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पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का किया ओवदन, बना दिया जिंदा जेठ का
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ऊंचागांव क्षेत्र के गांव अमरगढ़ निवासी विधवा महिला के जिंदा जेठ का बनाया गया मृत्यु प्रमाणपत्र।
- फोटो : BULANDSHAHR
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पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का किया ओवदन, बना दिया जिंदा जेठ का
ऊंचागांव। क्षेत्र के गांव अमरगढ़ निवासी एक विधवा महिला ने अपने पति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे उसके जिंदा जेठ के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिया गया। इसमें ग्राम सचिव की लापरवाही बताई जा रही है।
गांव अमरगढ़ निवासी विधवा बबीता पत्नी विजेंद्र ने अपने पति की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ग्राम सचिव को ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाणित लेटर, मृतक का आधार कार्ड व शपथ पत्र देकर आवेदन किया था। आरोप है कि ग्राम सचिव ने आवेदनकर्ता महिला के जिंदा जेष्ठ प्रमोद कुमार के नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करके दे दिया। बबीता ने बताया कि जब उसने यह मृत्यु प्रमाणपत्र अपने मृतक पति के नाम से बीमा पॉलिसी को रिफंड कराने के लिए बीमा अधिकारी को दिया तो इसका खुलासा हुआ। उसे बताया गया कि यह आपके पति का नहीं, बल्कि जिंदा जेठ का मृत्यु प्रमाणपत्र है। यह बात सुनकर बबीता हैरान रह गई।
यह पहली घटना नहीं
इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उजागर हो चुका है। न्याय पंचायत अमरगढ़ क्षेत्र के गांव मदनगढ़ निवासी एक महिला की जमीन हड़पने के लिए एक वर्ष पूर्व जिंदा महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिया गया था। यह मामला तब खुला जब महिला गांव में आ गई थी। इसमें ब्लॉक के एक कर्मचारी की साठगांठ होने का भी आरोप लगा था।
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मृतक की बजाय जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसका पता किया जाएगा और लापरवाही बतरने वाले ग्राम सचिव पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृत व्यक्ति का सही प्रमाणपत्र बनवाया जाएगा। - महेंद्र पाल, खंड विकास अधिकारी ऊंचागांव।
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ऊंचागांव। क्षेत्र के गांव अमरगढ़ निवासी एक विधवा महिला ने अपने पति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे उसके जिंदा जेठ के नाम का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिया गया। इसमें ग्राम सचिव की लापरवाही बताई जा रही है।
गांव अमरगढ़ निवासी विधवा बबीता पत्नी विजेंद्र ने अपने पति की मृत्यु के बाद मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ग्राम सचिव को ग्राम प्रधान द्वारा प्रमाणित लेटर, मृतक का आधार कार्ड व शपथ पत्र देकर आवेदन किया था। आरोप है कि ग्राम सचिव ने आवेदनकर्ता महिला के जिंदा जेष्ठ प्रमोद कुमार के नाम से मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करके दे दिया। बबीता ने बताया कि जब उसने यह मृत्यु प्रमाणपत्र अपने मृतक पति के नाम से बीमा पॉलिसी को रिफंड कराने के लिए बीमा अधिकारी को दिया तो इसका खुलासा हुआ। उसे बताया गया कि यह आपके पति का नहीं, बल्कि जिंदा जेठ का मृत्यु प्रमाणपत्र है। यह बात सुनकर बबीता हैरान रह गई।
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यह पहली घटना नहीं
इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उजागर हो चुका है। न्याय पंचायत अमरगढ़ क्षेत्र के गांव मदनगढ़ निवासी एक महिला की जमीन हड़पने के लिए एक वर्ष पूर्व जिंदा महिला का मृत्यु प्रमाणपत्र बना दिया गया था। यह मामला तब खुला जब महिला गांव में आ गई थी। इसमें ब्लॉक के एक कर्मचारी की साठगांठ होने का भी आरोप लगा था।
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मृतक की बजाय जिंदा व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। इसका पता किया जाएगा और लापरवाही बतरने वाले ग्राम सचिव पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मृत व्यक्ति का सही प्रमाणपत्र बनवाया जाएगा। - महेंद्र पाल, खंड विकास अधिकारी ऊंचागांव।