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Bulandshahar News: बिना क्लोरीन के तीन लाख लोगों को पानी पिला रही नगर पालिका

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jul 2023 10:12 PM IST
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Municipality giving water to three lakh people without chlorine
बुलंदशहर। नगर पालिका अधिकारियों की लापरवाही के चलते शहर के तीन लाख से अधिक लोगों को बिना क्लोरीन का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पिछले करीब एक साल से क्लोरीन खरीदी ही नहीं गई और न ही क्लोरीन खरीद के लिए बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखा गया है। जिसके चलते लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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शहर के तीन लाख से अधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 30 ट्यूबवेल विभिन्न क्षेत्रों में लगाई गई हैं। प्रतिदिन इन ट्यूबवेल के माध्यम से लोगों को पाइप लाइन से पेयजल सप्लाई किया जाता है। शहर के लोगों को शद्ध पेयजल मिल सके, इसके लिए ट्यूबवेल संचालन के दौरान ही डोजर के माध्यम से क्लोरीन मिलाई जाती है। जबकि पानी की टंकियों में भी क्लोरीन डाले जाने की व्यवस्था होती है, लेकिन पिछले करीब एक साल से नगर पालिका के पास क्लोरीन उपलब्ध ही नहीं हैं। जिसके चलते अधिकतर ट्यूबवेलों पर लगे डोजर भी खराब हो चुके हैं। लोगों का आरोप है कि पानी में क्लोरीन नहीं मिलाए जाने के कारण नगर के अधिकांश क्षेत्र में जो पेयजल आपूर्ति हो रही है, उससे लोगों को परेशानी हो रही है।
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पानी में बैक्टीरिया होने का खतरा

वरिष्ठ चिकित्सक डा. डीके शर्मा ने बताया कि पानी में मौजूद बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए क्लोरीन मिलाया जाता है। यदि पानी में क्लोरीन नहीं मिलाई जाती है और बैक्टीरिया पानी में मौजूद रहते हैं तो ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बैक्टीरिया युक्त पानी पीने से लोगों के लीवर और किडनी प्रभावित हो सकती हैं। इससे पीलिया, लीवर पर सूजन जैसी बीमारी हो सकती हैं। इसके अलावा अगर स्वच्छ पानी की पाइप लाइन कहीं से लीक हो जाए, तो बिना क्लोरीन पानी लोगों की समस्या को और बढ़ा सकता है।
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लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए थे डोजर

नगर की 30 ट्यूबवेलों पर लगाए गए डोजर को पिछले बोर्ड के कार्यकाल के दौरान खरीदा गया था। उस दौरान दावा किया था पाउडर के तौर पर क्लोरीन मिलाने के बजाए ट्यूबवेलों पर डोजर लगाकर लिक्विड क्लोरीन पानी में मिलाई जाएगी, ताकि क्लोरीन की मात्रा कम या ज्यादा न हो सके। हालांकि ट्यूबवेलों पर तैनात कर्मचारी टेक्नीकल नहीं है। इन कर्मचारियों को इतना भी जानकारी नहीं है कि कितने पानी में किस मानक के अनुसार क्लोरीन मिलाई जाती है।





करीब डेढ़ साल से नगर पालिका में क्लोरीन उपलब्ध नहीं है। न ही अधिकारियों ने बोर्ड बैठक में क्लोरीन खरीदने के लिए प्रस्ताव रखा है। इससे साफ है कि नगर पालिका को शहर के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है। यदि नगर पालिका अधिकारियों का इस ओर ध्यान होता तो काफी समय पहले क्लोरीन खरीदी जा चुकी होती। -- योगेश गुप्ता, सभासद।




बोर्ड की बैठक से बजट पास नहीं हुआ था, जिसके चलते क्लोरीन नहीं खरीदी जा सकी है। बजट पास होने के बाद क्लोरीन की खरीद कराई जाएगी। क्लोरीन खरीदने के बाद सभी ट्यूबवेलों पर लगे डोजर को चालू कर दिया जाएगा। - मनोज रस्तोगी, ईओ, नगर पालिका।
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