{"_id":"5884f9a64f1c1bc77cf006a4","slug":"netaji-will-head-the-easy-way-to-victory","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘नेताजी’ की जीत की राह प्रधान बनाएंगे आसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘नेताजी’ की जीत की राह प्रधान बनाएंगे आसान
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Sun, 22 Jan 2017 11:57 PM IST
विज्ञापन
EVM
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विधानसभा तक पहुंचने के लिए प्रत्याशियों की राह गांव के प्रधान आसान बनाएंगे। चुनाव में प्रधानों की अहमियत को देखते हुए प्रत्याशियों ने उन्हें साधना शुरू कर दिया है।
जिले में 951 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 1993 बूथ बनाए गए हैं, जबकि शहरी क्षेत्र में महज 568 बूथ हैं।
जिले में करीब 24 लाख 93 हजार मतदाता हैं। इसमें से करीब 70 फीसदी ग्रामीण क्षेत्र से और 30 फीसदी वोटर शहरी क्षेत्र के हैं। ग्रामीण वोटरों को साधने में ग्राम प्रधान की अहम भूमिका होती है। ग्रामीण वोटरों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए प्रत्याशियों को प्रधानों की परिक्रमा करनी पड़ेगी।
विज्ञापन
अभी से ही प्रत्याशियों ने प्रधानों को रिझाना शुरू कर दिया है। प्रधानों के अलावा बीडीसी सदस्य और जिल पंचायत सदस्यों को भी प्रत्याशियों की निगाह है।
चौपाल से लेकर वोट डलवाने तक की जिम्मेदारी
प्रधानों को विधानसभा चुनाव के लिए चौपाल से लेकर मतदान के दिन वोट दिलाने तक की जिम्मेदारी दी जाती है। भाजपा-बसपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही लगातार गांवों का दौरा कर रहे हैं। यह प्रत्याशी हर गांव में प्रधानों को साधने में जुटे हैं। वहीं, हर प्रत्याशी गांव में मतदाताओं को देखते हुए बजट तय कर रहा है।
विज्ञापन
इन मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए चुनावी चौपाल पर आने वाले खर्च को भी प्रत्याशी प्रधानों को दे रहे हैं। प्रत्याशी के गांव पहुंचने पर होने वाली चौपाल में नाश्ता-पानी में आने वाला बजट भी प्रधानों को दिया जा रहा है।