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डीजे वाले भइया ने गाने बजाए, मरीज बिलबिलाए
अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Mon, 29 Feb 2016 11:31 PM IST
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जिला महिला अस्पताल रविवार को शादी समारोह स्थल में बदला हुआ था। रात भर बजे डीजे ने प्रसूताओं और नवजातों की धड़कन बढ़ा दी। वहीं, शादी समारोह के दौरान अस्पताल परिसर में ड्रिंक भी की गई।
अस्पताल में शादी की अनुमति देने वाले अफसरों की मरीजों की तनिक भी फिक्र नहीं थी। रविवार को अस्पताल के ही एक चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी ने अपनी बेटी की शादी अस्पताल परिसर में ही आयोजित कर दी।
अस्पताल के गेट को शादी के गेट से ढक दिया गया। मरीजों के आने-जाने के रास्ते पर बाराती जाम लगा रहे थे। प्रसूताओं के लिए बने वार्ड के पीछे विवाह का मुख्य टेंट लगा हुआ था।
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रात भर डीजे की धमक से प्रसूता और नवजात बैचेन रहे। तीमारदार इधर से उधर घूमते रहे और डीजे बंद कराने के लिए चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था।
बाराती ड्रिंक जमकर हुल्हड़ मचा रहे थे और मरीज व तीमारदार सिर्फ तमाशबीन बनकर तमाशा देख रहे थे। किसी भी स्वास्थ्य अफसर को न तो प्रसूताओं की चिंता थी और न नवजात बच्चों की।
डीजे ने गुम कर दी नवजातों के रोने की आवाज
रातभर बजे डीजे और बारातियों के शोर ने नवजात बच्चों के रोने की आवाज भी गुम कर दी। रविवार को जिला महिला अस्पताल में 70 से ज्यादा प्रसूताएं भर्ती थीं।
डीजे की धमक नवजात बच्चों के दिल को चुभ रही थी, लेकिन किसी भी चिकित्सक, स्टाफ और अफसरों को रोने की आवाज नहीं सुनाई दी।
शनिवार से विभागीय काम के कारण मै बाहर था। सोमवार को भी मेरठ में डीजी की बैठक में था। प्रकरण की जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच होगी कि आखिर महिला अस्पताल में शादी की अनुमति किसके द्वारा दी गई। मामले में लापरवाह अफसर-चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, मुख्य चिकित्साधिकारी
बता दें कि जिला अस्पताल, महिला अस्पताल या किसी भी सरकारी अस्पताल में इस प्रकार के कार्यक्रम पूरी तरह अवैध हैं। अस्पताल साइलेंट जोन होता है। स्वास्थ्य अफसरों की मौखिक सहमति से ही शादी का आयोजन अस्पताल में कर दिया गया।
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अस्पताल में शादी की अनुमति देने वाले अफसरों की मरीजों की तनिक भी फिक्र नहीं थी। रविवार को अस्पताल के ही एक चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी ने अपनी बेटी की शादी अस्पताल परिसर में ही आयोजित कर दी।
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अस्पताल के गेट को शादी के गेट से ढक दिया गया। मरीजों के आने-जाने के रास्ते पर बाराती जाम लगा रहे थे। प्रसूताओं के लिए बने वार्ड के पीछे विवाह का मुख्य टेंट लगा हुआ था।
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रात भर डीजे की धमक से प्रसूता और नवजात बैचेन रहे। तीमारदार इधर से उधर घूमते रहे और डीजे बंद कराने के लिए चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था।
बाराती ड्रिंक जमकर हुल्हड़ मचा रहे थे और मरीज व तीमारदार सिर्फ तमाशबीन बनकर तमाशा देख रहे थे। किसी भी स्वास्थ्य अफसर को न तो प्रसूताओं की चिंता थी और न नवजात बच्चों की।
डीजे ने गुम कर दी नवजातों के रोने की आवाज
रातभर बजे डीजे और बारातियों के शोर ने नवजात बच्चों के रोने की आवाज भी गुम कर दी। रविवार को जिला महिला अस्पताल में 70 से ज्यादा प्रसूताएं भर्ती थीं।
डीजे की धमक नवजात बच्चों के दिल को चुभ रही थी, लेकिन किसी भी चिकित्सक, स्टाफ और अफसरों को रोने की आवाज नहीं सुनाई दी।
शनिवार से विभागीय काम के कारण मै बाहर था। सोमवार को भी मेरठ में डीजी की बैठक में था। प्रकरण की जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच होगी कि आखिर महिला अस्पताल में शादी की अनुमति किसके द्वारा दी गई। मामले में लापरवाह अफसर-चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. दीपक ओहरी, मुख्य चिकित्साधिकारी
बता दें कि जिला अस्पताल, महिला अस्पताल या किसी भी सरकारी अस्पताल में इस प्रकार के कार्यक्रम पूरी तरह अवैध हैं। अस्पताल साइलेंट जोन होता है। स्वास्थ्य अफसरों की मौखिक सहमति से ही शादी का आयोजन अस्पताल में कर दिया गया।