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नोएडा, मेरठ और हापुड़ आ-जा सकेंगे जिले के दस साल पुराने डीजल वाहन

Fri, 22 Jul 2016 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो/बुलंदशहर Updated Fri, 22 Jul 2016 11:16 PM IST
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Noida, Meerut and Hapur'll go to the district's ten-year-old diesel vehicles
एनजीटी - फोटो : ब्यूरो

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बुलंदशहर समेत मेरठ, बागपत और हापुड़ जिले में 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने व दोबारा पंजीकरण की अनुमति दे दी है।

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हालांकि पांच सदस्यीय पीठ ने साफ किया कि इन डीजल वाहनों का प्रवेश दिल्ली, गाजियाबाद, गुड़गांव, ग्रेटर नोएडा और फरीदाबाद व सोनीपत में नहीं होना चाहिए।एनजीटी के आदेश से बुलंदशहर के 10 साल पुराने 16 हजार वाहन संचालकों को राहत मिल गई है।
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यह वाहन  हापुड़, गौतमबुद्धनगर मेरठ और बागपत आ-जा सकेंगे।  जिले में 10 पुराने डीजल वाहनोें की संख्या 15925 है। 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन भी 21275 रजिस्टर्ड हैं।
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।

पीठ ने इस मामले में दो याचिकाओं का निपटारा कर दिया। मामले में मेरठ-बुलंदशहर मोटर एसोसिएशन ने एनजीटी में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी। यूनियन का आरोप था कि एनजीटी के जरिये 7 अप्रैल 2015 को दिए गए आदेश का अनुपालन करते हुए यूपी के मेरठ, बागपत, हापुड़ और बुलंदशहर जिले में भी ट्रांसपोर्ट विभाग 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहा।

जबकि यह शहर दिल्ली से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर हैं। इसके साथ ही इन शहरों में विकल्प के तौर पर सीएनजी व अन्य ईंधन स्रोतों के लिए बुनियादी संरचना भी मौजूद नहीं है।
सुनवाई के दौरान यूनियन की ओर से पेश अधिवक्ता ने अपनी दलील में कहा कि पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध के संबंध में एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने आदेश का अनुपालन करते हुए 10 जुलाई 2015 और 31 मार्च 2016 को पत्र जारी करते हुए सभी प्राधिकरणों को 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों के दोबारा पंजीकरण और फिटनेस सर्टिफिकेट न जारी करने के संबंध में पत्र जारी किया था।

यूनियन ने मांग की थी कि प्रत्येक डीजल गाड़ी को सीएनजी में तब्दील करने में काफी वक्त लगेगा। तब तक काम रुकने से लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। लिहाजा एनजीटी इन ट्रांसपोर्टर्स को कम से कम 2019 तक राहत प्रदान करे।


याचिका में कहा गया था कि  यदि  मेरठ में मौजूद सभी 10 साल पुराने डीजल वाहनों को सीएनजी में तब्दील किया जाएगा तो करीब 31487 किलोग्राम सीएनजी गैस की जरूरत होगी। जबकि सीएनजी सप्लाई करने के लिए सीएनजी स्टेशन जैसी बुनियादी संरचनाओं की पूर्ति जब तक न हो एनजीटी इस क्षेत्र में डीजल वाहनों को राहत प्रदान करे।

एनजीटी के आदेश की कॉपी मिलते ही एनओसी देने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। -सुरेंद्र सिंह कार,एआरटीओ

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