूक गई। लेकिन बृहस्पतिवार को अरविंद की जोड़ी विश्व की 11वें नंबर पर काबिज हो गई। विश्व रैंकिंग के लिए बृहस्पतिवार को छह टीम के बीच स्पर्धा आयोजित हुई। इसमें अरविंद की जोड़ी पांचवें नंबर पर रही। अंतरराष्ट्रीय कैनोइंग खिलाड़ी शांति स्वरूप ने बताया कि अरविंद की जोड़ी ने देश और जिले के लिए बड़ी उपलब्धि दी है। आज तक विश्व रैंकिंग तक इंडिया की कोई भी जोड़ी नहीं पहुंच सकी है। दोनों की जोड़ी ओलंपिक में पहली बार प्रतिभाग कर सेमीफाइनल तक पहुंची। अब तक किए प्रदर्शन से उनकी जोड़ी ने देश के लिए इतिहास रचा है जो किसी पदक से कम भी नहीं है। बताया कि इंडिया की यह पहली जोड़ी है जो सेमीफाइनल तक पहुंची है।