{"_id":"65e9f154e846d1757003b834","slug":"life-imprisonment-to-all-three-murderers-of-gyanendra-bulandshahr-news-c-133-1-bul1003-112604-2024-03-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: ज्ञानेंद्र के तीनों हत्यारों को आजीवन कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: ज्ञानेंद्र के तीनों हत्यारों को आजीवन कारावास
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बुलंदशहर। अरनिया थाना क्षेत्र में साल 2019 में हुए ज्ञानेंद्र हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश, न्याय कक्ष संख्या छह विवेक कुमार के न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तीनों आरोपियों को दोषी माना। न्यायालय ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विमल कुमार ने बताया कि वादी मुकदमा राजकुमार निवासी गांव दशहरा थाना अरनिया ने 21 दिसंबर 2019 को थाने पर तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि उनके चाचा ज्ञानेंद्रप्रताप सिंह से करीब डेढ़ साल पूर्व खुर्जा देहात के गांव अचलपुर निवासी हेमंत ने साढ़े छह लाख रुपये उधार लिए थे। हमेंत ने दो माह में रुपये वापस करने का आश्वासन दिया था। आरोपी ने समय रहते रुपये वापस नहीं किए थे। ज्ञानेंद्रप्रताप सिंह ने कई बार आरोपी से अपने रुपयों का तकादा किया था। तकादा करने पर आरोपी हेमंत उनके चाचा से रंजिश रखने लगा था। आरोपी हेमंत ने 21 दिसंबर को पीड़ित के चाचा को फोन कर रुपये देने के लिए दशहरा टावर के पास बंबा पुल पर बुलाया था। जहां, उनके चाचा के पहुंचने पर आरोपी हेमंत अपने साथी ललित और महेंद्र के साथ कार से पहुंचा और ज्ञानेंद्र के साथ अभद्रता करने लगा। बाद में आरोपियों ने पिस्टल व रिवाल्वर से उनके चाचा पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से ज्ञानेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गोली मारने के बाद आरोपी मौके से कार में सवार होकर भाग निकले थे। ज्ञानेंद्र के साथ गए दो अन्य लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां से हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया था। हायर सेंटर में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को अवलोकन कर तीनों आरोपियों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
ये गवाह हुए पेश
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के रूप में वादी मुकदमा राजकुमार, तथ्य साक्षी सतेंद्र प्रताप सिंह और लक्ष्मीराज सिंह, चैक देने के साक्षी विनीत शर्मा, डॉ.श्रीकांत इंदू, हेड कांस्टेबल रामबाबू, उपनिरीक्षक मोहर सिंह, डॉ.राकेश शिशौदिया व विवेचक निरीक्षक अल्ताफ अंसारी को पेश किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुलंदशहर। अरनिया थाना क्षेत्र में साल 2019 में हुए ज्ञानेंद्र हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश, न्याय कक्ष संख्या छह विवेक कुमार के न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तीनों आरोपियों को दोषी माना। न्यायालय ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विमल कुमार ने बताया कि वादी मुकदमा राजकुमार निवासी गांव दशहरा थाना अरनिया ने 21 दिसंबर 2019 को थाने पर तहरीर दी थी। उन्होंने बताया था कि उनके चाचा ज्ञानेंद्रप्रताप सिंह से करीब डेढ़ साल पूर्व खुर्जा देहात के गांव अचलपुर निवासी हेमंत ने साढ़े छह लाख रुपये उधार लिए थे। हमेंत ने दो माह में रुपये वापस करने का आश्वासन दिया था। आरोपी ने समय रहते रुपये वापस नहीं किए थे। ज्ञानेंद्रप्रताप सिंह ने कई बार आरोपी से अपने रुपयों का तकादा किया था। तकादा करने पर आरोपी हेमंत उनके चाचा से रंजिश रखने लगा था। आरोपी हेमंत ने 21 दिसंबर को पीड़ित के चाचा को फोन कर रुपये देने के लिए दशहरा टावर के पास बंबा पुल पर बुलाया था। जहां, उनके चाचा के पहुंचने पर आरोपी हेमंत अपने साथी ललित और महेंद्र के साथ कार से पहुंचा और ज्ञानेंद्र के साथ अभद्रता करने लगा। बाद में आरोपियों ने पिस्टल व रिवाल्वर से उनके चाचा पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से ज्ञानेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गोली मारने के बाद आरोपी मौके से कार में सवार होकर भाग निकले थे। ज्ञानेंद्र के साथ गए दो अन्य लोगों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां से हायर मेडिकल सेंटर रेफर कर दिया गया था। हायर सेंटर में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई थी। मामले में पुलिस ने तहरीर के आधार पर तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को अवलोकन कर तीनों आरोपियों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
विज्ञापन
ये गवाह हुए पेश
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह के रूप में वादी मुकदमा राजकुमार, तथ्य साक्षी सतेंद्र प्रताप सिंह और लक्ष्मीराज सिंह, चैक देने के साक्षी विनीत शर्मा, डॉ.श्रीकांत इंदू, हेड कांस्टेबल रामबाबू, उपनिरीक्षक मोहर सिंह, डॉ.राकेश शिशौदिया व विवेचक निरीक्षक अल्ताफ अंसारी को पेश किया गया।
विज्ञापन